जाल के जाला (बतकुच्चन – 202)

जाल, जाला, जाली, जंजाल, संजाल, मायाजाल, इंद्रजाल, मोहजाल, महाजाल; पता ना कतना जाल आ कतना जाला कि सझुरावते परेशान हो जाए आदमी. जाल बुनल जाला, जाला लाग जाला आ जाली बनावल जाले. कबो दोसरा खातिर त कबो अपना खातिर.

एह जाल के दायरा अतना बड़ बा कि बुझाते नइखे केने से शुरु करीं. कह सकीलें कि ई आजु हमरा ला जंजाल बन गइल बा. जाल जवन खुद के अझुरा देव ओकरा के जंजाल कहल जाला. अइसन ना कि जाल हमेशा दोसरे ला लगावल जाला. कई बेर त ई अपना आ दोसरो के फायदा ला लगावल जाला. जइसे कि इंटरनेट के जाल में आजु सगरी दुनिया डूबल बिया. पता नइखे लागत कि के एहमें अझुराइल बा आ के एकरा के आपन समस्या सझुरावे ला इस्तेमाल करत बा. अझुरा दिहलसि त जंजाल हो गइल, काम बना दिहलसि त संजाल हो गइल. नेटवर्क के संजाल कहल जाला. काहें कि एगो निमना मकसद से एक के दोसरा से जोड़ेला. लोग के अझुरावे ना ओह लोग के सझुरावे में मदद देला.

आ जब कवनो दोसर कीड़ा मकोड़ा भा विरोधी आ दुश्मन जाल के जाला बिछा दिहले होखे त ओकरा के मौका मिलते साफ कर दिआला. जइसे घर का कोना दोगा में लागल मकड़ी के जाला होखो. जाला गंदा लागेला. बाकिर जाली ?

जाली दू तरह के होले. एगो बनावल आ दोसरका बन गइल. जइसे घर के खिड़कीओ के जाली कहल जाला आ कवनो फर्जी नोट भा कागजातो के जाली कहल जाला. जाली एहसे कि ई केहू ना केहू के फँसावे खातिर होले. फर्जी कागजात आ नोट के जे सही मान लीहल से फँस गइल ओकरा जाल में.

घर के जाली भा खिड़की आ किचन के जाली भा चलनी जवना से अनाज वगैरह चालल जाला त एगो मकसद से बनावल होला बाकिर कई बेर कीड़ा मकोड़ा भा चूहा निमनो चीझु बतुस के काट के छेदेछेद बना देलें आ उहो जालीदार हो जाला. बाकिर जालीदार साड़ी भा कपड़ा पर बनावल जाली कतना मेहनत आ लगन से बनेला से बनावही वाला जानेला. जाने के त खरीदहुं वाला जानेला आ तबे ऊ ओह जालीदार कपड़ा खातिर मुँहमाँगा दाम देबे ला तइयार हो जाला. लकड़ी के बनावल जाली होखत रहुवे चिलमन जवना का एह पार ओह पार रह के कतना आशिक अपना माशूका खातिर पता ना कतना गजल सुना चुकल बाड़ें.

मायाजाल भा इंद्रजाल तिलिस्म रचेला. होखे ना बाकिर बुझाला कि वास्तव में बा. जादूगर आ ठग दुनू एह मायाजाल भा इंद्रजाल का सहारे आपन रोजी कमालें. मुंबई के त नामे धरा गइल बा मायानगरी. देश में पता ना कतना महानगर बाड़ी सँ बाकिर मायानगरी बावे त बस एगो – मुंबई. ओकरा माया का चलते लोग अन्हुवाइले भागत रहेला. कुछ लोग के माया भेंटा जाली त कुछ लोग मायावी हो जाला आ कुछ लोग माया करे जोग. काहे कि माया मोह कई बेर अपने में गडमड हो जालें. पते ना लागे कि आदमी माया का मोह में पड़ल बा कि माया ओकरा के मोह लिहले बिया.

बाकिर तरबूजा छूरी पर गिरे भा छूरी तरबूजा पर कटे के तरबूजे के बा. अतना जाल में से जंजाल आ मोहजाल आदमी खुद बनावेला आ खुदे अझुरा के रह जाला. सितारन के गर्दिश आ जमाना का फेर में पड़ के कई बेर शेरो मकड़ी के जाला में अझुरा जाला. जाला ओकरा के रोकले ना रहे बाकिर ओह जाला का जाल में पड़ल आदमी समुझ ना पावे कि बस हाथ घुमवला के देर बा जाला साफ हो जाई. रउरा का सोचत बानी. चलीं उठीं, हाथ घुमाईं, बहुते जाला घेरले बा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *