प्यारे देशवासी,

हम रउरा सभे खातिर एगो शांति भरल, खुशहाल आ सुरक्षित नया साल के कामना करत बानी.

नया साल के दिन संकल्प लेबे के दिन होला. हमनी सभे एह दिन आपन आपन संकल्प करीले – अपना जीवन के स्वस्थ, ईमानदार, बेहतर आ खुशहाल बनावे खातिर. हमरा उमेद बा कि एह नया साल में हमनी का एगो नया निश्चय का साथे अपना घर, पास-पड़ोस, आपन गांव अउर शहर आ अपना देश के बेहतर बनावे खातिर मिल जुल के काम करब.

अगर हमनी सभे मिल के एह दिशाईं काम करी जा, त तय बा कि दुनियो के एगो बेहतर आ सुरक्षित जगहा बना सकीले.

गुजरल साल पूरा दुनिया खातिर मुश्किलन से भरल साल रहे. बहुते विकासशील देशन के आर्थिक तंगी, सामाजिक-आर्थिक तनाव अउर राजनैतिक उथल-पुथल का दौर से गुज़रे पड़ल आ कुछ विकसित देशन के राजनैतिक गतिरोध के सामना करे के पड़ल. इलेक्ट्रानिक मीडिया के असाधारण पहुंच आ नयका सामाजिक नेटवर्किंग प्लेटफार्म से जुड़ाव के बदौलत से बढ़त उमीदन के क्रांति के नया ऊर्जा मिलल, जवना से दुनियाभर के सरकारन में एगो हलचल देखाई पड़ल.

हमनी के देश के आपन अलगे समस्या रहल.

भारत के अर्थव्यवस्था मेहराये लागल आ महंगी बढ़े लागल. भठियरपन के मुद्दा सबले उपर आ गइल.

हमनी के एह घटनन से हतोत्साहित ना होखे के चाही. सगरी देशन आ अर्थव्यवस्था में समय-समय पर अइसनका दौर आवत रहेला. हमनी के याद राखे के चाहीं कि हर उतार के बाद चढ़ाव आवेला. दरअसल, अइसन दौर में नया चुनौतियन के सामना करे के हमनी के बेंवत के इम्तिहान होखेला.

हमनी के मकसद साफ बा. हमनी के देश के तेज, समहरी आ टिकाऊ बढ़न्ती का राह पर ले जाए खातिर प्रतिबद्ध रहे का साथे-साथ नइकी चुनौतियनो के सामना करे के बा. हम रउरा सभे के आजु नया साल का दिने ई यकीन दिआवल चाहत बानी कि हम व्यक्तिगत तौर पर रउरा लोग के एगो ईमानदार आ बेसी बढ़िया सरकार देबे खातिर एगो अधिका उत्पादक, प्रतिस्पर्धी अउर मज़बूत अर्थव्यवस्था बनावे खातिर एगो अधिका न्याय वाला आ समानता पर आधारित सामाजिक राजनैतिक इंतजाम देबे के काम करब.

हमरा यकीन बा कि हमनी का ओहले बेसी तरक्की कइले बानी, जतना कि आमतौर पर लोग समुझत बा. हमरा निजी तौर पर एह बाति के खुशी बा कि हमार सरकार संसद में खाद्य सुरक्षा बिल, अउर लोकपाल आ लोकायुक्त बिल पेश कर पवलसि. लोकपाल आ लोकायुक्त विधेयक के लोकसभा से पास करा दिहल गइल बा लेकिन अफसोस के बाति बा कि एह विधेयक के राज्यसभा में पारित ना करावल जा सकल. तबहियो, हमार सरकार एगो मजगर लोकपाल अधिनियम बनावे खातिर प्रतिबद्ध बिया. सूचना के अधिकार कानून, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, अउर शिक्षा के अधिकार कानून के साथे ई संप्रग सरकार के अइसन विधायी विरासत हवे, जवना के अहमियत हमनी के देश के आवे वाली पीढ़ी समुझिहें स आ ओकरा से फायदा उठइहें स.

नया साल के एह पहिला दिने, हम गुजरल साल के बेसी बाति नइखी करे चाहत. एकरा बजाय, हम आवे वाली चुनौतियों पर ध्यान दिहल चाहब, जेहसे कि हम सभ मिल के ओकर मुकाबिला कर सकीं.

आज हमनी का सोझा सबले बड़ चुनौती गरीबी, अशिक्षा अउर बेमारी दूर करे के बा. साथही, हमनी के एगो अइसन भारत बनावे के बा, जवन हमनी के ओह लाखो लोगन के जिनिगी में खुशहाली ले आ सके, जे लोग गरीबी का घेरा से बाहर आइल शुरू कइले बा. हमनी के साल 2012-13 से शुरू होखेवाली बारहवीं योजना के दौरान एह बुनियादी काम पर ध्यान देत रहे के होई.

जब हम भविष्य का ओर देखीले त हमरा देश का सोझा पाँच गो बड़हन चुनौती लउकेला. एह चुनौतियन के मुकाबला करे खातिर हमनी के केन्द्र सरकार, राज्य सरकारन, राजनैतिक दलन आ सगरी जागरूक नागरिकन के मिललजुलल कोशिशन के दरकार बा.

पहिला चुनौती बावे – गरीबी, भुखमरी अउर अशिक्षा मेटावल आ सबही के फायदेमंद रोजगार मुहैया करावल. हम एकरा के आजीविका सुरक्षा चुनौती के नाम दिहल चाहब.

एह चुनौती से निबटे खातिर हमनी के कई गो डेग उठावे के पड़ी. एहमें सबले खास बा कि सगरी लोग के पढ़ल लिखल बनावल. हम ई पूरा यकीन से कहत बानी, काहे कि हम जानीले कि हमरा खुद खातिर शिक्षा के कतना अहमियत रहल रहे.

हम एगो अइसन परिवार में जनमल रही, जेकरा लगे मामूली सुविधा रहुवे. एगो अइसन गांव में, जहां ना कवनो डाक्टर रहे, ना कवनो टीचर. ना कवनो अस्पताल रहे, ना स्कूल, आ नाही बिजली रहे. हमरा रोज स्कूल जाए खातिर मीलों पैदल चले के पड़े. लेकिन हम हिम्मत ना हरनी. हम खुशनसीब रहनी कि हम हाईस्कूल के पढ़ाई हासिल कर पवनी आ ओकरा बाद उच्च शिक्षा, इहे शिक्षा हमार जिनिगी बदल दिहलसि आ हमरा के एइसन नया मौका दिहलसि, जवनन का बारे में हमरा तरह के माहौल के कवनो आदमी सोचियो ना सकत रहे.

हमरा पक्का भरोसा बा कि अपना लड़िका लड़िकीन के शिक्षित बनावल, ओकनी के रोजगार लायक हुनर दिआवल आ ओकनी के स्वस्थ राखल हमनी के पहिला खास काम होखे के चाहीं. हमनी के बच्चा, हमनी के परिवार, समाज अउर देश के भविष्य संवारे खातिर एहले बढ़िया दोसर कवनो निवेश ना हो सके.

शिक्षा अउर सस्ता इलाज के सुविधाएं मुहैया करवला का साथे-साथ हमनी के एगो अइसन विकास प्रक्रिया के आगे बढ़ावे के बा, जवना में सबही के फायदेमंद रोजगार मिल सके. इहे एगो तरीका बा, जवना से हमनी का गरीबी के हमेशा खातिर खतम कर सकीले.

चूंकि एह रणनीति के तहत आवे वाला अनेके काम के नतीजा मिले में समय लागी, एह दौरान हमनी का ओह लोगन पर धेयान देबे के होई जिनका तुरते मदद के दरकार बा. एही चलते सरकार सबसे अधिका जरूरतमंद लोगन के रोजगार दिआवे आ ओह लोग के भोजन दिआवे के डेग उठवले बिया.

हमरा भरोसा बा कि हमनी का शिक्षा अउर स्वास्थ्य, रोजगार-गारंटी, आ खाद्य-सुरक्षा दिआवे खातिर जवन डेग उठवले बानी, ओहनी से हमनी के आजीविका सुरक्षा चुनौती से बखूबी मुकाबिला करे में मदद मिली.

हमरा ला दोसर बड़का चुनौती बावे – आर्थिक सुरक्षा. आर्थिक सुरक्षा के मतलब अइसन अर्थव्यवस्था से बा, जवना में लोग के ज़रूरत आ इच्छा का हिसाब से चीझन के उत्पादन होखे आ ओह लोग के उमेद मुताबिक फायदेमंद रोज़गार मिले. एह मकसद के हासिल करे बदे हमनी के ई तय करे के होई कि हमनी का तेजी से विकास करीं. हमनी किहाँ जरुरत भर से बेसी रोजगार के मौका पैदा होखे. तेज बढ़न्ती एहु चलते जरूरी बा, कि हमनी का अपना आजीविका सुरक्षा योजनन के चलावे खातिर जरूरी राजस्व बटोर सकी.

आठवां दशक का दौरान आर्थिक सुधारन के प्रक्रिया के एही खातिर शुरू कइल गइल आ नउवाँ दशक में ओहमें तेजी ले आवल गइल कि हमनी के बढ़न्ती के रफ्तार तेज हो सके. हमनी के लोकतांत्रिक व्यवस्था देखत एह सुधारन के शुरू में धीरे-धीरे लागू कइल गइल जेहसे कि एह खातिर सभकर सहमति बन सके. हमनी का अपना एह मकसद में कामयाब भइल बानी, ई एह बाति से साबित होखत बा कि चाहे ऊ केन्द्र के अलग-अलग राजनैतिक सोच वाली सरकार होखऽ स भा राज्यन में अलग-अलग राजनैतिक दल के सरकार, सबही एह सुधारन का दिशाईं कमोबेश आगा बढ़ल बाड़ी सँ. लेकिन, एह मधिम रफ्तार का चलते एह सुधारन के पूरा नतीजा मिले में कुछ समय लागल.

तबहियो, पिछला कई बरीसन से, एह सुधारन के नीमन नतीजा साफ लउके लागल बा,. 1980 का दशक से पहिले हमनी के औसत विकास दर 4% रहल जवन बाद के अवधि में बढ़ि के 8% हो गइल बा.

हालांकि, ई विकास दर संतोष करे लायक बा, तबहियो ई मानल गलत होखी कि भारत अब तेज़ विकास के रास्ता पर अटल हो गइल बा. ई बाति ज़रूर मानल जा चुकल बा कि हमनी में तेज विकास करे के बेंवत बा. अगर आवे वाला बरीसन में, हमनी का अपना विकास दर के तेज बनवले राखल चाहत बानी, त हमनी के ढेरहन चुनौतियन के मुकाबिला करे के होई.

लगातार तेज़ विकास बनवले राखे खातिर, हमनी का सबले पहिले, मंदी के मौजूदा दौर के खतम करे के होई. हालांकि सिरिफ अतने कइल पूरा ना पड़ी. हमनी के गँवई आमदनी में पूरा बढ़ोतरी करे खातिर खेती का काम में दोसरकी क्रांति ले आवे के जरूरत बा. एकरा अलावे हमनी के ऊ बहुते सारा सुधार ले आवे के पड़ी जवना से औद्योगीकरण के गति तेज हो सके आ उ बुनियादी ढांचा बनावल जा सके जवन तेज़ औद्योगीकरण खातिर जरूरी बा.

तेज़ विकास से ढांचागत बदलावो होखी, खास तौर पर शहरीकरण में. साल 2030 ले हमनी के शहरी आबादी 38 करोड़ से बढ़िके 60 करोड़ हो जाये के उमीद बा, एह बढ़त शहरी आबादी खातिर हमनी का गैर खेती काम में फायदेमंद रोज़गार मुहैया करावे पड़ी. एकरा अलावे, हमनी के एह आबादी खातिर बुनियादी शहरू ढांचा के पसारो करे के पड़ी.

साल 1991 में जब हमनी का अपना अर्थव्यवस्था के लाइसेंस-परमिट राज से आजाद करा के उदार बनवनी जा, तब हमनी के खास मकसद रहुवे अपना हरेक नागरिक के अफसरशाही आ भठियरपन का चंगुल से बचावल आ नया चीज भा व्यवस्था गढ़े के ओकर बेंवत के बढ़ावा दिहल. आजु के नवही, जिनकर पैदाइश 1980 आ ओकरा बाद भइल बा, उनुका ओह भठियरपन के जानकारी ना होई, जवन कंट्रोल आ परमिट राज का चलते पसरल रहुवे. रेलवे टिकट भा टेलीफोन कनेक्शन पावे खातिर केहु ना केहु के घूस देबे पड़त रहे. एगो स्कूटर जल्दी खरीदे खातिर केहु ना केहू के घूस देबे के पड़त रहुवे.

लेकिन, जहां हमनी के लोगन के नया गढ़े वाली उर्जा आजाद भइल बा आ भठियरपन के पुरनका तरीका खतम हो गइल बा, ओहिजे भठियरपन के बहुते नया नया रूप सामने आइल बा, जवना के खतम करे के जरूरत बा. उद्यमशीलता बढ़ावे खातिर भठियरपन के जड़ मूल से खतम कइल जरूरी बा. ई, ओह आम नागरिको लोग के मांग बा जिनका रोजमर्रा के काम में भठियरपन से सोझा पड़ेला.

ई एगो अइसन गंभीर समस्या हवे, जवना के हल करे खातिर हमनी के बहुते इलाका में काम करे के होई.

लोकपाल अउर लोकायुक्त जइसन नयकी संस्था एह समस्या के हल करे का दिशाईं एगो बड़हन भूमिका अदा करीहे आ हमनी का ओकरा गठन के प्रक्रिया शुरू कर दिहले बानी. लेकिन, ई समाधान का एगो हिस्से भर बा. हमनी के सरकारी कामकाज के तरीको में बदलाव करे के पड़ी, जेहसे कि पारदर्शिता बढ़े आ विवेकाधीन अधिकारन में कमी आवे. एहसे कुशासन के गुंजाइश ना रही. एह दिशाईं अनेके उपाय कइल गइल बा. हमनी का सिटिजन चार्टर पर एगो बिल संसद में पेश कइले बानी. ई बिल ओह नागरिकन के सरकारी विभागन से सही मानक के सेवा मांगे के अधिकार दीहि. हमनी का न्यायपालिका के जवाबदेहीओ पर एगो बिल ले आइल बानी जा.

एह पहलन के पूरा असर होखे में कुछ समय लागी, एहसे हमनी के धीरज राखे के होई. मगर, हमार मानना बा कि ई बदलाव के बड़हन पहल हई सँ, जवना के कुछ साल बाद एह तरह से जानल जाई.

आर्थिक सुरक्षा अउर खुशहाली तय करावे खातिर राजकोषीय स्थिरता बहुते ज़रूरी बा. हमनी के देश, बीतल बरीसन में, फिजूलखर्ची के बहुते दाम अदा कइले बा. हमनी में से बहुते लोग के साल 1990-91 के ऊ अन्हरिया याद होई, जब मदद मांगे हमनी का दुनिया भर में जाये के पड़त रहे. हमनी के खुशनसीबी बा कि हमनी का कम समय में एह समस्या से निपटे में कामयाब भइनी. पिछला बीस बरीस में हमनी का आपन माथ उठा के रख पवले बानी, काहे कि हमनी का अपना राजकोषीय संसाधनन के प्रबंधन बढ़िया से कइले बानी. हमनी के ई तय करे के होई कि देश फेरू ओह पुरनका हालात में मत जाए पावे.

हम भविष्य के राजकोषीय स्थिरता का बारे में चिंतित बानी, काहे कि पिछला तीन बरीस में हमनी के राजकोषीय घाटा बढ़ल बा. एकर असल कारण बा कि हमनी का दुनिया के मंदी से निपटे खातिर साल 2009-10 में राजकोषीय घाटा बढ़ा के राखे के फैसला लिहले रहनी. ई ओह समय का हिसाब से सही रहल. लेकिन, दोसरा देशन का तरह, जे एह नीति के सहारा लिहल, हमनियो का लगे राजकोषीय गुंजाइश खतम हो गइल बा आ हमनी के एक बेर फेरू राजकोषीय घाटा कम करे के कोशिश शुरू करे के होई. ई एहले ज़रूरी बा कि हमनी के विकास प्रक्रिया रुके ना पावे आ साथेसाथ हमनी के राष्ट्रीय संप्रभुता आ स्वाभिमान पर आंच ना आवे.

एहबीच राजकोषीय स्थिरता ले आवे के सबले खास उपाय बा – सामान अउर सेवा कर लागू कइल. एहसे हमनी के प्रत्यक्ष कर प्रणाली आधुनिक बनि जाई, आर्थिक कुशलता बढ़ि जाई आ कुल राजस्वो बढ़ि जाई. एगो दोसर खास उपाय बा – डेगेडेग तरीका से सब्सिडी के कम कइल. कुछ सब्सिडी, जइसे खाद्य सब्सिडी सामाजिक कारण से तर्कसंगत बा आ खाद्य सुरक्षा विधेयक के लागू होखला पर एकरा बढ़े के संभावना बा. बाकिर कुछ अइसन सब्सिडी बाड़ी स, जवन तर्कसंगत नइखी स आ ओकरा के कम करे के चाहीं.

आर्थिक सुरक्षा खातिर जरूरी कुछ सुधार विवाद आ चिंता पैदा करेले. एकरा के समुझल जा सकेला. लेकिन हमनी के सुधार का बारे में अपना पिछला अनुभवन से सीखे के चाहीं. जवना बातन के आजु हम स्वाभाविक समुझत बानी, ओहु में बीस बरीस पहिले विवाद भइल रहे. हमनी का ई याद राखल चाहीं कि विकास खातिर बदलाव जरूरी हवे. हमनी का अपना के बदलाव खातिर तइयार करे के चाही आ ओकरा खराब असर से सबले कमजोर तबका के बचावहु के चाहीं. लेकिन, बदलाव के आंख मूंदके विरोध ना करे के चाहीं. अगर हमनी का अपना पर भरोसा होखे, त हमनी का कवनो चुनौती के सामना कर सकीले.

हमनी का सोझा तिसरका चुनौती बा, ऊर्जा सुरक्षा के चुनौती. ऊर्जा विकास खातिर ज़रूरी ह, काहे कि बेसी उत्पादन करे खातिर बेसी उर्जा चाहेला. हमनी के हर आदमी पर ऊर्जा के उपलब्धता अतना कम बा कि एहमें बहुते बढ़ोतरी करे के जरूरत बा.

ऊर्जा सुरक्षा के चुनौती भारत खातिर खास तौर से बहुते बड़हन बा, काहे कि हमनी का एगो अइसन माहौल में विकास करे के कोशिश करत बानी, जहां हमनी के घरेलू ऊर्जा स्रोत बहुते कम मात्रा में बा आ दुनिया एगो अइसन दौर में आवत बिया, जवना में ऊर्जा के कमी होखे आ ओकर दाम बढ़े के पूरा अनेसा बा.

सबले पहिले, हमनी के मौजूदा सगरी घरेलू ऊर्जा स्रोतन के कुशलता से उपयोग करे के चाही. दुर्भाग्य से, ऊर्जा के पुरनका आ नयका स्रोतन के इस्तेमाल करे के हमनी का कोशिश का राहे बहुते मुश्किलात आवत बा. चाहे ऊ कोयला भा पनबिजली के क्षेत्र होखे, चाहे तेल भा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र. हमनी के नयका चुनौतियन के मुकाबिला करे के होई, जेहसे कि एह स्रोतन के पूरा तरह से बढ़ावल जा सके. हमनी का एह सगरी घरेलू मुश्किलात के फेर से समीक्षा करे के चाहीं जेहसे कि ओकरा के दूर कइल जा सके.

ऊर्जा सुरक्षा के घरेलू एजेंडा साफ बा. हमनी के कोयला, तेल, गैस, पनबिजली आ परमाणु ऊर्जा जइसन पारंपरिक स्रोतन में नया निवेश करे के होई. हमनी के सौर-ऊर्जा आ पवन-ऊर्जा जइसन नयको स्रोत में निवेश करे के होखी. घरेलू आपूर्ति बढ़वला का साथे-साथ हमनी के ऊर्जा के समझदारी से इस्तेमाल करे के होखि, जेहसे तेज विकास का चलते ऊर्जा के बढ़त जरूरत पर कुछ अंकुशा लाग सके.

नया निवेश बढ़ावे आ ऊर्जा दक्षता हासिल करे के लक्ष्य पुरावे खातिर भारत के अधिका युक्तिसंगत मूल्य नीति बनावे के होई आ अपना ऊर्जा कीमतन के दुनिया के बाजार के दाम का हिसाब से राखे के पड़ी. एकरा के तत्काल ना कइल जा सके, लेकिन अइसन बदलाव खातिर डेगाडेगी योजना बनावे आ ओकरा बाद बदलाव ले आवे खातिर समर्थन जुटावे का दिशाईं काम करे के जरूरत बा. हम जानत बानी कि ई आसान काम नइखे, लेकिन जबले हमनी का ई बदलाव ना ले आएब, तबले हमनी का ऊर्जा दक्षता के ओतना ना बढ़ा पाएब जतना बढ़ावल चाहीं. एकरा अलावे, हम घरेलू ऊर्जा आपूर्ति बढ़ावे खातिर ज़रूरी निवेशो ना जुटा पाएब.

ऊर्जा सुरक्षा के एगो दुनियो वाला आयाम बा. बेहतर घरेलू कोशिशन का बावजूद, आयातित ऊर्जा पर हमनी के निर्भरता बढ़त जाये के अनेसा बा. हमनी के आयातित ऊर्जा के तय आपूर्ति आ ऊर्जा से जुड़ल नयका तकनीकी हासिल करे के होई. एकर मतलब ई कि हमनी के अइसन नीति बनावे के पड़ी जवन अइसन देशन से आर्थिक साझेदारी के बढ़ावा देव, जिनका लगे ऊर्जा के स्रोत आ तकनीकि बावे. अइसन स्रोतन आ तकनीकि तक आपन पहुँच बनवले राखे खातिर हमनी के सक्रिय विदेश नीतिओ के जरूरत बावे.

आवे वाला बरीसन में हमनी का जवना चउथका चुनौती के सामना करे के बा, ऊ बा पर्यावरण सुरक्षा के. हमनी के देशवासियन के भलाई खातिर आर्थिक विकास जरूरी बा, लेकिन हम अइसन विकास के इज़ाज़त ना दे सकीं जे हमनी के पर्यावरण के नुकसान पहुंचावे. आवे वाली पीढ़ी खातिर हमनी के ई दायित्व बा कि ओह लोग के अइसन पर्यावरण दींही जा, जवन आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे में ओतने काबिल होखे जतना कि ऊ पर्यावरण, जे हमनी के अपना माई बाबूजी से मिलल रहे.

हमनी का अपना नदियन के पानी के बे उपचारित गंदा पानी से दूषित ना होखे दे सकी, हालांकि, नियमन के कमजोरी आ उद्योग अउरी शहरन पर नियम ठीक से ना लागू होखला का चलते आजु ई कुछ होखत बा. एही तरह, हमनी के हवा के प्रदूषण बे-रोकटोक ना बढ़े दे सकीं, काहे कि एहसे साँस के बेमारी बढ़ेलाक्यों जवना के बहुते खराब असर बहुते लोग पर पड़ेला, खास कर के गरीबन पर.

पर्यावरण सुरक्षा में जंगलो के हिफाज़त शामिल बा. जंगल ना काली हवा में छोडल कार्बन के सोखे में अहम भूमिका निभावेले, बलुक हमनी के जल सुरक्षो देबेले. जंगल पानी के बेकार बहे से रोकेले आ जमीन का भीतर के पानी के मात्रा बढ़ावेले. कई बेर, जंगल के जमीन के इस्तेमाल ऊर्जा, खनिज आ पनबिजली समेत प्राकृतिक संसाधन दूहे खातिर करे के पड़ेला. ई काम अइसे करे के चाहीं कि जंगल के जमीन कम से कम लागे. एकरा एवज में नया गाछो पूरा गिनिती में लगावे के चाहीं.

ई सगरी समस्या हल कइल जा सकेला. दोसरा देश में ई समस्याएं हल भइलो बा. एकरा खातिर एगो मजबूत आ पारदर्शी व्यवस्थापन के ज़रूरत होला आ एकरा पर लागतो अधिका में आवेला. ई लागत ओह लोग के सहे के चाहीं जे प्रदूषण फइलवलसि. एह सिद्धांत के निकहा समुझल जाये के चाही आ कड़ाई से लागू करे के चाहीं.

आवे वाला पर्यावरण चुनौतियन का अलावे जलवायु परिवर्तनो के एगो बड़हन चुनौती हमनी का सोझा बा. दुनिया के जिम्मेदार नागरिक का तरह हमनी के विकास के अइसन राह धरे के चाहीं जवना में हमनी का साल 2020 ले हर इकाई सकल घरेलू उत्पाद के अपना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 20 से 25 फीसदी ले कमी ले आ सकीं. ई निशान तर्क संगत ऊर्जा नीतियन से बहुते गहिरा जुड़ल बा.

आखिर में, हमनी के जियतार लोकतंत्र के भीतरी सुरक्षा आ बाहरी सुरक्षा दुनु के खतरा बा. एकरा के राष्ट्रीय सुरक्षा के चुनौती का तरह देखल जा सकेला.

चरमपंथियन आ उग्रवादियन से गम्हीराहे उकसवला का बावजूद, हमनी के देशवासी एकजुट रहल बाड़े. बहुलवादी, धर्मनिरपेक्ष अउर समहरी लोकतंत्र में अबहियो उनुकर आस्था बनल बा. दुनिया भर में लोग भारत से प्रेरणा लेबेला. खुला सामाजिक व्यवस्था में समहरी विकास के हमनी के नमूनो ओह सभे के हौसला बढ़ावेला जे अन्याय आ उत्पीड़न से मुक्ति चाहऽता,

आम जनता के सशक्त बनावे के मांग करे वाली लोकतंत्र के एगो नईकी लहर दुनियाभर में पसरल जात बा. हमनी के देश आजु एह माहौल में एक कार्यशील लोकतंत्र का रूप में शान से खड़ा बा. हमनी के देश एक अरब से बेसी के आबादी वाला एक बहुलवादी आ धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र ह, जहां दुनिया के सगरी महान धर्मन के आजादी से पालन होला. जहाँ बहुते भाषा अउर खान-पान बा आ जहाँ बहुते जाति आ समुदाय के लोग एगो खुला समाज में मिल-जुलके रहऽता. ई एगो अइसन कामयाबी ह, जवना पर हर भारतीय गर्व कर सकेला.

दुनिया एह कामयाबी के मानेले. हम समुझीले कि दुनिया चाहऽतिया कि भारत अउरी सफल होखे, काहे कि भारत दुनिया में उम्मीद जगावेला.

हमनी के लोकतंत्र के आपन कमी बाड़ी स, हमनी के लोग एह कमियन के जानेले आ ओकरा के दूर करे के आपन बेंवत देखवले बाड़े.

कई बेर लोकतंत्र निराशाजनक ओह लोग खातिर होला, जे सरकार में शामिल होला आ ओहु लोग खातिर जे एकरा अउरी बेसी कुशल, प्रभावी आ मानवीय होखे के उमेद राखेले. लेकिन हमनी के लोकतंत्र हमनी के ताकत ह. ई हमनी के एका के आधार ह. ई हमनी के आंतरिक सुरक्षा तय करावे के सबले अहम जरियो ह.

राष्ट्रीय सुरक्षा खातिर हमनी के सेना के अउरी आधुनिक बनावल ओतने अहम बा. दरअसल, भारत के आर्थिक आ ऊर्जा सुरक्षो खातिर एकर जरूरत बा. हमनी के सेना, नौसेना आ वायुसेना के आधुनिक बनावे आ सैनिकन आ प्रणालियन में सुधार करे के जरूरत बा. ई तय करावल प्रधान मंत्री का रूप में हमार सबले खास काम होई.

आजु, हम रउआ लोग का सोझा आपन बाति एहले रखनी ह, कि रउरा सभे ई समुझ पाई कि नयका साल में आवत घरी कवना तरह के चुनौती हमनी का सोझा बावे.

हम ओह पाँच गो खास चुनौतियन के ज़िक्र कइनी ह, जवन हमनी के सोझा बा. एह साल ई चुनौती हमनी के नीतिगत एजेंडा में सबले ऊपर होंई – आजीविका सुरक्षा, (शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य अउर रोजगार), आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा आ राष्ट्रीय सुरक्षा.

एह पांचों चुनौतियन के मुकाबिला करे खातिर हमनी के एगो राष्ट्र के रूप में एकजुट होके काम करे के होई आ साथही दुनिया में अपना तरह के सोच राखे वाला देशन का साथो मिल के काम करे के होई.

हम रउरा सभे के भरोसा दिआवल चाहत बानी कि एह सगरी चुनौतियन के मुकाबिला करे में कामयाब होखे खातिर हम अपना पूरा ताकत से काम करब.

आईं, हमनी का एह चुनौतियन पर जीत हासिल करे खातिर एक जुट हो के काम करीं.

हम रउआ सभे के एह साल आ आगे वाला हर साल खातिर शुभकामना देत बानी.

जय हिन्द !


(नया साल २०१२ का मौका पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दिहल राष्ट्र का नाम सनेशा के गैर सरकारी भोजपुरी अनुवाद.)

Advertisements