Ashutosh Kumar Singh

– आशुतोष कुमार सिंह

जइसे -जइसे विज्ञान के विकास भइल वइसे-वइसे ऊ मानव के रहन-सहन ओकर संस्कार आ ओकर सोचे के तरीका, सबकुछ बदल के रख देलस. आज ई विज्ञान के देन बा कि हमनी के कंप्यूटर के जुग में जिय तानी स. अउर त अउर इंटरनेट जब से आइल बा सब दुनिया के एगो मुट्ठी में समेट लेले बा. हिंदी होखे चाहे अंग्रेजी इंटरनेट प एह भाषा के साहित्य के सागर बावे. बाकिर जब हमनी के आपन भोजपुरी भासा आ साहित्य के बात करीले जा त परिणाम उत्साहजनक ना लउकेला. अइसन बात नइखे की भोजपुरी में लिखात नइखे. बाकिर दुखद पक्ष ई बा कि भोजपुरी के लेखक इंटरनेट से कोसो दूर बाड़न. आजो ऊ कागज जियान करे खातिर अभिशप्त बाड़न. अउर त अउर नीमन प्रकाशक ना मिलला के कारण उनकर साहित्य उनका कोठरी में सड़ रहल बा. ओकर रखवइया केहू नइखे.

बाकिर एह सब के बीच में कुछ लोग भोजपुरी के दुनिया के सामने पड़ोसे के कामो क रहल बाड़न आ कुछ करे के तइयारी में लागल बाड़न. पिछला 6-7 महीना में इंटरनेट प भोजपुरी में लिखे वालन के संख्या में बढ़ोतरी भइल बा.

एहिजा हम कुछ वेबसाइट आ सोशल नेटवर्किंग साइटन के चरचा कइल नीमन समझत बानी. सबसे पहिले ‘अंजोरिया डॉट कॉम’ के बात करे चाहत बानी. एह वेबसाइट के चला रहल बानी बलिया के ओमप्रकाश सिंह. भोजपुरी के लेके ई उहां के दिवानगिए कहाई कि ऊ एगो कमरा में एगो कंप्यूटर के सहारे आपन दोसर कामन से समय निकालके भोजपुरिया समाज से जुड़ल खबरन के हमनी तक पहुंचा रहल बानी. पिछला दिन उहां से बातचीत भइल रहे त ऊ बतावत रहनी कि हमरा त बलिया छोड़ के कहीं जाए के फूर्सेते नइखे मिलत. एही तरह जमशेदपुर में बइठ के एगो इंजिनियर भाई सुधीर कुमार भोजपुरिया डॉट कॉम चलावत बाड़न. मनोज तिवारी के डाक टिकट वाला प्रकरण के उजागर इहे भाई कइले रहन. अउर आज उनकर साइट भोजपुरी दुनिया में ठीक ठाक चल रहल बा. एही तरह दिल्ली में बइठ के पूर्वांचल एक्सप्रेस चला रहल बाड़न भाई कुलदीप श्रीवास्तव. इंटरनेट प भोजपुरी के प्रसार में इनको योगदान के कम नइखे आंकल जा सकत. एही तरह प्रभाकर पांडेय, मनोज भावुक, शैलेश मिश्रा, शशि सिंह, अभय कृष्ण त्रिपाठी, रशि्म सिन्हा, विद्युत मौर्या, उमेश चतुर्वेदी, मंतोष सिंह सहित अइसन कई गो ब्लागर बाड़न जे भोजपुरी के आपन-आपन ब्लॉग के जरिए
देश-दुनिया में फइलावत बाड़न. एही तरह वरिष्ट पत्रकार आ द संडे इंडियन हिंदी-भोजपुरी के कार्यकारी संपादक ओंकारेश्वर पांडेय जी आपन भोजपुरी मूमेंट के जरिए दुनिया के लोगन के बीच में भोजपुरी के झंडा उठवले बानी. एही तरह ‘बिदेशिया डॉट को डॉट इन’ के माध्यमो से भोपजुरी साहित्य के प्रसार हो रहल बा. एह साइट के सलाहकार जानल-मानल साहित्यकार पांडेय कपिल जी बानी जेकरा के हाले में आगरा में सेतु सम्मान से नवाजल गइल रहलह, जबकि संपादक निराला जी बानी आ एकर संरक्षक बीएन तिवारी (भाई भोजपुरिया) बाड़न आ एह साइट के समन्वयक पत्रकार प्रेम प्रकाश जी बानी. एही तरह भोजपुरी फिलिमन के खबर के परोस रहल बा भोजपुरिया फिल्म डॉट कॉम.

एही तरह एगो अउर वेबसाइट बटोहिया डॉट कॉम सुभाष झा ले आवे वाला बाड़न अउर एही तरह एगो भाई भोजपुरी खोज डॉट कॉम शुरू करे जा रहल बाड़न.

एह सब लोगन के प्रयास से इंटरनेट के माध्यम से भोजपुरी कुछ हद तक देश दुनिया के लोगन के लगे पहुंच रहल बिया बाकिर अबहीं अउर प्रयास करे के जरूरत बा. दिल्ली में भइल एगो भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी के जानल मानल साहित्यिक चेहरा कन्हैया प्रसाद जी कहले रहीं कि भोजपुरी के लगे अइसन-अइसन शब्द बा जवना के दोसर भासा मुकाबला नइखे क सकत. भोजपुरी के ई मिठास बनल रहो, ओकर विस्तार होखत रहो, घर-घर में भोजपुरिए में किलकारी लइका भर स. ई सब धरातल प ओह बेरा उतरी जब हमनी के आपन भोजपुरिया धरम के निभाइब जा. ना त आवे वाला समय में मालुम चली कि हमनी के नई पीढ़ी माई आ बाबूजी के मतलबे भूला जाई. आ ऊ डैड-मॉम के भासा बोले लगिहन. अउर तब जा के हमनी के कहब जा कि हमार लइका हमरा हाथ से बहक गइल बा. अगर आपन नयका पीढ़ी के नइखी लोग बहके देवे के चाहत त ओकरा में भोजपुरिया संस्कार भरे के प्रयास करी लोग. काहे कि भोजपुरिया संस्कार से संस्कारित लइका कबो मानवतावाद के खिलाफ नइखे जा सकत. ईहे हमनी के आपन धरमो बा.

अबहीं हाले में भोजपुरी फिलिम ‘नदिया के पार’ के कथा लेखक आ निर्देशक गोविंद मुनिस जी एह लोक से परलोक चल गइनी. भगवान उहां के आत्मा के शांति प्रदान करस आ उहां के परिवार जन के एह विपदा से उबरे के साहस देस.

अंत में हम आपन इंटरनेट भाई लोगन से कहे के चाहत बानी कि रउआ लोग जादा से जादा भोजपुरी कंटेट वेबजाल प डाली लोग जवना से आपन भासा आ बोली के प्रवाह में अउर गति आ जाव. अब रउआ सभे से विदा होखे के वक्त आ गइल बा. अगिला हफ्ता फेर मिलब एगो अउर चरचा के साथे.

राउर
आशुतोष कुमार सिंह


(संपर्क-bhojpuriamashal@gmail.com)
फोन : 09891798609
भोजपुरिया मशाल के नाम से ई कॉलम बिहारी खबर साप्ताहिक पत्र में छप रहल बा.

(संपादक के टिप्पणी : बहुत दिन बाद कवनो लेख अँजोरिया पर प्रकाशित हो रहल बा जवना में हम कवनो संशोधन नइखी कइले. जरुरत कई जगहा बुझाइल बाकिर हम जान बूझ के छोड़ दिहनी कि अँजोरिया के सुधी पाठक खुदे समुझ जइहें. )

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