फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के बदनामी काहे.. भाग २

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु”

AbhayTripathiVishnu
जमाना लाख बुरा चाहे त का होला,
उहे होला जे मंजूरे खुदा होला.
निकलल बानी सर कफ़न बांध के याद रखीह,
मिट जाई हर रावन बस लक्ष के धियान धरीह,
बा सेवा के इरादा त बोली के दरकिनार करीह,
मरला बिना स्वर्ग नइखे ई मंत्र के मथ मरीह.

बात जब फूहड़ता के चलल त पिछला विचार के तनी अउरी आगे ले जाए के मन क गइल.

पिछला आलेख में लिखले रहीं कि कवनो शब्द भा वाक्य फूहड़ ना होला, फूहड़ होला ओकर प्रस्तुति करे के ढंग आ समुझे के समझ. जिनगी में फूहड़ता के एगो भाव जइसन मानल जा सकेला आ एह भाव से हम फूहड़ता के तुलना घर के बेटी बहिन से करे जा रहल बानी. एकरा के ऐसे समझी कि हम दोसरा के बेटी बहिन के पीछे पड़ी त हमर प्यार आ दूसर हमरा बहिन बेटी के पीछे पड़े त व्यभिचार. अइसहीं हमनी के दूसरा के बोली, भाषा के फूहड़ता नीक लागेला आ आपन ना. बस इहाँ फर्क एतने बा कि जहवाँ हम लोग अपना बहिन बेटी खातिर दूसरा से लड़े के तइयार हो जाइले ओहिजे भाषा के व्यभिचार पर खामोश हो जाइलें भा चुपचाप लाज में मारे नजर दूसरा तरफ हो जाला. आ एहिजे हमनी के दूसरा से अगला हो जाइले सँ. बस इहे सोच बदले के जरूरत बा.

यो यो बबुआ के एगो बानगी बतावत बानी. शायद कुछ लोग के उत्साहवर्धन हो. बबुआ जी आपन फूहड़ता के वकालत करत एगो मसहूर प्रोग्राम में कहले कि उनकर मुँह मत खुलवावल जाय ना त हिंदी सिनेमा क पूरा कच्चा चिटठा खोल के रख दीहन. उदाहरण में हिंदी के एगो पुरान गाना के जिक्र कइले “आज की रात मेरे, दिल कि सलामी ले ले, दिल की सलामी ले ले”. बबुआ जी के एह गाना में फूहड़ता के अलहदा कुछ ना देखात रहे काहे से कि रात में दिल क सलामी लेबे के का मतलब होला खुद ही बुझ जाई लोग. बस रउओ लोगिन के एही माफिक कमर कसे के पड़ी. सामने केहु हो ओकर मुँह बंद करे खातिर सही तर्क होखे के चाहीं. आगे के काम अपने आप बन जाई.

यदि लोगन के ‘कमरिया करे लपालप’ में फूहड़पन देखात बा त रउओ लोगिन के दूसरा के बतावे के पड़ी कि ‘चोली के पीछे क्या है चुनरी के नीचे क्या है’ में अधिका फूहड़ता बा. मानत बानी कि फूहड़ता के चर्चा चली त हमार कमीज तोहरा से ज्यादा उजर कहला से काम ना चली. लेकिन एह से एतना त जरूर होई कि दूसरा लोग के मुँह बंद होखे लागी. लोग के समझावे के पड़ी कि ‘लचके जब कमरिया त जिला हिलेला’ से ज्यादा फूहड़ बा ‘पल्लू के नीचे छुपा के रखा है उठा दूँ तो हंगामा हो’. सबसे बड़ बात यदि सामान पसंद नइखे त ख़रीदल बंद करीं. बढ़िया सामान आए चाहे ना बाकिर घटिया अपने आप बंद होखे लागी. आ कुछ करे के चाह बा त मठाधीशन के पीछे भागे से अच्छा बा बढ़िया साहित्यकार के भेंटइला प धन भले ना दीं पर जेतना हो सके सम्मान जरूर दीं आ सक्षम बानी त साल में कम से कम एगो बढ़िया साहित्य के सामने लावे के बीड़ा जरूर उठाईं.

याद आवत बा एगो मठाधीशी मंच के मालिक से जब पूछलीं कि एगो उपन्यास चाहे कविता संग्रह छपवा दीं. त कहले कि भोजपुरी में खुदे छपवावे के होला. एकर एगो सबसे बड़ कारन इहे बा कि एह लोग के भोजपुरी साहित्यकारन चाहे कवियन पर भरोसे नइखे आ एमा एहु लोग के पूरा दोष ना दीहल जा सके. कवनो मंच प केतनो गिनती के कवि लोग के बोलाहट हो झबुआ भर के लोग चढ़ जाला आ हकीकत इहे बा कि आधा से ज्यादा लोग के साहित्य के क ख ग घओ ना आवेला. अइसे में मंच के करता धर्ता के ई चाहीं कि सहिए लोग के मंच पर आमंत्रण दें आ जेके आमंत्रण दें ओकरा के पूरा इज्जत दें. उहाँ ई ना हो कि जब आमंत्रित सज्जन के माइक से आपन विचार कहे के कहल जाये त ओकरा के माइक प पहुंचे से पहिले कहा जाये कि भाई जी समय कम बा आ आगे मनोरंजन के कार्यक्रम में देरी हो जाई !

कहे क मतलब कि आज जरूरत बा हर मनई के पीर, भिस्ती, बावर्ची, खर के किरदार एके साथ निभावे के पीछे का भइल से भुला के आगे बढे के जरूरत बा. ना बढब जा त पारसी लोग जइसन स्थिति खातिर तइयारी त करिए लीं जा.

हर कारवाँ क़े आगाज खुद ही करे के पड़ी,
आग केतनो तेज ओमा खुदे जरे के पड़ी.
ना अइहें कउनो खुदा जन्नत से ऐ विष्णु,
स्वर्ग क़े चाह में एक बार त मरे क़े पड़ी.

Advertisements

2 Comments on "फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के बदनामी काहे.. भाग २"

  1. BHOJPURI MEIN LAGBHAG 80% LOGE CHAAHELAA SIRF ENTERTAINMENT, ENTERTAINMENT, ENTERTAINMENT,….AHIE SE…

  2. ashok sharma atul | July 16, 2015 at 1:11 am | Reply

    baat ta sahi baa ki phuharta par kahli bhojpuri ke naam kahe. bakir ego baat hamhuoon kahem, rauwa chor ta k hamhoon chor ban jaayee? i kaouno matlab bhaiyeil ki je sab kar uhe hamhooon kari. aur ego aur baat adhunikta, samaj vikash ke matlab cinemai parda par naa laukela, bhojpurian log ke kahi jawan parda par laukata kaa u aapna jeewan me utaar paihen. ham jaantanai naa. rauwa barishtha baani samajh sakeni, kabo ham batayem?

Leave a Reply

%d bloggers like this: