बहुते जोर-शोर से उठल भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता क मांग

जगदीश्वर गोवर्धन के स्वागत करत अजीत दुबे, जगदम्बिका पाल, आ मनोज तिवारी. शाल ओढ़ावल गोवर्धन जी हवें.

जगदीश्वर गोवर्धन के स्वागत करत अजीत दुबे, जगदम्बिका पाल, आ मनोज तिवारी. शाल ओढ़ावल गोवर्धन जी हवें.

पिछला 11 अगस्त का दिने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी समाज दिल्‍ली भारत में मारीशस के उच्‍चायुक्‍त जगदीश्‍वर गोवर्धन के अभिनंदन समारोह आयोजित कइलसि. एह समारोह में केन्‍द्रीय मंत्री आ राज्‍यपाल रह चुकल डॉं. भीष्‍मनारायण सिंह के अध्‍यक्षता में सांसद जगदम्बिका पाल, अर्जुन मेघवाल, आर. के. सिन्‍हा, मनोज तिवारी, विधायक आदर्श शास्‍त्री आ सीआईएसएफ के डी जी रहल के. एम. सिन्‍हा मौजूद रहनी जा. एह समारोह में भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता के मुद्दा पर खूब खुलके बात भइल आ सरकार से एह मुद्दा के जल्दी से सलटावे के मांग कइल गइल. एही मौका पर भोजपुरी समाज के स्‍मारिका के विमोचनो भइल.

भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष अजीत दुबे कहलन कि भारत में मारीशस के उच्‍चायुक्‍त के रूप में जगदीश्‍वर गोवर्धन के नियुक्ति से दुनु देश के संबंध अउरी पोढ़ होखी. भोजपुरी के बारे में पिछलका यूपीए सरकार पर वादा-खिलाफी के आरोप लगावत दुबे जी कहलन कि ऊ सरकार देश विदेश के करोड़न भोजपुरियन के महज खयाली पोलाव परोसलसि. आशा जतवलन कि अब देश में भारतीय भाषावन के पक्षधर सरकार आइल बिया त आशा लागल बा कि ई सरकार भोजपुरी के ओकर हक दे दी. बतवलन कि आजुए सांसदन के एगो प्रति‍निधिमंडल देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मिलल आ भोजपुरी, राजस्‍थानी आ भोटी भाषा के संवैधानिक मान्‍यता देबे के निहोरा कइलसि.

अपना सम्मान में बोालावल एह सभा में बोलत मारीशस के उच्‍चायुक्‍त जगदीश्‍वर गोवर्धन कहलन कि मारीशस के छोट भारत कहाला आ हमहन के भाषा, संस्‍कृति, परम्‍परा पूरा तरह से भारतीयता के रंग में रंगाइल बावे. उहो आस जतवले कि भारतो में भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता मिल जाई.

सांसद जगदम्बिका पाल आ मनोज तिवारी भोजपुरी के एह आन्दोलन में हर तरह से शामिल रहे आ कवनो कोर कसर ना छोड़े के वादा कइलन.

कार्यक्रम का संचालन समाज के वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष प्रभुनाथ पाण्‍डेय कइलन आ वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष गरीबदास, महामंत्री एल. एस. प्रसाद, संयोजक विनयमणि त्रिपाठी, कृपालु ट्रस्‍ट के ट्रस्‍टी रामपुरी, देशबंधु के वरिष्‍ठ सलाहकार अरूण कुमार सिंह वगैरह अनेके कवि, लेखक, वकील, अध्‍यापक, समाजसेवी, पत्रकार आ अउरिओ बुद्धिजीवी उपस्थित रहलन.


(हिन्दी में आइल विज्ञप्ति के भोजपुरी अनुवाद. दोसरा लोग के लाज लागो भा ना, हमरा जरूर लागेला कि भोजपुरी के बात करत घरी हम कवनो भोजपुरिया से हिन्दी भा अंगरेजी कूटीं.)

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