– पाण्डेय हरिराम

अक्टूबर का शुरु में गाँव गइल रहीं. सिवान जिला के पचलखी पंचायत के खुदरा गाँव. बड़ बूढ़ बतावेलें कि कबही एकर नाम खुदराज माने सेल्फ गवर्न्ड रहे. अठारहवीं सदी का बादवाला अधिया में गाँव में पंचायती व्यवस्था रहुवे. वक्त के दीमक आ सामजिक लापरवाही कब खुदराज के “ज” चाट गइल, पता ना. कबो के निहायत पिछड़ा ई गाँव अपना बारे में कई गो कहानी लपेटले बा. सबले प्रामाणिक ई ह कि ..
उत्तरप्रदेश के कन्नौज का लगे मुगल आ फिरंगी सेना का युद्ध का बाद हारल मुगल सेना के बाचल-खुचल चार-पाँच गो सूरमा कान्यकुब्ज सरदार बिहार के हथुआ रियासत में पनाह लेबे आ गइले. अपना सामाजिक पिछड़ापन का चलते अज्ञातवास खातिर ई सबले बढ़िया जगहा रहुवे. हथुआ में भूमिहार राजा रहले जे ब्राह्मणन से पूजा-पाठ का अलावे कुछ अउर करा ना सकत रहले आ पंडितन के ई दल अयाचक रहे. तलवार चलावे वाला हाथ ना त चँवर डोला सकत रहन ना मंदिर में जा के पूजा के घंटी. एह चलते राजा अपना राज का एगो कोना में जमीन के एगो टुकड़ा वृति का रुप में दे दिहले. समय ओह सूरमावन के खेतिहर बना दिहलसि. वृति आजुवो ओहिजा ब्राह्मणन के काश्त में बा बाकिर सरकारी कागजात में ऊ वृत हो गइल बा.

बदलत समय का साथे आबादी बढ़ल आ लोग खेती-बाड़ी छोड़ नौकरी-चाकरी शुरु कर दिहल. शिक्षा कबहियो एह गाँव के पहिला पसन्द ना रहल, हालांकि एही गाँव के एगो शिक्षक देश के पहिला राष्ट्रपति डा॰ राजेन्द्रो प्रसाद के शिक्षक रहले. आजुकाल्ह गाँव के नवही विदेशी नौकरी का पाछा ढेर भागत बाड़े आ खाड़ी देशन के नौकरी के धूम बा ओहिजा. मामूली पढ़ल लिखल परिवारन में विदेशन से आइल पइसा के बहुलता एहिजा के लोगन में अनुशासनहीनता आ लापरवाही भर दिहले बा.

गाँव भुलाइल शहरन में
मनई भुलाइल मशीनन में.
हर तरफ आग काहे लागल बा
देश के सावनी महिनो में ?

एह घरी बिहार के गाँव चुनाव का प्रति जागरूक बाड़े. शायदे केहु होखी जे चुनावी गणित में अपना के विशेषज्ञ ना समुझत होखे. एकरा के देख के त इहे लागेला जइसे “राग दरबारी” के शनीचरा हर जगह मौजूद बा. अपना जाति के वोट आ लाठी के ताकत बढ़ावे खातिर आम आदमी जनसंख्या बढ़ावे में पूरी जोग से लागल बा ! व्यस्त रहे खातिर ऊ दोसर कवनो काम ना करे. दबल-छुपल बेरोजगारी से पूरा गांव त्रस्त बा. गांव के कई जगहा लोग गोल घेरे में बइठल ताश भा जुआ खेलते मिल जाई. एह खेल में खिलाडिय़न के साख अइसनका नवही प्रमाणित करे लें जे थाना-पुलिस से थोड़-बहुत जुगाड़ राखेलें आ जरुरत पड़ला पर कवनो विवाद में दान-दक्षिणा देके मामिला रफा-दफा करा सकेलें. सही मायने में उहे लोग गांव में नेता बा .

एह मामिला में बाबा रामदेव के कहना सही लउकत बा कि गाँव के राजनीति थाना आ ब्लाकन से चलावल जाले. पुलिस के एगो सिपाही भा दरोगा कवनो के नेतागिरी हिट कर सकेला भा पिट कर सकेला. एह चलते आमतौर पर नेतागिरी के इच्छा राखे वाला कवनो आदमी पुलिस का खिलाफ ना जाव. एहिजा पुलिस पंचायतन का हिसाब से ना चले, पंचायते पुलिस का हिसाब से चलेली सँ. गांव के कुछ समझदार आ पढ़ल-लिखल लोग बतावता कि पंचायती राज कानून बने से पहिले आजादी के बाद ग्राम स्वराज के संकल्पना में गांवन के विकास के केन्द्र बनावल प्रस्तावित रहे बाकिर पता फिर कब आ कइसे गांव का जगहा ब्लाक आ सब-डिवीजन काबिज हो गइले. अब बस सचिव आ कर्मचारी गांव खातिर बहाल होले बाकिर ओकनि के कार्यालय ब्लाक भा तहसीले में होला आ ओकर असली ताकत जिला मुख्यालये पर होला. अब प्रधान उनकर बाट जोहेलें आ कबहिये-कभार एह लोग के दर्शन गांवन में होला.

गांव में एगो कहनाम बहुते चलन में बा… मुखिया के चुनाव, प्रधानमंत्रीओ के चुनाव से कठिन होला. आ वास्तवो में अइसने बड़लो बा. काहे कि पूरा पांच साल तक के सम्बध, अब वोट निर्धारित करेला ना कि गांव समाज के आपुसी सम्बध. चुनाव में ई साफ रहेला कि के केकरा के वोट दिहले बा. अब गांव के मुखिया के हैसियत पहिले के विधायक के बराबर बा. इहो बिल्कुले साँच बा काहे कि अब गांव के विकास खातिर अतना बेसी पैसा आवता कि ओकरा में हिस्सेदारी के कीमत कवनो रंजिश के बरदाश्त कर सकेले. एह चलते गांव में झगड़ा आ रजिंशो बढ़ल बा. दलित गांव घोषित भइला पर सरकार गांव में पइसा के थैली खोल देबेले आ गांववाले दलित गांव में बने वाली सीमेंटिड सड़क पर भैंस आ बैल बान्ह के ओकर उपयोग करत बाड़े . एकरा के रोकल झगड़ा के नेवता दिहल बा. मनरेगा के धन गांव के कायाकल्प करे भा ना मुखियाजी के कायाकल्प त करिये देत बा. फर्जी मजदूरी के भुगतान मस्टर रोल पर देखावल जा रहल बा. शासनो के जोर अबहि मनरेगा के पइसा खरच करे पर बा, सदुपयोग भा दुरुपयोग के आकलन बाद में होखी. दर्जनभर से बेसी लाभकारी योजना पंचायत चुनावन के मंहगा कर दिहले बाड़ी सँ. गाँव में साँझो होखे के इन्तजार नइखे कइल जात आ मांस-मदिरा के सेवन बड़ा चाव से हो रहल बा.

स्वाभाविक बा कि जब ज्यादा पइसा खर्च होखि त कमाईओ ओही अनुपात में कइल जाई. एहसे एम.एल.ए., एमपी चुनावन में हरेक मुखिया आ बी.डी.सी. मेम्बर के मोट रकम मिल जात बा. एम एल सी जइसन परोक्ष चुनावन में त खुलेआम वोट खरीदल-बेचल जा रहल बा. अगर हमनी का एह चनावन का समय आचार संहिता के अनुपालन पर ध्यान ना देब त एकर असर सांसदन के चुनाव तक पर पड़बे करी. मेहरारुवन के आरक्षण के सवाल होखो भा एस.सी, एस.टी आरक्षण के मसला, चुनाव के असली डोर मरदन आ मजगर जातियन का हाथ में चलि गइल बा. महिला मुखिया चयनित गांव में कबहियो कवनो बईठक में रउरा ओह महिला के ना देखब जे वास्तव में प्रधान बा. ओकरा जगहा प्रधानपति भा प्रधानप्रतिनिधी जइसन लोग लउकीहें. हँ पंचायती राज के एगो बड़हन प्रभाव बड़ा साफ झलके लागल बा कि अब गांव के कवनो आदमी सरकारी दौरा के कवनो तवज्जो ना देला. ऊ बस फायदा देबे वाला सरकारी कारकूनन के चिन्हेला.

कुछऊ होखे अतना त साँच बा कि पंचायती राज लोकतंत्र के निचला पायदान तक खुशहाली भलही कुछुवे आदमी तक पहुंचवले होखे, आम आदमी के राजनैतिक रूप से जागरूक जरुर बना दिहले बा. आ एह जागरुकता में गांव के लोग मोह, माया, कोमलता, नफासत वगैरह भुला गइल बाड़े. पहिले इनार के पानी मीठा लागत रहे अब ओकरा में चिरइयन के कंकाल मिलेला. नहर के पानी पहिले नीला झलकत रहुवे अब ऊ गंदला हो गइल बा.

गांव का मेला में अबकी पिपुही ना मिलल त नातिन खातिर भोंपा खरीदे के पड़ल. खुरमा आ गट्टा बाजार से गायब रहुवे आ ओकरा जगहा बिकाये वाला बेरंग जलेबियन में खमीर के खटास का जगह यीस्ट के कड़ुवाहट मुंह के जायका खराब कर देत रहुवे. बजरंग बली के मंदिर के चबूतरा से सटल अंडा के दुकान आ सामने सड़क का पटरी पर बकरी के गोश्त के बिक्री तेजी पर रहुवे. बजरंग बली का जुलूस में आकेस्ट्रा पर बाजत दुअर्थी भोजपुरी गाना पर नाचत-कूदत नवहियन का मुँह से निकलत दारू के भभका लड़िकाईं में देखल महाबीरी अखाड़े का मेले के रुमानियत पर माटी डाल दिहलसि. केहू तरह हफ्ता गुजरल आ मन उचटि गइल. ओहिजा से भअग निकलनी.

गाँवे गइनी गाँव से भगनी
सरकारी स्कीम देख के,
पंचायत के चाल देख के,
रामराज के हाल देख के,
अंगना में दीवाल देख के,
गाँवे गइनी, गाँव से भगनी.

सौ-सौ नीम हकीम देख के,
घिघियाइल इंसान देख के,
कतहूं ना ईमान देख के,
बोझ भइल मेहमान देख के,
गाँवे गइनी, गाँव से भगनी.

नयका धनी के रंग देख के,
बातचीत के ढंग देख के,
पुलिस चोर के संग देख के,
हम आपन औकात देख के,
गाँवे गइनी, गाँव से भगनी.


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.

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