– सुशील झा

लड़िकाईं कें अधमुंदाइल आँखिन से अबहियों याद बा कि घर में कोयला प्लास्टिक के छोटहन बोरा में आवत रहे.

एगो चूल्हा होखल करे लोहा आ माटी के बनल जवना में लकड़ी आ कोयला डाल के हवा कइला पर आग जरत रहुवे. कोयला गोल ना रहत रहे. ओकर मुँह हमनिए लेखा टेढ़ मेढ़ बिना कवनो आकार के होत रहे.

जब कोयला जरे त ओहमें से सफेद धुआं उठे आ ओह धुआं से आंख जरे लागे. ओही धुंआ में हम परी बनावल करीं आ सोचल करीं कि बड़ भइला पर एही परियन से बिआह करब.

रात में जरत लाल कोयला पर रोटी फूलल करे. रोटी के ऊ सवाद हीटर आ गैस पर बनल रोटियन में कबो ना मिलल. जड़ाइल रातन में ई चूल्हा बड़ी काम आवल करे गरमावे ला, कोयला एक बेर जर जाला त देर लागेला ओकरा बुताए में.

कोयला के बोरा में कोयला टकराके बुकनी बन जाव त माई ओह बुकनी में भूसी मिलाके पिसान लेखा कुछ बनावल करे आ फेर ओह पिसान से पकोड़ा जइसन गुल्ला बनावल करे. फेर ओह गुल्ला के घाम में सूखा के कोयला का तरह इस्तेमाल कइल करे. कोयला के कण-कण कामे आ जाव.

कोयला के करीखा से हम डरातो ना रजनी काहे कि ऊ करीखा हमरा करिया देहि पर लउके ना. ओही घरी लड़िकाईं में एगो फिलिम आइल रहे जवना में अमिताभ बच्चन कोयला मज़दूर बनल रहलें. ओकरा बाद से हमार बाबूजी हमरा ला अमिताभ बच्चन हो गइल रहलें.

फेरू हीटर आइल, गैस आइल, कोयला छूटल, शहर छूटल आ हम शहर में कोशिश करे लगनी अपना देह के करीखा छोड़ावे के. हमरा का मालूम रहल कि कोयला उड़ के राजधानी ले आवेला. अलगा बात बा कि बारह सौ किलोमीटर के दूरी तय करे में कोयला के रंग सफेद हो जाला !

लुटियन के गलियन में आ नरीमन प्वाइंट चहुँपते कोयला के रंग बदलल जस लागेला. हमरा ला कोयला करिया रहल. राजपथ अउर नरीमन प्वाइंट पर कोयला के रंग झकझक उज्जर. एहिजा कोयला से लोग ना तो रोटी बनावे ना ही ओकर धुआं देखि के उनकर लड़िका नाचसु.

एहिजा कोयला के धुआं फेरारी अउर मर्सिडीज़ के रूप धइले उड़ेला. पांच सितारा होटलन में बड़का-बड़का सम्मेलनन में कोयला के नाम कोल हो जाला आ एह पर जवन रोटी सेंकाला तवना के राजनीतिक रोटी कहल जाला.

हमरा ई बदलल कोयला नीक ना लागे. हमार कोयला करिए ठीक रहल. एहिजा कोयला के उज्जर रंग आँखिन में गड़ेला. केहु कोयला के नाम भठियरपन आ घोटाला से जोड़े त हमार करेजा फाटेला. कोयला हमरा लड़िकाईं के खिलौना ह. हमरा बाप के मेहनत ह. हमरा मुंह के पहिला निवाला ह आ हमरा महतारी के मांग के सेनूर रहल बा.

कोयला बदनाम होखे, ई हमरा बरदाश्त ना होला बाकिर हम करिए का सकीलें.

हम त कोयला संग करिया हो गइनी. जे ताकतवर रहल ऊ कोयला के अपना साथे सफेद करे के कोशिश कइल बाकिर कोयला त कोयले होला…… कोयला के दलाली में मुंह करिये होखी उज्जर ना रहि पाई.


सुशील झा जी साल 2003 से बीबीसी में कार्यरत बानी बतौर रिपोर्टर. ओहसे पहिले दू साल पीटीआई भाषा में रहलीं. जेएनयू से एमए आ एमफिल हईं. पढ़ाई आ पालन पोषण झारखंड में भइल. सोशल मीडिया, धर्मनिरपेक्षता आ आदिवासी मुद्दन के अलावे समसामयिक मुद्दन में रुचि राखिलें.
सुशील जी के ब्लॉग बीबीसी पर नियमित रूप से प्रकाशित होत रहेला जहाँ से ई लेख लिहल गइल बा आ अनुवाद कर के पेश बा.

अँजोरिया के हमेशा से नीति रहल बा कि जतना संभव हो पावे तरह तरह के विचार पेश कइल जाव आ एही क्रम में सुशील झा जी के अनुमति से इहाँ के लिखल लेख के अनुवाद पेश बा.

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