करिया धन + सफेद माफी = दाल में करिया

– पाण्डेय हरिराम

करिया धन का मामिला में सोनिया गाँधी आ राजीव गाँधी के नाम भाजपा के बड़का नेता लालकृष्ण आडवाणी घसीटले आ चारो ओरि पसरा दिहले कि सोनिया गाँधी आ राजीव गाँधी के बड़हन खजाना स्विस बैंकन में जमा बा. सोनिया गाँधी तब आडवाणी के चिट्ठी लिखली आ बतवली कि उनुकर कवनो विदेशी बैंक में कवनो खाता नइखे. एह चिट्ठी का जवाब में आडवाणी चट से माफी माँग लिहले. बड़ा अजब माजरा बा ई. आ कम से कम भाजपा जइसन दल के आडवाणी जइसन तपल तपावल लौह पुरुष का मुँह से अइसन हलुक बाति निकलल काफी शर्मसार करे वाला बा. काहे कि आडवाणी अतना कच्चा खिलाड़ी ना हउवन कि ना जानसु कि स्विस बैंक के खाता आ ओकरा बारे में असांजे के खुलासा के सच्चाई का बा ? जहाँ ले स्विस बैंक के खातन के ओह सूची के मामिला बा पता ना ओहमें का बा बाकिर सभका लागत बा कि बड़ा कायदा से रहस्य का किला में लुका के राखल स्विस बैंकन के बहुते सारा भेद सामने आवहीं वाला बा.

भारत में ई उत्साह सबले बेसी बा काहे कि अबहीं तक के आँकड़ा का मुताबिक स्विस बैंक में सबले बेसी करिया धन भारते के जमा बा. कहल जा ता कि साल ४७ का बाद से अबले बेईमान सब भारत से १५४६ अरब डॉलर लूट के ओहिजा जमा कइले बाड़न स.

ई आँकड़ा प्रामाणिक ना हऽ आ ना ही एकर पुष्टि के कवनो इन्तजाम हो पावल बा. रउरा गौर करेम कि दुनिया के सबले अमीर देश अमेरिका के नाम एह सूची में नइखे जबकि आजु से तीन साल पहिले अमेरिका स्विस बैंक एसोसिएशन से २८० अरब डॉलर के हिसाब ले चुकल बा. हिसाब ओकरा एहसे मिल गइल कि ओकरा एक हाथ में डंडा रहुवे आ दोसरा में थैली. डंडा से जानकारी लिहलसि आ थैली में से कई संस्थानन के रकम ओह बैंकन में राख दिहलसि. जवना अमेरिकी नागरिकन के हिसाब किताब मिलल रहे ओह लोग से अमेरिका टैक्स वसूल लिहलसि.

भारत में राम जेठमलानी से ले के रामदेव ले स्विस बैंकन में जमा भारत के धन के एगो बड़हन मुद्दा बना दिहले बाड़न. रकम अतना बड़ बा आ रहस्य अतना सम्मोहक कि बहुते सारा लोग एह अभियान में जुड़ गइल बा आ ऊ लोग वास्तव में देश भक्त बा. ओह लोग का हिसाब से अगर स्विस बैंकन में जमा भारत के सगरी करिया धन वापिस भारत में आ जाव त ओहसे भारत के सगरी कर्जा खतम हो जाई, अगिला तीस साल ले कवनो टैक्स लगावे के जरुरत ना पड़ी आ हर परिवार का खाता में अढ़ाई लाख रुपिया जमा हो जाई. मन बहलावे खातिर ई खयाल बहुते बढ़िया बा बाकिर एगो रहस्य के बाति बा कि जवना बैंक के हवाला असांजे दिहले बाड़न ओकर नाम हऽ जूलियस बेयर बैंक. बैंक के एगो पुरान अधिकारी असांजे के अतना बतला दिहले बा कि दुनिया भर के अरबो डॉलर के हिसाब सामने आ जाई. सूची में ३३ गो नाम भारत के खाताधारकन के बा. अब बैंक के एह साल के सालाना रिपोर्ट बतावत बा कि २०१० के अक्टूबर महीना में एह बैंक का लगे २७० अरब स्विस फ्रैंक के खाता रहे जवना में से १७५ अरब स्विस फ्रैंक के चालू खाता रहे. रिपोर्ट का अनुसार एह बैंक के स्थापना साल १८९१ में भइल रहे आ ३५०० कर्मचारियन वाला एह बैंक के शाखा दुनिया के चालीस देशन मेंबा जवना में हिन्दुस्तान के करीब वाला शाखा दुबई आ सिंगापुर में बा. अइसनका में जब हमनी का भारत के अरबो डॉलर के वापिस ले आवे के बात करत बानी त इहो ध्यान में राखे के चाहीं कि एक डॉलर में ९५०० स्विस फ्रैंक आवेला. जबकि अमेरिका के एक डॉलर में भारत के ४५ रुपिया आवेला. अब अइसनका में सिर्फ भारते के अरबो डॉलर के सपना के का होई ? तनी सोचीं ? एह सवाल के जवाब कवनो राम का लगे नइखे. स्विस बैंकन में पड़ल रुपिया अगर भारत वापिस आ पावे त हर हाल में देश के विकासे होखी. पहिले त एह करिया धन के असाध्य बीमारी से निपटारा होखो आ ई निपटारा कानूनिये तरीका से हो सकेला.

अइसन नइखे कि आडवाणी एह हकीकत से वाकिफ नइखन. उनुका लगे आम आदमी से बेसी जानकारी बा. बाकिर ई सियासी लाभ के साधन बना दिहल गइल बा. अगर आडवाणी जइसन नेता एह तरीका से फायदा उठावल चहींहे त दोसरा के का कहे के बा ?


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.