भारत हर साल आपन साढ़े तीन लाख टन इलेक्ट्रानिक कचरा निकालेला, उपर से विदेश से पचास हजार टन ई कचरा के आयात करेला. एह कचरा के पुनर्चक्रीकरण के नब्बे फीसदी काम असंगठित क्षेत्र में कइल जाला. एह क्षेत्र के संगठित व्यवस्थित करे का जगहा सरकार मसला के महटिया देबेले. अगर कवनो नियम कायदा बनावेले त संगठित उद्योगन खातिर जवना के बड़हन निवेश वाली कंपनी चलावेली सँ आ व्यवस्थित तरीका से एह काम के करे ली सँ. सरकार पहिला बेर एगो कंपनी के ई-कचरा आयात करे के लाइसेंस दिहले बिया. ऊ कंपनी एह कचरा के खुदे पुनर्चक्रीकरण करे का जगहा छोट छोट धंधन के बेच देबेले!

e-waste dump

सेन्टर फार साइंस एण्ड टेक्नोलाजी के पत्रिका डाउन टू अर्थ में एह बारे में एगो बड़हन आ विस्तार से रपट छपल बा जवना में एह तरह के नाजायज धंधा के पर्दाफाश कइल गइल बा. कतना चिंतनीय हालात में ई कचरा के पुनर्चक्रीकरण के काम हो रहल बा आ ओकरा से होखे वाला प्रदूषणो का बारे में विस्तार से जानकारी दिहल गइल बा.

एह रपट का मुताबिक दिल्ली के सीलमपुर से ले के यूपी के मुरादाबाद ले ई कचरा के काम करे वाला असंगठित धंधा पसरल बा. सरकार एह गलतफहमी में बिया कि ऊ अपना नयका कानून से एह क्षेत्र के नियमित कर पाई जवना में खाली रजिस्टर्ड कंपनियन के एह काम के अनुमति दिहल गइल बा.

रपट का मुताबिक साल २००७ में भारत में ३,३०,००० टन कचरा पैदा भइल जवन कि करीब एगारह करोड़ लैपटाप के बराबर बा. एह कचरा के दस फीसदी हिस्सा के पुनर्चक्रीकरण कइल गइल जबकि बाकी के फेर से सजा सँवार के बेच दिहल गइल आ कमाई कर लिहल गइल. व्यवस्थित कचरा उद्योग एकरा पर देखावे खातिर हाय तौबा मचावेला बाकिर भितरखाने ऊ खुदे एह धंधा के पनपा रहल बा. सरकार उपहार में कंप्यूटर के आयात पर रोक लगा दिहलस बाकिर मेटल स्क्रैप आ सेकण्ड हैन्ड इलेक्ट्रानिक उपकरणन के आयात खुला छोड़ दिहल गइल बा.

विकसित देश भारत आ दोसर विकासशील बा अविकसित देशन के कचरापेटी का रुप में इस्तेमाल कर रहल बाड़न सँ. यूरोपियन यूनियन का साथ होखेवाला एगो फ्री ट्रेड समझौता में कहल गइल बा कि पुरान सामान के उपयोग में आ चुकल भा फेर से उत्पादित सामान शामिल रही आ एह पर कवनो तरह के प्रतिबन्ध ना लगावल जाई! एह तरह का समझौतन से देश में आवे वाला ई कचरा में भारी बढ़ोतरी हो जाई.

सीएसई के सुनीता नारायन के कहनाम बा कि भारत या त अपना के कचरा पेटी मान लेव जवना में दुनिया आपन कचरा फेंकत जाव भा अइसन इन्तजाम करे कि खाली सुरक्षित आ पुनर्चक्री करे लायक सामाने आयात हो सके.

फैसला सरकार का हाथ में, भुगतल जनता का हाथ में.


(सीएसई का न्यूजलेटर का आधार पर.)

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