डा॰ हेमंत जोशी

(सहज आ सफल प्रसव खातिर जरूरी बा कि होखे वाली महतारियन के कुछ मूलभूत जानकारी रहे के चाहीं. एह लेख में डा॰ हेंमत जोशी उहे जानकारी दिहल चाहत बाड़े.)

भारत में हर साल बहुते महतारी आ शिशुवन के अकाल मौत हो जाला. आंकड़ा बतावेला कि हर एक हजार प्रसव में पांच गो महतारी बच्चा जने का दौरान मर जाली. काहे कि बीमार आ कुपोषित महतारी बेमार आ कमजोर शिशुवन के पैदा करेली. ई कमजोर शिशु जल्दिये मर जाले अगर ओकनी के सही आ पूरा भोजन आ पोषण ना मिल पावे.

गर्भवती रहला का दौरान महतारी के नियम से हर दू घंटा पर चना आ चिनिया बादाम खाये के चाही. ई एह तरह होखे के चाहीं कि भूख लागे से पहिले खा लिहल जाव. गर्भवती महतारी के बाँह के मोटाई कम से कम २३.५ सेटीमीटर होखे के चाहीं.

महतारी के स्वास्थ्य आ जनम का समय कम वजन वाला शिशु

ओह महतारी, जेकरा बाँह के बीच के मोटाई २२.५ सें मी से कम होखे, के कमजोर कहल जा सकेला. वइसनका महतारी के होखेवाला शिशु कमजोर आ अविकसित होखे के पूरा अनेसा रहेला. एहसे पूरा कोशिश रहे के चाहीं कि लड़िकियन के उमिर अठारह साल के होखत होखत ओकनी के बाँह के मोटाई २३.५ सें॰मी॰ हो जाव.

अगर महतारी गर्भावस्था का दौरान कुपोषित रही त ओकरा शिशु के शारीरिक आ मानसिक विकास के गति मधिम हो जाई. आ एह कमी के बाद में पूरावल ना जा सके. ई कमी ओह शिशु के भर जिनिगी पछाड़त रही.

कामकाजी महतारी के बहुते शारीरिक आ मानसिक दबाव झेले के पड़ेला आ कई बेर ओह लोग के जरूरत भर के भोजन आ आराम ना मिल पावे. एकर परिणाम होला कि कामकाजी महतारियन में गर्भपात के अनुपात बहुते बेसी होला. जेकर गर्भपात ना होखे ओहमें से बहुते के समय पूरा होखे से पहिलही प्रसव हो जाला. जेकर गर्भ पूरा समय तक रह जाला ओहमें से बहुते के जनमल बच्चा अविकसित होखेले काहे कि काम का दौरान भूखे रहला, तनाव आ नींद के कमी का चलते गर्भ में पलात शिशु के विकास मधिम पड़ जाला.

गर्भ में मधिम विकास वाला शिशु आ समय से पहिले प्रसव वाला शिशु कई मायने में कमजोर होखेला. कुछ के विकास के माइलसथटोन देर से आवेला, पढ़े सीखे में दिक्कत होला, बहिरापन, नजर के कमजोरी, झटका दौरा वगैरह के शिकायत रह सकेला. अब अइसनका बीमार भा कमजोर शिशु के देखभाल करे खातिर कामकाजी महतारियन के नौकरी छोड़ घरे बइठे पड़ जाला. अगर गर्भ का दौरान ई महतारी ठीक से आराम कइले रहती, खाना खइले रहती आ आपन आ गर्भ के ध्यान रखले रहती त ई सब दिक्कत शायद कबहु ना आइत.

एह से मिलल सीख ईहे बा कि, जवन महतारी सक्षम होखसु उनुका गर्भ का दौरान छुट्टी ले लेबे के चाहीं आ बच्चा पैदा कइला का कम से कम छह महीना बादे काम पर लवटे के चाहीं.

बाकिर जइसे हर केहु कार्डियक बाईपास सर्जरी ना करा सके तबहियो सभका के सही समय पर सही सलाह मिले के चाही आ गर्भवती महतारियो के मालूम रहे के चाहीं कि गर्भ का दौरान घरे रहला के का फायदा मिल सकेला.

प्रसव का दौरान दुनिया भर में सबले बेसी भारत में होखे वाला महतारियन आ शिशुवन के मौत के एगो बड़का कारण होला प्रसवक्रिया में लागे वाला लमहर समय. जब महतारी चुकेमुके बइठ के प्रसव करावे त ऊ प्रसव जल्दी से हो जाला. एह प्रसवक्रिया में समय कमा लागेला आ एह चलते शिशु के आक्सीजन के कमी कम झेले के पड़ेला. प्रसव में दिक्कत आ थकानो कम होला. एह तरीका के प्रसव में शिशु के बाचे के अनुपात बहुते बढ़ जाला. महतारीओ पर एकर बढ़िया असर पड़ेला आ सिजेरियन करावे के अनेसो कम हो जाले.

लेटल अवस्था में होखे वाला प्रसव का तुलना में चुकामुकी बइठला में होखे वाला प्रसव आसान होखे के सबले सहज उदाहरण देखल जा सकेला जब कई बेर महतारी शौच के इस्तेमाल करत घरी बच्चा जन देली. चुकामुकी बइठल हालत में साँस लेबे में आसानी रहेला काहे कि डायफ्राम पर दबाव ना पड़े आ ओकर गति सहज होल. साथ ही गुरुत्वाकर्षण बल के सहार मिल जाला प्रसव खातिर.

गुरुत्वाकर्षण बल के मुकाबिला महतारी के लगावल कतनो जोर भा डाक्टर के लगावल वैकूम भा फोरसेप्स के ताकत से ना कइल जा सके. एह दौरान कई बेर महतारी अतना थाक जाले कि ऊ तब गर्भस्थ शिशु के बहरी ना निकाल पावे आ सिजेरियन करे पड़ जाला. कई बेर देर सबेर प्रसव होइयो गइल त शिशु आ महतारी के मौत भा अस्वस्थ होखे के मामिला बहुते बढ़ जाला. सिजेरियन के एगो सबले बड़का कारण बनेला प्रसवक्रिया में होखे वाला देरी. चुकामुकी बइठा के करावल प्रसव सिजेरियन के मामिला बहुते घटा दी आ साथ ही घटा दी शिशु आ महतारी के मृत्यु दर, अस्वस्थता, थकान, कमजोरी आ खरचा !

चुकामुकी बइठा के प्रसव करावे के तरीका पुरनका जमाना से चलत आवऽता. एह तरीका के पुनर्जीवित करे के दरकार बा आ एह तरीका के जतना हो सके ओतना प्रचार होखे के चाहीं. जानकार महतारी, दाई आ डाक्टर के सहयोग से ई सहज संभव होखी. जवन प्रसव कठिन लागत होखे ओहमें त एह तरीका के जरूर इस्तेमाल करे के चाहीं.

केबीए मेडिकल कॉलज, पूणे के प्रोफेसर डा॰ ए आर जुन्नरकर के एह विषय में बहुते जानकारी बा आ उहो एकर समर्थन कइले बाड़े. पश्चिम के देशन में आजुकाल्ह फाइबर ग्लास के कुरसी पर बइठा के प्रसव करावल जात बा. शोधो में देखल गइल बा कि लिटा के करावल प्रसव का तुलना में बईठा के करावल प्रसव आसानी से आ कम समय में हो जाला. दुख के बाति बा कि कई बेर महतारी के चहला का बावजूद दाई आ डाक्टर एकर विरोध करेले, जवन ना होखे के चाहीं. सभका ई माने के चाहीं कि बइठा के करावल प्रसव सबसे प्राकृतिक तरीका हवे.

जनमत शिशु का माँगेला

तनी गरमी द
तनी पीठ सुघरावऽ.
हमरा के एगो साँस दे द
हम फेरु चिकरल चाहऽतानी.

(Give me some warmth,
Give me some rub
Give me another breath
I want to cry again.)


बढ़िया लालन पालन

के ना चाहे कि ओकर संतान बुद्धिमान, स्वस्थ आ बरियार होखे. आंकड़ा बतावेला कि हर साल एक हजार करोड़ से बेसी के टॉनिक अपना देश में बाप महतारी खरीदेले अपना संतान खातिर. कि ऊ स्वस्थ बुद्धिमान आ बलवान होखसु. बाकिर अतना खरचा का बावजूद देश के लड़िका दुनिया के पैमाना पर संतुलित विकास का मामिला में आदर्श स्थिति में ना आ पावसु.

महाराष्ट्र के ठाणे में शिशु रोग विशेषज्ञ डा॰ हेमंत जोशी आ डा॰ अर्चना जोशी के कहना बा कि छोटका बचवन खातिर सहज रूप से मिलेवाला खाए के सामान, जइसे कि चना, भात, चिनियाबादाम, गड़ी भा नारियल वगैरह, से ओहनी के बढ़िया विकास करावल जा सकेला.

एह डाक्टर दम्पत्ति का खाते बहुते तरह के सफलता लिपिबद्ध बा. जइसे कि छह महीना के मातृत्व अवकाश डा॰ हेमंत जोशी के परिकल्पना रहे आ उनुका अथक प्रयास से आखिरकार सरकारो एह बाति के मनलसि आ आजु देश में छह महीना के स्तनपान अवकाश मिले लागल बा.

हमेशा से बढ़िया सामग्री का तलाश में रहे वाला अँजोरिया अब डा॰ हेमंत जोशी के प्रकाशित किताब का सहारे रउरा सभे के शिशु लालन पालन का बारे में सामग्री पेश करे जा रहल बिया.

डा॰ हेमंत जोशी चिकित्सक होखला का साथे सक्रिय समाजसेवीओ हउवन जे निस्वार्थ भाव से आम आदमी के हित खातिर काम करेले.

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