टाइम्स आफ इंडिया पर अपना ब्लाग में मशहूर पत्रकार एम जे अकबर कांग्रेस के मौजूदा हालात पर विचार करत लिखले बाड़न कि समय आ गइल बा जब पवार आ ममता बनर्जी के एह समय के फायदा उठावे के चाहीं.

एम जे अकबर के मानना बा कि इंदिरा गाँधी के कइल कांग्रेस विभाजन के बाद साल १९६९ मे शुरू भइल चक्र जवन महात्मा गाधी के बनावल पार्टी के रूपरंगे बदल दिहलसि अब जा के पूरा हो गइल बा.

साल १९२० २१ में महात्मा गाँधी आपन पहिलका जन आन्दोलन शुरू करत कांग्रेस के देशभक्त प्रोफेशनल का जकड़ से मुक्त करावत फेर से परिकल्पित कइले रहन आ ओकरा के जमीनी कार्यकर्ता सभ से जोड़ले रहन अपना के ओह जन आन्दोलन के तानाशाह कहे में ऊ हिचकिचाइल ना रहलें. बाकि इहो साँच बा कि पार्टी का भीतर ऊ वइसन तानाशाह ना रहसु. आदेश के सोच से जोड़त गरीबन से मिलल बेपनाह समर्थन के ऊ पार्टी खातिर बड़का ताकत बना दिहले आ समय समय पर पार्टी का भीतर चुनाव करा के भीतरी लोकतंत्र के सुनिश्चित कइले राखस. बाकिर गाँधी का बाद नेहरू आ इंदिरा गाँधी ले आवत आवत पार्टी आ नेता के बीच के फरक खतम हो गइल. इंदिरा गाँधी के पार्टी समस्या बुझात रहे आ साल ७१ में इंदिरा गाँधी के छितराइल विपक्ष के हरवला से बेसी खुशी संगठन कांग्रेस के हरा के मिलल रहे. ओकरा बाद हारल कांग्रेस संगठन बिला गइल काहे कि राजनीति में हार वाला के कवनो जगह ना मिले.

एम जे अकबर आगे लिखले बाड़न कि साल ७७ में मिलल हार का बाद परंपरा पर लवटे के एगो कोशिश भइल बाकिर फेर साल ८० में मिलल जीत का बाद सगरी सवाल गाड़ दिहल गइल. कहाए लागल कि जब ले अली आ कुली कांग्रेस का साथे रहीहें तबले केहू ना हरा पाई एकरा के. साल ९० में मिलल हार के जिम्मेदारी पार्टी का माथ पर इन्दिरा परिवार के सदस्य के गैर मौजूदगी पर डाल दिहल गइल. आ जब सोनिया गाँधी अध्यक्ष बन गइली त पार्टी फेरू अपना परनका ढर्रा पर आ गइल.

एम जे अकबर के कहना बा कि यूपी में मिलल हार के पूरा विश्लेषण आजु ले नइखे भइल बाकिर एह चुनाव में “अली” मुसलमानन ला १७ फीसदी आरक्षण के राहुल गाँधी के वायदा पर भरोसा ना कइलें अतना त तय बा. बाकि रायबरेली आ अमेठी जइसन गढ़ से कांग्रेस के सफाया पर अकबर के कहना बा कि फैसला के क्षण ओह के मानल जा सकेला जब प्रियंका अपना बुतइवन संगे अइली आ राबर्ट वाड्रा आपन हक हिस्सा माँगे लगलन, आजु के वोटर के सरकार चाहीं काल्हु के राजा ना.

अकबर अपना ब्लॉग में आगे लिखले बाड़न कि आजु वंशवाद घाटा पर बिकात बा आ एकर आभास लउके लागल बा. गैर इंदिरा परिवार वाला कांग्रेस पार्टियन के मिलल जीत एकर गवाह बा. बंगाल में ममता बनर्जी आ आगे चल के आंध्र में जगन रेड्डी के जीत एकर पुष्टि करत बा. एम जे अकबर के इहो कहना बा कि अगर शरद पवार चिरकुटही ना कइले रहतन त महाराष्ट्र आजु उनुका हाथ में रहीत. अकबर के राय में शरद पवार, ममता बनर्जी आ जगन रेड्डी के तिकोन एगो मजगर अलम्ब बन सकेला कांग्रेस, असली कांग्रेस के पुनर्जीवन के. उनुका राय में अइसनका कवनो कारण नइखे जवन एह तरह के पुनर्जीवित कांग्रेस में उड़ीसा के नवीन पटनायक आ बिहार के नीतीश कुमार के जोड़ लिहला से रोके. अगर अइसन हो सकल त एम जे अकबर का आकलन से साल २०१४ का चुनाव में सबले बड़ समूह इहे रही.

बाकिर का शरद पवार आ ममता बनर्जी एह मौका के हाथ में लीहें ?

कुछ त कहीं...

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