– ममता सिंह

एंटीबायोटिक ओह रसायन भा दवाई के कहल जाला जवना के इस्तेमाल चिकित्सा में बैक्टीरिया भा दोसर रोग पैदा करेवाल जीवाणु के खतम करे भा ओकर बढ़त रोके खातिर कइल जाला.

डाक्टर लोग एंटीबायोटिक लेबे के सलाह तब देला जब हमनी का बैक्टीरिया से संक्रमित हो जानी भा तब जब वायरल संक्रमण का बाद द्वितियक बैक्टीरिया संक्रमण होखे के अनेसा होला.

एंटीबायोटिक के गलत भा असंयत इस्तेमाल का चलते प्रतिरोध के मामिला बढ़ल जात बा. एहिजा हम कुछ बातन के चर्चा करत बानी जवन एंटीबायोटिक के सलाह मिलला का बाद करे के भा न करे के चाहीं…

एंटीबायोटिक इस्तेमाल में करे लायक बात

१. पहिले से मौजूद कवनो चिकित्सकीय समस्या आ लिहल जा रहल दवाईयन का बारे में डाक्टर के जरूर बताई जेहसे कि ऊ सही एंटीबायोटिक के सलाह देसु.

२. यदि रउरा कवनो दवाई, जइसे कि सल्फा ड्रग आ पेनिसिलिन, से एलर्जी बा त ओकरो जानकारी डाक्टर के जरूर दे दीं.

३. यदि रउरा कवनो गर्भनिरोधक दवाई लेत बानी भा यीस्ट संक्रमण हो जाला त ओकरो बारे में बताईं.

४. अगर राउर पेट जल्दी खराब होखत होखे त ओकरो बारे में बता दीं जवना से सही एंटीबायोटिक दवाई लिखल जाव.

५. डाक्टर से पूछ लीं कि का कवनो अतिरिक्त प्रभाव के अनेसा बा, भा कवनो असहज स्थिति पैदा हो सकेला. आ ओकरा खातिर कवन दवाई लेबे के पड़ी.

६. एंटीबायोटिक ओही तरह लीं जवना तरह से सलाह दिहल जाव. कहे के मतलब कि कब लेबे के बा, कतना बार लेबे के बा, आ कतना दिन ले लेबे के बा,

७. एंटीबायोटिक लेबे का दौरान कवनो अवंछित प्रभाव नजर आवे भा कुछ असहज महसूस होखे त जतना जल्दी हो सके डाक्टर के बता दीं.

८. एंटीबायोटिक के भंडारण बतावल तरीका से करीं. सामान्य तौर पर कवनो दवाई के रोशनी से दूर ढंडा आ सूखा जगहा राखे के चाहीं.

एंटीबायोटिक इस्तेमाल में जवन काम ना करे के चाहीं …..

१. बीच कोर्स में दवाई लिहल बंद मत करीं. बहुते लोग के ई आदत होला कि जइसहीं लक्षण खतम होखे दवाई बंद कर देला लोग. एहसे रोग दुबारा होखे के भा बैक्टिरिया में प्रतिरोध क्षमता उपजे के अनेसा बन जाला. एहसे धीरे धीरे ऊ दवाई बेअसर होत जाला आ प्रतिरोधी क्षमता वाला बैक्टिरिया बढ़त जाले.

२. दवाई लिहला का दौरान ऊ खाना मत खाई भा शराब के सेवन मत करीं जवना से दवाई के असर कम हो जाला. एहसे डाक्टर जवन चीज खाये पिये से मना करसु तवना के पालन करीं.

३.अगर कवनो कारण से दवाई के खुराक लिहल भुला गइनी त अगिला समय दू बार के दवाईं मत ले लीं. अतने ध्यान राखीं कि दवाई लेबे के समय मत गड़बड़ाव.

४. सर्दी, जुकाम, फ्लू, गला में खराश, भा वायरस से होखे वाला कवनो बीमारी में एंटीबायोटिक के सेवन मत करीं जबले डाक्टर एकर सलाह ना देसु. अपना मन से कबो कवनो लक्षण खातिर एंटीबायोटिक मत लीं.

५. छोट बचवन का चहुँप से दवाई के दूर राखीं.

६. दवाई कबहियो खुला मत राखीं.

उपर लिखल बात कवनो डाक्टरी सलाह ना ह. ई त बस एह खातिर बतावल गइल कि रउरा का सावधानी राखे के चाहीं. बाकी सगरी सलाह अपना डाक्टर के मानीं.

संदर्भ :
1. Definition of Antibiotic; MedicineNet.com; October, 2011;
2. Antibiotics: Misuse puts you and others at risk; Mayo Clinic; October, 2011;
3. A Patient’s Guide to Proper Antibiotic Usage; Pharmacy Times; October, 2011;


ममता सिंह के अबले तीन गो किताब अंगरेजी में प्रकाशित हो चुकल बा. Migraines For The Informed Woman (Rupa & Co. Publishers), Mentor Your Mind (Sterling Publishers. EDR: April 2011) आ Rev Up Your Life! (Hay House India. EDR: June 2011). अकरा अलावे ममता सिंह हॉलिस्टिक हेल्थ थेरापिस्ट के प्रमाणित डिप्लोमा होल्डर, अमेरिका में आईएफए प्रमाणित एरोबिक इन्स्ट्रक्टर आ स्पोर्ट्स न्यूट्रनिस्टो हई. ममता सिंह दुनिया भर में अनेकन वेबसाइटन पर स्वास्थ्य आ फिटनेस पर नियमित रुप से लिखत रहेली. अपना व्यस्त समय में से कुछ कुछ ऊ अँजोरियो खातिर लिखत रहे के आश्वासन दिहले बाड़ी. जल्दिये ममता सिंह के लिखल पोस्ट अँजोरिया पर प्रकाशित होखल करी.

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