का हो अखिलेश, कुछ बदली उत्तर प्रदेश ?

– दयानन्द पाण्डेय

प्रिय अखिलेश जी,

आप त जानते हईं कि हमहन के देश के लोग आ खास कर के यूपी के लोग साक्षरता से लिहले रोजगार ले फिसड्डी बाड़े. विकास के बात कइल त खैर जरला पर नून छिड़कल जस हो जाला. ई विकासे के मार ह कि राहुल गांधी यूपी वालन के भिखारी शब्द से सुशोभित कर जाले आ फ़र्जी कागज़ फाडत-फाड़त आप के ताजपोशी ला लाल कालीन बिछवा जाले. अपने हालांकि तबहिये कह दिहले रहीं कि चुनाव परिणाम का बाद ऊ अउरियो बहुत कुछ फड़ीहें. आ देखीं ना हार सकरला का बाद से लोकसभा में लउकबो नइखन कइले. सुने में आवत बा कि अपना महिला मित्र का संगे कवनो परदेसी जमीन पर लउकल रहले. खैर, ऊ त चुनावी माहौल रहे. अपहू बहुत कुछ दाएं-बाएं बोल गइल बानी. कर करा गइल बानी. चलीं ओह सब के भुला देत बानी. बाकिर कबो राहुल से भेंट होखो त उनुका के बतायब जरूर कि यूपी के लोग अब देशे ना दुनियो में कई जगहा माथ पद पर भा अगिला कतार मे लउकेले. आ ई सब आजु से ना बरीसन बरीस से बा.

हँ, ई सही बा कि उद्योग धंधा ना रहला का चलते बहुते बेरोजगार नवही मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, आसाम वगैरह भा दुबई, बैंकाक, अफ़्रीका, आस्ट्रेलिया, लंदन, वाशिगटन वगैरह जगहन पर जात रहेले. कबो आस्ट्रेलिया, कबो आसाम त कबो मुंबई वगैरह में पिटातो रहेले. त एहमें ओह बेचारन के का दोष? ई सब त आप राजनेतवन के किरिपा बा. ओहिजा जाहूं में अउर पिटाहूं में. ना त देखीं ना जौनपुर से मुंबई गइल कांग्रेसी कृपाशंकर सिंह भा आज़मगढ से मुंबई गइल आपही के पार्टी के अबू आज़मी जे कबो मजदूर रहन, अब अरबपति बाड़न. भलही भठीयरपन वगैरह के अछरंग लाग गइल त का ! राजनेता होखे के कवच त बा नू. आ बहुते सगरी लोग अइसनो बा जे दिल्ली मुंबई ना गइल. लखनऊवे भा अपने गृह जनपद में कृपाशंकर सिंह आ अबू आज़मी के कान काटत बइठल बाड़न. केकर केकर नाम लीं आ केकर ना लीं ? अउर कि कवना पार्टी में ई भईया लोग नइखे. भठियरपन, दबंगई, गुंडई वगैरह में सबही एक दोसरा से अव्वल बाड़े. बसपा आ सपा त फोकट में बदनाम बाड़ी सँ. का कांग्रेस, का भाजपा, का पीस, का ई, का ऊ सगरी पार्टी में एक से एक टॉपर बइठल बाड़े. आप एहनी सब पर अँकुसा वगैरह लगावे के नाटको करब कि ना ? आ कि फेर जेपी ग्रुप भा पोंटी चड्ढा वगैरहनो पर कागजी तलवार भांजब ? आखिर एहसे पहिले ई लोग त अपनही के खेमा में रहुवे.

बताईं आपके कि हमहू कबो जहाज चलवले बानी. पानीओ वाला आ आसमानो वाला. तलवार आ बंदूको. बाकिर बचपन में. खिलौना वाला. कागज के नावो. जब कबि बरखा होखे नाव भा जहाज कहीं तुरते बनावत रहीं इ चलाइयो लेत रहीं. वइसहीं जइसे आपलोग चुनाव के एलान होखते घोषणा पत्र बना लीहिले, वादा-इरादा गढ लीहिले आ चुनाव बाद भुलाइयो जाइले. वइसहीं जइसे आप चुनाव में डी पी यादव के त पार्टी में शामिल करे से मना कर दिहनी आ साथही आज़म खां के तबहिये नाप लिहनी आ मोहन सिंह जइसन के शहीद करा दिहनी. लोगो के बहुते नीमन लागल. बाकिर ई का ? अपने त निर्दलीय राजा भैया जे पोटा, गैंगेस्टर वगैरह से सुशोभित हउवें, जेल यात्रा वगैरहो में निपुण हउवें, उनुको के जेल मंत्री बना दिहनी. निर्दलीय होखला का बावजूद. कुछ पत्रकार ना जाने कइसे सवाल उठा दिहले आप के सोझा त आप बता दिहनी कि राजनीतिक दुशमनी का चलते उनुका पर मुकदमा लिखाइल रहुवे. इशारे इशारा में बिना नाम लिहले कह दिहनी कि मायावती उनुका के रंजिश में फंसवली. आ कहनी कि तारीख देख लऽ. का बात करत बानी अखिलेश जी? तारीख त बतावत बिया कि राजा भईया पर सबले पहिला मुकदमा लिखाइल रहुवे साल १९८९ में. धारा १४७, १४८, १४९ आ ३०७ में. तब आपके पिताश्री मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहनी. कवनो मायावती वगैरह बा. त का आपहू के कबो कवनो राजनीतिक रंजिश रहल रहे राजा भईया से? तबहियो मंत्री बना दिहनी ? अतने ना जब ६ जुलाई, १९९५ के कुंडा के दलेरगंज में ३५ गो मुसलमानन के घर जरा दिहल गइल रहे तब तीन दिन ले एह मुसलमानन के घर धू-धू करके जरत रहल. आगजनी का बाद मुस्लिम लडकियन से बलात्कार करवा के ओकनी के गायबो करवा दिहल गइल रहे. दलेरगंज में तब सिर्फ़ बूढ़ आ लांगड़े बाचल रह गइल रहले. बाकी लोग घर छोड भाग गइल रहे. तब आपके पिताश्री मुलायम सिंह यादव हफ्ता भर ले विधान सभा ना चले दिहले रहले. एह मुसलमानन के कुसूर सिर्फ़ एतने भर रहल कि ऊ राजा भईया के वोट ना दिहले रहले. एहन के वोट नियाज़ हसन के मिलल रहे जे विधान सभा अध्यक्ष रहले.

कल्याण सिंह जब मुख्यमंत्री रहले तब उनुका साथे हम प्रतापगढ गइल रहीं. चुनाव कवरेज ला. ऊ तब राजा भईया के कुंडा के गुंडा कहिके ललकरले रहले. आजुवो गूगल पर कुंडा टाइप करब त पहिले कुंडा के गुंडे खुलेला. फेर कुछ अउर. कल्याणे सिंह राजा भईया पर पहिला बेर पोटा वगैरहो लगवले रहले. लेकिन पतित राजनीति के खेल देखीं कि कल्याणे सिंह राजा भैया के सबसे पहिले कैबिनेट मंत्री बनवले. राजा भईया जब राजभवन में किरिया लेबे बइठल रहले तवनो दिने राजा भईया पर वारंट रहल से हम तबके प्रमुख सचिव गृह हरीशचंद्र जी से बतवनी कि देखीं एहिजा अपने के एगो वांटेड अपराधी बइठल बा. ऊ तुरते चौकन्ना भइले आ पूछले कि कहवाँ ? हम किरिया लेबे वाला मंत्रियन का साथे बइठल राजा भईया के देखवनी त ऊ ढीला पड़ गइलन. मेहराइल मुसुकी फेंकत कहले आपहू का मजाक करत बानी ? इहे बात थोडका देर बाद हम तब के पुलिस महानिदेशक श्रीराम अरुण से कहनी. ऊ हडबडा गइले आ फ़ौरन उनुकर हाथ अपना रिवाल्वर पर चल गइल. बाकिर जब हम उनुका के राजा भईया के देखवनी त उहो थिरा गइले. ई तब रहे जब ई दुनु अधिकारी ईमानदार आ कड़क छवि वाला मानल जात रहलन. बलुक हम त श्रीराम अरुण से इहो कहनी कि बताईं, अगर आपके जगहा हिंदी फ़िल्म के नाना पाटेकर टाइप कवनो पुलिस अफ़सर होखीत त का करीत ? एहिजे पटक के पहिले राजा भईया के निपटा दीत. शपथ-वपथ बाद में होत रहीत. बाकिर श्रीराम अरुण बेचारा हंसी, मेहराइल हंसी हँस के रह गइले.

अखिलेश जी, आपके मालूमे होई कि राजा भईया पर अबहियो ३५ गो से अधिका मामिला दर्ज बावे. आपके शायद इहो मालूमे होई कि इलाहाबाद के चौधरी महादेव प्रसाद कालेज से थोड़िका पढाई कइले राजा भईया के उनकर पिता उदय प्रताप सिंह एहसे बेसी ना पढ़वले कि बेसी पढ़ला लिखला से आदमी कायर बन जाला. से देखीं ना राजा भईया कायर ना भइलन आ बहादुरी के कतना त कीर्तिमान स्थापित कर दिहलन. पोटा, गैंगेस्टर सब से सुशोभित बाड़े. आ आप हईं कि बतावत बानी कि उनुका के राजनीतिक रंजिश में फंसावल गइल बा. अरे मायावती अउर अमर सिंह के एके साथ रिगावही के रहल त कवनो दोसर तरकीब अजमवले रहतीं. ई तरकीब कबो हो सकेला कि भारी पड जाव.

प्रिय अखिलेश जी, अइसन नादानी कवनो सरकार के मुखिया के शोभा ना देव. आपके पिताश्री एहसे पहिले अमरमणि त्रिपाठी मामिलो में इहे कइले रहीं. जब ऊ मायावती मंत्रिमंडल सुशोभित करत रहले तबहिये मधुमिता के मरवावे के आरोप उनुका पर लागल. आपके पिताश्री उनुका नाकिन दम कर दिहलन. उनुका तब मंत्री पद से इस्तीफ़ा देबे के पड़ल. बाकिर ई का ! आपके पिताश्री के जब सरकार बनल त उहे अमरमणि उनकर तारनहार बन गइलन. अब त खैर ऊ मेहरारू संगे जेल के शोभा बढावत बाड़े बाकिर उनुका बेटा के त आप तार दिहनी. विधायक बन गइल बा. अचरज ई कि ओकरा के मंत्री ना बनवनी. आज़म खां से लगाइत शिवपाल, बलराम यादव, राजाराम पांडेय वगैरह सबही त आपके चचे हउवें. संबंधे में ना राजनीतिओ में. तनी सावधान रहब. आपके पिताश्री आपके मुख्यमंत्री बनवनी पुत्र मोहे में सही एहिजा ले त ठीक रहुवे. बाकिर ई जे आपन शिवजी के बरातो आप के माथे मढ़ दिहनी एकर का का कीमत आवे वाला दिनन में आपके चुकावे के पड़ी, से त आवे वाला दिने बताई. तवना पर आपके अपने कार्यालयो में अनिता सिंह जइसन चाचियन से निबाहे के पड़ी. साँचहू आपके पिताश्री ई सब करि के कतई ठीक ना कइनी. आशीर्वाद दे के कह त दिहनी कि आप अपना कुर्ता पर दाग ना लागे दीं. बाकिर जे तमाम दागी मंत्रियन आ अफ़सरान के फौज से आपके रुंध दिहनी, ओकर का करब आप ? एह बंधन आ बाधा से कइसे छुटकारा पाएब ? आपके साथ जाने-अनजाने हो इहे गंइल बा कि केहू आपके पाँख काट के हाथ में थमा देव आ पूछे कि भाई उड़त काहे नइखऽ ? हमरा त डर लागत बा कि बहुमत के सरकार का बावजूद आपके गति कहीं मनमोहनो सिंह से खराब मत हो जाव. भगवान बचाए आपके एह बला से ! खुदा महफ़ूज़ राखे हर बला से !

आप के पिताश्री मुलायम सिंह के राजनीति आ कार्यशैली से हमहीं का बहुते लोग वाकिफ़ बा. हम त बार-बार आपके पिताश्री के कवरो कइले बानी, साथ में यात्रा कइले बानी, बहुते सगरी इंटरव्यू कइले बानी. बलुक एक बेर त जान जात-जात बाचल. तब १९९८ में मुलायम सिंह यादव संभल से चुनाव लडत रहलन. हमहन कुछ पत्रकार कवरेज खातिर संभल जात रहीं कि एगो ज़बर्दस्त एक्सीडेंट हो गइल. सीतापुर से पहले खैराबाद में. हमहन के अंबेसडर आ ट्रक आमने-सामने लड गइल. हमार साथी जयप्रकाश शाही आ ड्राइवर के त मौके पर निधन हो गइल. हम आ गोपेश पांडेय कवनो तरह बाच गइनी जा. आपके पिता तब हमहन के इलाज आ देख रेख में कवनो कसर ना छोड़ले रहीं. सब से पहिले देखे आवे वालनो में उहें रहनी. हम जानत बानी कि अइसही अउरियो तमाम लोग के मदद ऊ हमेशा करत रहल बानी. चाहे सत्ता में रहल होखीं चाहे सत्ता से बाहर.

अबही ताज़ा कडी बनलन अदम गोंडवी. उनुकरो इलाज में, देखो-रेख में आपके पिता कवनो कमी ना होखे दिहनी. अब ऊ ना बचलन, ई अलगा बाति बा. से कहे के कुल मतलब ई कि मुलायम सिंह यादव के नियति अउर नीति से बार-बार वाबस्ता रहल बामी हम भा हमरा जइसन लोग. से समुझ में आ जात बा कि ऊ अब का कहब आ का फैसला लेहब ? अबहीं आपके देखल बाकी बा. तुरंत-तुरंत कुछऊ कहल जल्दबाज़ीए होखी. लेकिन अबही जवन पूत के पालना वाला पांव लउकत बा, ऊ बहुते भरोसा नइखे देत, ई कहे में हमरा इचिको संकोच नइखे. अबही जवन मायावती राज में उत्तर प्रदेश दलित उपनिवेश में तब्दील हो गइल रहल, लागत बा कि अब यादव उपनिवेश के आहट बा. मायावती राज में जइसे ब्राह्मणोवाद के छँवक लउकत रहुवे, लोग खाँसत रहल. यूपी के सेहत खातिर ना ऊ ठीक रहुवे ना ई ठीक बा. संतुलन बनावत चलला में का हरजा बा ? फेर आप अउर आपके पिताश्री त लोहिया माला जपे वाला हईं. लोहिया त एह सबके इचिको भर पसंद ना करत रहलन, त आपके गला से ई सब कइसे घोंटात बा ? आपके पिताश्री त खैर लोहिया लोहिया जपतो रहसु आ इहो सब करत रहसु अपना मुख्यमंत्रीत्व काल में. लोहिया के लगभग सगरी सिद्धांतन के ऊ तिलांजलि देत राजनीति करे के आदी हईं.

संचय का खिलाफ़ रहलन लोहिया. बाकिर मुलायम पर आय से अधिका संपत्ति के मामिला आजुवो सुप्रीम कोर्ट में लटकल बा. वंशवाद भा परिवारवाद का खिलाफ़ रहलन लोहिया. बाकिर देखीं ना आपके पूरा परिवार सत्ता में लोट-पोट बावे. आप खुदहु अपना पिता के विरासत सम्हरले बइठल बानी. जवना कांग्रेस का खिलाफ़ लोहिया भर जिनिगी लड़त रहलन, आप लोग पहिले ओही कांग्रेस दूध पियत रहीं, आ अब ओकरे के दूध पिआत बानी. त ई सब का ह ? अउर अइसने तमाम बात बा जवन लोहिया का खिलाफ़ आपलोग करते रहीलें. ई ठीक नइखे. ना आप खातिर, ना आपके पार्टी भा सरकार खातिर, ना ही यूपी भा देश खातिर. ठीक वइसही जइसे आप ऐलान कइले बानी कि मायावती के बनवावल स्मारकन से मूर्तियन के त ना हटाएब बाकिर ओहिजा स्कूल भा पार्क बनवाएब. ई ठीक नइखे. आप बार-बार कहत बानी जे बदला के कार्रवाई ना करब. बाकिर होखी ई बदले के कार्रवाई. आप मानीं चाहें मत मानीं, नाक आगे से पकड़ीं भा पाछे से बात एकही बा. अंबेडकर होखसु भा कांशीराम, एक बार आप उनका से असहमत हो सकीले, कवनो बात ना दस बार चाहे हजार बार होईं. बाकिर ऊ हमहन के समाज के सझवा के धरोहर हउवें, ईहो मान लिहला में कवनो नुकसान नइखे. ओह स्मारकन भा पार्कन में भइल धांधली पर त आप पूरा कार्रवाई करीं बाकिर ओहिजा स्कूल भा अस्पताल बनवावल तर्क सम्मत ना होखी. बहुते ज़मीन पडल बा उत्तर प्रदेश में. जतना चाहीं ओतना स्कूल भा अस्पताल बनवाईं. बाकिर ई बदला के कार्रवाई ठीक नइखे. कम से कम आपके सरकार का हित में त कतई ना. ना होखे त एक बेर पाछा मुड़ के इतिहास पर नज़र डाल लीं. आपके पिताश्री के एगो गुरु हईं चौधरी चरण सिंह. जनता पार्टी सरकार में जब केंद्रीय गृहमंत्री बननी त इंदिरा गांधी का खिलाफ़ एतना आयोग पर आयोग बइठा दिहनी कि जवना इंदिरा गांधी के जनता एकदमे साफ कर दिहले रहुवे, ओही इंदिरा गांधी के वापिस आवे में पाँचो साल ना लागल. अढ़ाईये साल में जनता फेर जनता पार्टी के धूरि चटावत इंदिरा गांधी के वापस दिल्ली में सत्ता दे दिहलसि. त ई आ अइसने गलतियन से बाचब तबहिये आप के आ यूपी के भला होखी. टकराव से त सभकर नुकसाने होखी. ई सही बा कि जनता मायावती के मूर्तियन आ पत्थरन के बिलकुल पसंद ना कइलसि. बाकिर जवन आप करे जात बानी, जनता उहो पसंद ना करी.

नीमन रही अखिलेश जी कि मतभेद आ रगडा-झगडा छोड उत्तर प्रदेश के विकास का राहे ले जाईं. जनता आप के रुप में विकास के सपना देखले बिया, विनाश के ना. नाहीं काल्हु के वापिस आके मायावती भा केहू अउर लोहियो पार्क में स्कूल भा अस्पताल खोले लागी. अइसन बातन के कवनो अंत ना होला. कवना कवना स्मारक भा पार्क के स्कूल भा अस्पताल में बदलब हमनी का भला? अबही पहिले त अपना पार्टी के लोगन के अनुशासन में बान्हीं आ कहीं कि दबंगई छोड के शांति कायम करे लोग. नाहीं अबही पांचे साल पहिले एगो नारा लागल रहल कि चढ गुंडन का छाती पर, मुहर लागी हाथी पर ! त तब हाथी के राज आइयो गइल रहे. बाकिर अबही अबही आप हाथी के साइकिल से कचारत राज करे आइल बानी, त अइसन कुछ मत करीं कि हाथी जल्दिये लवटि आवे. भा फेर इलाकाई पार्टियन से उबियाइल लोग पंजा भा कुछ अउर देखे लागे. अबहीं त देखीं ना कि हमरा गाँव से एगो पुरनिया आइल बाड़न. चुनाव घरी आपके भाषण सुन के बहुते मोहित रहलन आप पर. माफ़ करब आप के भाषण सुन के ना बलुक आपके भाषण में बेरोजगारी भत्ता के बात सुनि के मोहित रहलन. ऊ हमरा पाछा पड़ल बाड़न कि आपसे मिलवा देहीं. हम बता दिहनी कि आप बहुते बिजी बानी, मिल ना पाएब. बाकिर ऊ चाहत हईं कि कवनो तरह उनकर बाति आपले चहुँप जाव. त अखिलेश जी, ई चिट्ठी दरअसल उनकरे बात कहे खातिर लिखे बइठल रहीं. माफ करब बहुते कुछ दायां बाँया लिख दिहलनी. त ओह बुजुर्गवार के कहना बा कि उनहन के त आप ठग लिहनी. आ उनुके के ना सगरी जवार के ठग लिहनी. सभे आपके एही असरे वोट दिहले रहुवे. अब सभकर आसरा टूट गइल बा. ऊ कहत बानी कि जब आप बेरोजगारी भत्ता के भाषण दिहले रहीं तब उमिर के कवनो सीमा ना बतवले रहीं कि पैतीस का बादे बेरोजगारी भत्ता मिली. उनकर तीन गो बेटा आ एगो बेटि बिया. सब पढल-लिखल बेरोजगार. अबही पैतीस के होखे में दस साल से बेसी के टाइम बा. हम बतवनी जे घोषणा-पत्र में साफ लिखल बा पैतीस साल का बाद. त उहों के हमरा के साढ डपट दिहनी कि भाषण घरी कवनो घोषणा पत्र ना बँटाइल रहुवे.

अब हम उनुका के कइसे समुझाईं आ का समुझाईँ अखिलेश जी? आपही बताईं. बेरोजगारी भत्ता के साथे-साथ रोजगारो के तमाम योजना का ना चला सकीं आप ? आखिर बहुमत के सरकार हवे आपके. कुछऊ कर सकीलें आप. आप जवान हईं. एगो युवा के तडप आ उहो रोजगार के तडप का आप ना जानत होखब ? ज़रुरे जानत होखब. बंगला में एगो कहाउत कहल जाला कि केहू के खाये के मछरी दिहला से नीक होला कि ओकरा के मछरी मारल सिखा दिहल जाव. आपहू आखिर इहे काहे नइखीं कर देत ? आखिर कबले बेरोजगारी भत्ता देहत प्रदेश के नवहियन के भिखारी बनवले राखब ? अब देखीं ना क कि ई चिट्ठी आपके भेजे जाते रहनी कि तीन चार दिन पुरान अखबार लउक गइल. जवना में हमनी के एगो बुजुर्ग लेखक अमरकांत जी के ज्ञानपीठ सम्मान दिहला के खबर छपल बा. उहाँ के सम्मान लिहला का साथे एगो बयानो जारी कइले बानी. दरअसल उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लेखकन के हर साल जवन सम्मान पुरस्कार देत रहुवे ओकरा के मायावती अपना तानाशाही से रद्द कर दिहले रही. त अमरकांत जी चाहत बानी कि ओकरा के मुलायम सिंह बहाल करसु. अखिलेश जी, अगर आप एहू पर विचार कर सकीं त खुशी होखी.

हँ, ई चिट्ठी तनिका ना बहुते बड़हन हो गइल बा. का करीं बाते बहुत बा. अबहियों बहुत बात रह गइल बा. जे फेर कबो. एक बात अउरी बताईं कि मन करी त आपके अइसने अउरी चिट्ठी लिखत रहब. लोग के बात बतावे खातिर. एहूसे कि हम जानत बानी कि आपके अफ़सरशाही, कार्यकर्ता अउर अखबार, चैनल सब के सब अब चाटुकार हो गइल बाड़न. बिकाऊ आ पालतू हो गइल बाड़े. जवन बात आप के नीक लागे उहे बात आपसे कहीहें. बाकी पी जइहें. अब देखीं ना कि मायावती अफ़सरान के अतना टाइट कर दिहले रही कि बेचारा आपन बाते कहल भुला गइले. का आई ए एस, का आई पी एस, का पी सी एस, पी पी एस सबही आपन सालाना वीक तक मनावे के बरीसन के परंपरा तक तूड़ दिहलें एह पाँच सालन में. त जे लोग आपन बात कहहू में कायर भा नामरद होखे का हद ले चल जासु ओह अफसरन से आप उम्मीद करी कि ऊ जनता के दुख दर्द बता के भा आपके गलती बता के आ बैल हमरा के मार कहीहें ? का अइसहीं एगो एक नान आइ ए एस कैबिनेट सेक्रेट्री बनि के एहलोगन पर बरीसन राज कर गइल ? अउर ई अपना के रुलर के खांचा से बाहरो ना निकाल पवलें. अब त ई अफ़सर अतना दिन ले पिंजड़ा में बंद रह चुकल बाड़े कि आप गलती से जे बाहरो निकाल देहब एहनी के त ई उड़ ना पइहें. कवनो कुकुर बिलार भलही एहन के मार के खा जाव. रहल बात अखबार आ चैनलन के त उनुकर हालत त एह अफसरनो से गइल बितल बा. ई सब अब महज दुकान बाड़ी सं. जब जेकर सत्ता बा तब तेकर अखबार बा, तब तेकर चैनल बा. अबहीं के मायावती के रहल, अब आप के हउवें. अब बचले आपके कार्यकर्ता. त सत्ता मिलला का बाद ऊ होशो में बाड़े का भला ? वइसहू नीचे के नेतागिरी अब अउरो पतित हो गइल बा जइसे उपर के. से चिट्ठी हम लिखत रहब. आप अउर आपके मशीनरी के नीक लागे भा बाउर. हम त चिट्ठी लिख-लिख के पूछ्ते रहब कि “का हो अखिलेश, कुछ बदली उत्तर प्रदेश ?”
आप के,
दयानंद पांडेय


(सरोकारनामा से साभार)


लेखक परिचय : अपना कहानी आ उपन्यासन का मार्फत लगातार चरचा में रहे वाला दयानंद पांडेय के जन्म ३० जनवरी १९५८ के गोरखपुर जिला के बेदौली गाँव में भइल रहे. हिन्दी में एम॰ए॰ कइला से पहिलही ऊ पत्रकारिता में आ गइले. ३३ साल हो गइल बा उनका पत्रकारिता करत, उनकर उपन्यास आ कहानियन के करीब पंद्रह गो किताब प्रकाशित हो चुकल बा. एह उपन्यास “लोक कवि अब गाते नहीं” खातिर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान उनका के प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित कइले बा आ “एक जीनियस की विवादास्पद मौत” खातिर यशपाल सम्मान से.

वे जो हारे हुये, हारमोनियम के हजार टुकड़े, लोक कवि अब गाते नहीं, अपने-अपने युद्ध, दरकते दरवाजे, जाने-अनजाने पुल (उपन्यास, बर्फ में फंसी मछली, सुमि का स्पेस, एगो जीनियस की विवादास्पद मौत, सुंदर लड़कियों वाला शहर, बड़की दी का यक्ष प्रश्न, संवाद (कहानी संग्रह, सूरज का शिकारी (बच्चों की कहानियां, प्रेमचंद व्यक्तित्व और रचना दृष्टि (संपादित, आ सुनील गावस्कर के मशहूर किताब “माई आइडल्स” के हिन्दी अनुवाद “मेरे प्रिय खिलाड़ी” नाम से प्रकाशित. बांसगांव की मुनमुन (उपन्यास) आ हमन इश्क मस्ताना बहुतेरे (संस्मरण) जल्दिये प्रकाशित होखे वाला बा. बाकिर अबही ले भोजपुरी में कवनो किताब प्रकाशित नइखे. बाकिर उनका लेखन में भोजपुरी जनमानस हमेशा मौजूद रहल बा जवना के बानगी बा ई उपन्यास “लोक कवि अब गाते नहीं”.

दयानंद पांडेय जी के संपर्क सूत्र
5/7, डाली बाग, आफिसर्स कॉलोनी, लखनऊ.
मोबाइल नं॰ 09335233424, 09415130127
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