– अखिलेश अखिल

आदिवासियन के हिफाजत आ ओह लोग के सामाजिक, आर्थिक बढ़न्ती खातिर केंद्र आ राज्य सरकार अलग से बजट बनावेली. एकरा अलावे बहुते पुरान आदिवासी समूहन के बचावे सुरक्षित राखहू खातिर बहुते योजना चलेली सँ. ओही में से एगो ह, टीएसपी माने कि जनजाति उप योजना. हर राज्य के आदिवासी आबादी का आधार पर केंद्र सरकार हर साल भारी भरकम धन एह योजना में लगावेले. राज्यो सरकार अलगा से आपन टीएसपी योजना चलावेली सँ, लेकिन एह योजनन के लाभ आजु ले आदिवासियन के ना मिलल. जनजाति आयोग के चेयरमैन डॉ. उरांव के कहना बा कि ‘जब मनसा ठीक ना रही त बढ़न्ती के बारे बेमानी बा. आदिवासियन के आजु ले तरजीह नइखे मिलल. मिलल रहीत त आदिवासियन के दशा अइसन ना रहीत. आदिवासियन खातिर दिहल फंड के शुरूवे से लूटल जात बा आ एहमें सभे शामिल बा.’

झारखंड समेत पूरा देश में ट्राइबल सब प्लान घोटाला चलत बा, लेकिन एकर सबले मजबूत जड़ झारखंड में लउकत बा. एहिजा राज्य के आदिवासी उप योजना का बारे में ना त झारखंड सरकार के मुखिया के कुछ मालूम बा ना ही मंत्री से लगाइत जिला प्रशासन के कवनो खबर बा. ई फंड कहां आ कवना मद में खरच हो रहल बा एकर लेखा-जोखा कतहीं नइखे. पिछले महीना राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा आदिवासी एडवाइजरी कमेटी का बइठका ला दिल्ली पहुंचले, त उनुको लगे कवनो लेखा जोखा ना रहल. रउरा कह सकीले कि ओहिजा फंड के गबन हो चुकल बा. ऊपर से नीचे ले केहू एह बारे में कुछ बोले के तइयार नइखे. विभाग के मंत्री चंपई सोरेन हउवें लेकिन उनुको एकरा बारे में बेसी जानकारी नइखे. फोन पर कहलें कि, ‘हम एह बारे में जानकारी बिटोरत बानी, मिलते बता देब.’ राज्य के वित्त सचिव सुखदेव सिंह टीएसपी के पूरा रिकॉर्ड होखे के बाति त करत बाड़े लेकिन मुकम्मल जानकारी उनुको लगे नइखे. जनजाति कल्याण विभाग के सचिव राजीव अरुण एक्का से बतियावे के कहले.
अइसना में इहे लागत बा कि अगर जाँच करावल जाव त अरबों के घोटाला सामने आ सकेला.

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, टीएसपी के तहत राज्य के 2005-2006 में 58 करोड़ 96 लाख, 2006-07 में 70 करोड़ 41 लाख, 2007-08 में 77 करोड़ 11 लाख, 2008-09 में 87 करोड़ 93 लाख अउर 2009 से दिसंबर 2010 तक 85 करोड़ 92 लाख रुपिया दिहल गइल. माने कि पांच साल में 379 करोड़ 23 लाख रुपिया. एकरा अलावा केंद्र सरकार आदिम जनजातीय समूहन के विकास आ संरक्षण ला अलगा से धन देले. झारखंड में एह योजना में 9 गो जनजाति बाड़ी सँ, असुर, बिरहोर, बिरजिया, हिल खारिया, कोरबा, मल पहाड़िया, परहइया, सौरिया पहाड़िया अउर सावर. केंद्र एह योजना खातिर साल 2008 से 2010 के बीच झारखंड के 12 करोड़ 98 लाख रुपिया दिहलसि. एही पीटीजी विकास ला केंद्र सरकार एगो जनश्री योजना चलवले बिया आ ओहू ला एह राज्य के लगभग तीन करोड़ रुपिया दिहल गइल बा. दोसरो पीटीजी योजनन ला एह बीच 17 करोड़ दिहल गइल बा.

सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर प्रसाद के कहना बा कि आजु ले केहू एह तरफ ध्यान ना दिहलसि. अगर दे दिहल जाव त ए राजा के दूरसंचारो घोटाला छोट पड़ जाई. एह घोटाला में सगरी पार्टी के लोग शामिल बा. आदिवासी फंड लूटिये के प्रदेश के कुछ लोग माला-माल भइल बा.’

छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा के कहना बा कि ‘टीएसपी योजनन के शुरूए से लूट के अड्डा बना लिहल गइल बा. रमनो सिंह के सरकार में ई लूट होत बा. करोड़ों के खरच का बादो आदिवासियन का लगे ना त घर बा, ना भोजन के व्यवस्था. स्वास्थ्यो के कवनो इंतजाम नइखे. तब ई रुपिया जात कहां बा ? आदिवासी फंड लूटिये के अफसर आ नेता आपन घर चलावत बाड़े आ राजनीति करत बाड़े.’ एही प्रदेश के एगो आदिवासी विधायक कवासी लखमा के मानना बा कि आदिवासियन के विकास ला जवन फंड केंद्र सरकार देले ओहीमें से कुछ खरच करके रमन सरकार वाहवाही लूटेले. लखमा के कहना बा कि आदिम जनजाति मंत्री केदार कश्यप नेता ना बनिया हउवें आ आदिवासियन के हिस्सा लूटत बाड़े. अगर टीएसपी फंड के सही इस्तेमाल भइल रहीत त प्रदेश के आदिवासी आगा बढ़ गइल रहीत आ नक्सलोवाद पर अंकुशा लागीत.

टीएसपी योजना के सबसे बड़हब हिस्सा मध्य प्रदेश के मिलल बा. मध्य प्रदेश के कुल छह करोड़ के आबादी में आदिवासियन के आबादी एक करोड़ बाइस लाख के लगभीर बा. एहमें से 6 लाख आदिम जनजाति बाड़े. एह आदिम जनजातियन में बैगा एक लाख 31 हजार, सहारिया 4 लाख 71 हजार आ भारिया 2012 बाड़े. टीएसपी प्लान के तहत एह राज्य के 2005-06 में 81 करोड़ 86 लाख, 2006-07 में 101 करोड़ 26 लाख, 2007-08 में 91 करोड़ 29 लाख , 2008-09 में 126 करोड़ 44 लाख, 2009-2010 में 87 करोड़ 22 लाख आ 2010 के दिसंबर तक 145 करोड़ 57 लाख रुपये मिलल बा. एकर अलावे आदिम जनजाति विकास ला 2008-09 में 37 करोड़ 54 लाख, 2009-10 में 50 करोड़ 67 लाख आ दिसंबर 2010 ले 54 करोड़ 28 लाख रुपिया दिहल गइल बा. केंद्र से प्रायोजित दर्जनो भर से बेसी योजनन का बादो आदिवासी ओहिजे बाड़न. बैगा जनजाति आजु ले पहाड़ आ जंगल से बाहर ना निकलल. 2001 तक एह जनजाति के विकास पर 100 अरब से बेसी रकम खरचा हो चुकल बा आ बैगा के एकर खबरो ले नइखे.

मामिला के जाँच होखे : उरांव
केंद्र आ राज्य सरकारन के चलावल टीएसपी उप योजना से जुड़ल मसलन पर जनजाति आयोग के चेयरमैन डॉ. रामेश्वर उरांव से भइल बातचीत के अंश़..

टीएसपी योजना का ह ?
पांचवीं पंचवर्षीय योजना से आदिवासियन के विकास खातिर ई योजना चलावल जात बा. एहमें केंद्र सरकार राज्यन के धन भेजेले आ ओकर खर्च के ब्योरा योजना आयोग आ आदिवासी विकास मंत्रालय का लगे होला. एकरा अलावे राज्य सरकारन के आपनो टीएसपी योजना आ फंड होला.

इसमें केंद्र के बजट कतना होला ?
देश में आदिवासी आबादी 8 फीसदी के लगभग बा आ एही हिसाब से केंद्र सरकार अपना कुल बजट के 8 फीसदी हिस्सा टीएसपी खातिर देले. नियम का मुताबिक, केंद्र सरकार के सगरी मंत्रालयन के अपना बजट के 8 फीसदी एहमें दिहल जरूरी होला.

टीएसपी योजना लागू करे में कवना राज्य के काम बढ़िया बा ?
अबले महाराष्ट्र के काम सबले बढ़िया कहल जा सकेला, बाकी राज्यन में एह फंड के लूटल जात बा. आदिवासी इलाकन में नक्सलवाद के इहो एहो कारण बा. अगर एह योजनन के सही इस्तेमाल भइल रहीत त आजु हालात कुछ दोसर रहीत.

झारखंड में एह योजना में कतना लूट के अनेसा बा ?
बतावल मुश्किल बा लेकिन अतना तय बा कि ओहिजा ना के बरोबर काम भइल बा. मौजूदा सरकार के राज्य टीएसपी योजना के फंड आ ओकरा खरचा के जानकारी तक नइखे. मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पिछला पांच साल के हिसाब खोजत बाड़े लेकिन कवनो लेखा हइले नइखे. अर्जुन मुंडा पहिलहू सरकार चला चुकल बाड़न. उनुका त जानकारी होखल चाहत रहे. एगो बात सही बा कि राज्य में एह योजना के सही इस्तेमाल नइखे भइल आ भइलो बा त दोसरा मद में. अगर अइसन भइल बा त आदिवासियन का साथे अन्याय कइल गइल बा. हम चाहत बानी कि एह मामिला के जाँच होखो.


अखिलेश अखिल,
राजनीतिक संपादक, हमवतन साप्ताहिक, दिल्ली.
295ए, हनुमान मंदिर गली, मंडावली, दिल्ली 92

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