– रामरक्षा मिश्र विमल


तहरा दरश के जुटी कब सुजनिया, देवी हो मइया ना
बानी तहरे शरनिया, देवी हो मइया ना.

लछिमी के रूप बरिसावेला धनवा
दुखियो के खूब अगरावेला मनवा
हमनी के दुख के मिटी कब कहनिया, देवी हो मइया ना
खुशहाल जिंदगनिया, देवी हो मइया ना.

भव भव विभव पराभवकारिनि
बिस्वविमोहिनि स्ववस बिहारिनि
तुलसी के सुर में करींले पुजनिया, देवी हो मइया ना
आके तहरे शरनिया, देवी हो मइया ना.

जग के कोलाहल में जीव छटपटाला
तब शारदा रूप परगट हो जाला
सुर में मगन होले झूमेले दुनिया, देवी हो मइया ना
कइके तहरो पुजनिया, देवी हो मइया ना.

तहरे प लागल नयनवा ए मइया
आइल विमल बा सरनवा ए मइया
मन के बीराना में बाजी पैजनिया, देवी हो मइया ना
कहिया छिटकी चंदनिया, देवी हो मइया ना.

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