भोजपुरी का नाम पर आपन धंधा करे वाला आ नाम चमकाएवालन के खुलासा आखिर होखही लागल. कहले गइल बा कि “खैर, खून, खाँसी, खुशी, बैर, प्रीति, मधुपान, रहिमन दाबे ना दबे जाने सकल जहान.” बिहार भोजपुरी अकादमी के स्थापना पता ना कवना उद्देश्य से भइल रहुवे बाकिर राजनीतिक चहुँप आ जोड़ तोड़ का बल पर एगो आत्ममुग्धी आदमी के एकर अध्यक्ष बना दिहला के कुफल अब सामने आवे लागल बा. अकादमी के अध्यक्ष के लिहल एगो बेजरूरत फैसला का बाद अचानक अकादमी चरचा में आ गइल बिया. दुख के बात बा कि गलत कारण से.

भोजपुरीए ना करीब करीब हर भाषा में कुछ लोग, कुछ संस्था अइसन होखेली सँ जवना के मकसद कवनो ना कवनो बहाने आपन नाम चमकावे के होखेला. कबो संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल करावे के नाम पर त कबो भोजपुरी से अश्लीलता मेटावे का नाम पर. मकसद बस एकही रहेला कि कवनो ना कवनो तरह चरचा में बनल रहल जाव आ मौका मिले त आपन गोटी सेट कइल जाव. आपन ना होखे त दोसर के मामर हेठ कइल जाव.

हद त ई हो गइल बा कि जेही विरोध में कुछ बोले के शुरू करत बा ओही के घुमा फिरा के धमकावे के काम शुरु हो गइल बा. हालांकि अकादमी के एह फैसला के सबले पहिला विरोध जवन हमरा जानकारी में आइल तवन रहल छपरा के कृष्ण कुमार वैष्णवी के. उनुके जोर दिहला पर हम एह मुद्दा के रोशनी में ले आवे के काम शुरु कइनी. वइसे त अपना हर गतिविधि के जानकारी अकादमी के अध्यक्ष हमरा के देत आइल रहलें. बाकिर एने कुछ दिन से खुदही फेसबुक के सहारे आपन पब्लिसिटी सम्हार लिहलन. सोचलन कि छोट मोट वेबसाइट वालन के का औकात.

जब विरोध के बात तेज होखे लागल त आग बुतावे का फेर में एक एक कर के लोग के समुझावल बुझावल शुरू भइल. मशहूर गायक भरत शर्मा व्यास के कहल गइल कि उनकर कुछ चिट्ठा बा ओकरो के सामने कर दिहल जाई. मनोज तिवारी के ब्लैक लिस्ट करे के धमकी दिहल गइल बा. हर आदमी के अपना राजनीतिक चहुँप का बल पर हड़कावे में लागल बाड़न बाकिर सीधा जवाब आजु ले ना मिलल. पिछला दिने एगो वेबसाइट संचालक के मुकदमा में फँसा के अझुरा दिहलन. बाकिर कृष्ण कुमार चुनौती दिहले बाड़न कि तनी उनुको के धमका के देखसु. आग लगावल त उहे शुरु कइले रहलें.

बाकिर सब कुछ का बावजूद आजु ले एह बात के जवाब सामने नइखे आवत कि पिछला तीन साल में अकादमी कतना आ कवन कवन किताब छपववले बिया. जँहे तँहे मंचीय कार्यक्रम कर करा के आपन नाम आ फोटो छपबावे वाली अकादमी के पत्रिका पता ना कब से बंद पड़ल बिया. ओकरा के शुरू करावे के पइसा नइखे शायद. अकादमी में कवनो फैसला लेबे के प्रक्रिया का होले? के के लोग रहल जेकरा बइठक में मालिनी अवस्थी के ब्रांड अम्बेसडर बनावे के फैसला लिहल गइल? दुख के बात हालांकि इहो बा कि एगो भोजपुरी प्रेमी सांस्कृतिक कर्मी के नाम बेवजह एह तरह के विवाद में डाल दिहल गइल. अउरी चाहे जवन सवाल उठा लिहल जाव मालिनी अवस्थी भोजपुरी के जवन सेवा कइले बाड़ी तवना ला उ हमेशा आदर आ सम्मान के पात्र रहीहें. असल विवाद उनुका ले के नइखे विवाद ओह मनमाना फैसला से बा. आशा बा जे मालिनी अवस्थी जइसन सांस्कृतिक कर्मी एह बात के समुझत होखीहें.

देखनी ह कि भोजपुरी पंचायत पत्रिका के संरक्षक संजयो सिन्हा पर सवाल उठावत कहल गइल बा कि उनुका के कवनो सम्मान नइखे दिहल गइल काहे कि ऊ पटना कार्यक्रम से गैरहाजिर रहलन. अकादमी के अध्यक्ष के दस्तखत से जारी चिट्टी के बारे में कहना बा कि प्रस्ताव रहुवे बाकिर जब उ पटना ना अइलन त सम्मान ना दिहल गइल. हो सकेला कि सम्मानित करे वाला सम्मानित होखे वाला के चुन त लिहलसि बाकिर सम्मानित होखे वाला सम्मानित करे वाला के एह लायक ना समूझलसि कि ओकरा से सम्मानित होखल जाव. एकर का जवाब बा अकादमी का लगे? काहे कि सम्मान त उनुका मिलिए गइल रहीत अगर उ पटना कार्यक्रम में शामिल भइल रहतन.

एह चरचा का बाद हमार एगो शुभचिन्तक चेतवले बाड़न कि मुकदमा लड़े के मन हो गइल बा का? जवाब इहे बा कि अब लाइन लमहर हो गइल बा. कतना दिन ले हड़का के काम चली. जेकरा बल पर कनवा राजा अब त ओकरे दिन गिनिती के रह गइल बा. बाकिर भोजपुरी में कवनो संस्था के एह तरह के छीछालेदर पहिले ना भइल रहुवे. धन्य बानी महाराज रउरा.

अबले त एह बात के चमकावत रहनी कि लागे कि अकादमी ना भइल बिहार सरकार के मानव संसाधन विभाग हो गइल. अब त खुद सरकारे कहे लागल बिया कि अकादमी अपना सीमा से बाहर जा के काम कइले बिया आ एकर जाँच होखे के चाहीं.

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