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रजवा के बेटिया भइली कंगरेसिया हो रामा, चोलिया पर. चोलिया पर जय हिन्द लिखवली हो रामा चोलिया पर.

जानत बानी कि फगुआ के मौसम ह आ ई गीत चइता के ह. बाकिर माहौल कुछ अइसने बन गइल बा आ चरचा में दू गो अइसन मॉडल आ गइल बाड़ी जे अपना अपना नेता के प्रचार करे ला आपन कपड़ा ले उतार दिहली. केहू अपना नेता के पोस्टर से आपन देहि तोपले बा त केहू अपना पार्टी के झंडा आ चुनाव चिह्न के पहिर के आपन खास हिस्सा छिपवले बा.

तय बा कि एह सभ पर बवाल मचबे करी आ मचियो गइल बा. लोग मचमचा के एह पर चरचा करत बा. एगो एंकर त रस ले ले के दु नू मॉडलन के इंटरव्यू लेत रहलन आ उ बेचारी कसमसा कसमसा के अइसने कुछ जवाब देत रहुवे. एगो चैनल बैनर लगा लिहलसि कि ये लड़कियाँ मोदी राहुल को ले डुबेंगी! आजु हो सकेला कि रउरो सभे में से कुछ लोग भड़क जाव कि का बेहूदा बात उठा लिहलन. घर में बेटीओ बेटा पढ़ेलें आ एह तरह के फजूल के चरचा उठा दिहल गइल बा. बाकिर एह में कहीं कुछ नाजायज नइखे. वइसे हम नाजायज कबो कुछ लिखलो ना चाहीलें. जे लोग आजु के लेख पर आपत्ति करे ओह लोग से बस अतने पूछल चाहब कि कवना शब्द भा वाक्य प अपने के आपत्ति बा? याद आवत बा मंटो का खिलाफ चलल मुकदमा के एगो मशहूर जवाब जवना में मंटो प आरोप लागल रहे कि ई अपना कहानी में छाती शब्द के इस्तेमाल कइले बाड़न. एह आरोप प झुंझुआ के मंटो पूछलन कि अरे भाई औरत के छाती के छाती ना लिखीं त का लिखीं? खैर हम ई सवाल रउरा से नइखीं करे जात.

असल में हमार इरादा कुछ अउर लिखे के रहुवे. आ उहे सोचत रहीं जब सामने टीवी पर एह निगोड़ियन के चरचा आवे लागल. हमहु चरचा में डूब गइनी आ पत से पतुरिया के बीच के चरचा हट के जवान होखत राजनीति पर चलि आइल. देश के बड़हन आबादी आजु जवान बा. सड़क से ट्रेन ले, सिनेमा हॉल से बाजार ले जँहे देखीं तहें एह नवहियन के झुंड लउकी. फगुनहट के मूड में सवाल पूछीं त बड़के बुढ़वन के जवाब देबे के पड़ी कि आखिर ई आबादी आइल त कइसे. एहमें राउरो योगदान बा मानीं भा मत मानीं. घर के बड़ बूढ़ संस्कार तमीज सिखावल छोड़ दिहले, स्कूल कॉलेज में मास्टरजी लोग पढ़ावल छोड़ दिहल, आ राज करे वाला नेता लोग एह बहकल जमात के सम्हरला का बदले अउरी सहकवले जात बाड़े. रोजगार ना दीहें, बेरोजगारी के भत्ता दे दीहें. स्कूल में मास्टर के जगहा खाली रही बाकिर विद्यार्थियन के लैपटॉप दे दीहें. अस्पताल में डाक्टर ना रहीहें बाकिर घरे से अस्पताल चहुँपावेला एंबुलेंस के कतार लगा दीहें. समय बदल गइल बा आ समय का साथे समाजो बदलि गइल बा. पहिले बसंत पंचमी से फगुआ ले चालीसे दिन के छूट रहुवे भर फागुन बूढ़ देवर लगीहें भा झुलवा झारि के पहिर गावे के. अब त भर साल अइसने गीतन के बहार बहत रह ता. कबो शीला जवान हो जात बाड़ी त कबो मु्न्नी बदनाम. जब ले बाति हिंदी में होखे तब ले कवनो हल्ला ना होखे बाकिर अगर कहीँ भोजपुरी में हो गइल त बवाल होखे लागी कि भोजपुरी के अश्लील बनावल जात बा. ठीक ओही तरह जइसे हर हिंदू त्योहार पर विद्वान लोग नियम कूंचे लागेला कि होलिका दहन वइसे ना अइसे होखे के चाहीं, फगुआ में रंगं कादो कीचड़ के खेल ना होखे के चाहीं, दिवाली पर पटाखा ना फूटे के चाहीं, चुनाव में पोस्टर बैनर ना लागे के चाहीं. कहे के मतलब कि हर खुशी उमंग के मौका पर मनहूसियन छितरावे लागेला लोग.

नवही अब आपन राजनीति अपना तरीका से, फेसबुकिया स्टाइल में चलइहें. देखते बानी कि बिना जमीनी संगठन के कइसे आ आपा दिल्ली में सरकार बना लिहलसि. काल्हु तनीषा भा मेघना अपना अपना पार्टियन के स्टार प्रचारक बन जासु त चिहइला के जरूरत ना होखे के चाहीं. अलग बाति बा कि हमार सोचल पत से पतुरिया के चरचा धइले रहि गइल. चलीं अगिला बेर देखल जाई.

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