– रामरक्षा मिश्र विमल

हमनी के ‘गोधन’ (भैया दूज) मनावे के तरीका अलग होला।

आजु भोरहीं मए बहिनि अपना भाई के भर मन सरापेली सन आ फेरु जीभि में रेंगनी के काँट गड़ाके प्रायश्चित करत आपन बात लौटावेली सन आ शुभकामना प्रकट करेली सन।

ई बहुत जरूरी बा नया पीढ़ी के जानल, खासकर जे बहरवाँसू बा। तबे ई कुल्हि परंपरा बाँचल रहिहें सन।

अपना एह तेवहार से जुड़ल अउर जानकारी जेकरा भीरी होखे, ऊ जरूर प्रस्तुत करो ताकि ज्ञान के प्रचार-प्रसार होखो। गोधन के परिचय आ उनुका कुटाई के कहानी जेकरा मालुम होखे, जतने मालुम होखे, जरूर लिखे।


(फोटो अंतर्जाल से साभार)

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