एस मुरलीधरन के लेख का आधार प

आ आपा वालन के मानना ह कि जे ओकरा संगे नइखे उ ओकरा खिलाफ बा आ ओकरा पर टेढ़ नजर राखल जरूरी बा. या त हमरा संगे चलऽ ना त भाँड़ में जा.

कहल जाला कि जे बीस का उमिर में कम्युनिष्ट ना भइल ओकरा लगे दिल नइखे आ जे तीस का बादो कम्युनिष्ट रह गइल सेकरा लगे दिमाग नइखे. एह कहावत के पहिला हिस्सा अबही आ आपा खातिरो साँच लागत बा.

काहे कि राजनीति मे उतरे, वर्ग जाति मजहब आ इलाकाई आधार से अलगा के विकल्प दे के राजनीतिक व्यवस्था के साफ करे, चुनाव लड़े ला फंडिंग के नया तरीका इस्तेमाल करे वगैरह के आ आपा के गोहार नवहियन के बहुते नीक लागत बा. अब इंफोसिस के सीएफओ रहल बालाकृष्णन आ आपा में शामिल हो गइल बाड़े त उनकर उमिर बीस त नइखे बाकिर बीस के बात बरीस बदे ना उमिर भा मन से नवहियन बदे कहाइल बा.

आ आपा नवहियन के अपना ओरि खींचत बिया बाकिर सवाल उठावल जा सकेला कि का ओकरा से जुड़े वाला हर नवही सोशलिस्टे हउवे. बाकिर सत्ता के तामझाम, परंपरा आ प्रोटोकाल से नफरत, संस्थान ला तंग नजरिया वगैरह हमेशा से सोशलिस्ट विचार वालन ला संजीवनी जस रहत आइल बा. आ इ सब कुछ पोलितब्यूरो से चले वाला गोल में देखल जाला जहाँ मतभेद भा विरोध के कवनो गुंजाइश ना होखे. आ आपा के बड़बड़ाहट में एकर नमूना आए दिन देखलो जात बा.

आ आपा महीना में बीस हजार लीटर पानी मुफ्त में देबे के कह दिहलसि बाकिर इ ना सोचलसि कि एकर असल समर्थक गरीब गुरबा के एकर फायदा मिली कि ना. एकरा चाहत रहे कि पहिले झुग्गी झोपड़ियन ले पाइपलाइन बिछावे बिछवावे के काम करीत तब फोकटिया पानी के एलान करीत. आ आपा के काठबुद्धि के इ बढ़िया नमूना बा. आ आपा का लगे एकर कवनो जवाब नइखे. पिछला दिने एगो टीवी चैनल पर एह बारे में पूछल सवाल पर आ आपा के राघव चड्ढा अगल बगल झाँके लागल रहले आ मेहराइल आवाज में एकर दोष पिछला सरकार प डाल दिहले. अइसने सोच बिजली दर अधियावे के फैसलो का पीछे देखल जा सकेला. बिजली बाँटे वाली कंपनियन के खाता में कवनो गलती खोजल भा देखल अलग बात बा आ एह चलते टैक्स देबे वालन प फालतू के बोझा डालल अलग.

आ आपा के नौटंकी से नवहियन के रूझल बा. बाकि मनमाना फैसला लिहल निर्णायक होखल ना कहल जा सके. निर्णायक होखल आ आपा के मनसो नइखे. मोदी रहतन त पहिले पाइप लाइन बिछावे के काम करतन. उ इहो देखतन कि बिजली समस्या का पीछे दोसरा राज्यन से बिजली खरीदे के मजबूरी बड़का कारक बा. जब दिल्ली के जरूरत के सत्तर फीसदी बिजली बाहर से खरीदे के पड़ेला त कहाँ गुंजाइश बा अधिका सबसिडी देबे के. एह हालात में मोदी पावर प्लांट लगावे के काम पहिले करतन जेहसे बिजली ला अधिका दाम के मजबूरी ना रहे दिल्ली का सोझा. मोदी परमाणु बिजली घर लगावे के नकरतन ना जइसन कि आ आपा करत बिया. आ आपा अइसन कहले त नइखे बाकिर परमाणु बिजलीघर के विरोध करे वाला उदय कुमार के जइसन गरमजोशी से स्वागत कइलसि तवना से त इहे लागत बा.

बिजली आ पानी पर आ आपा के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार कांग्रेसियनो के नीक लागल बा आ उ कांग्रेस सरकार वाला राज्य महाराष्ट्र में अइसने माँग करे लागल बाड़े. इ छूतहा बेमारी अउरियो पसरे के अनेसा बा. आ एकर भंयकर नुकसान देश के अर्थव्यवस्था के भुगते के पड़ी. काहे कि तब राज्यन आ केन्द्र के घाटा बेसम्हार हो जाए के पूरा अनेसा बा.

अब आईं ओह कहावत के दुसरका हिस्सा प. इ कहावत अधिका लोग के मंजूर ना होखी कि तीस का उमिरो में जे कम्युनिस्ट रह गइल सेकरा लगे दिमाग नइखे. काहे कि ओकरा लोकलभावन फैसलन से होखे वाला फायदा के लालच बा. आ इहे कारण बा कि गलत वित्तीय फैसलन के विरोध एह मतलबी जमात के नीक ना लागे. साँच कहीं त उहो लोग जानत बा कि बेसम्हार घाटा वाला बेवहार ढेर दिन ले ना चलावल जा सके बाकिर अपना लालच आ मतलब का फेर में एह सच्चाई के उपर से झुठलावे में लागल बाड़े.

आखिरकार सीधा आ घुमा के लगावे वाला टैक्स एह घाटा के पूरा करेला बढ़ावहीं के पड़ी. इहो बात इ सोशलिस्ट जमातन सकारे ला तइयार नइखे. मध्यपूर्व के सुलतानन जइसन सुविधा भारत का लगे नइखे जे अपना दरियादिली के इस्तेमाल अपना नागरिकन के बहलावे फुसलावे में करत रहेले जेहसे उ बगावत में मत उठे. हमनी के सरकार का लगे तेल जइसन प्राकृतिक संपदा नइखे जवना से मनचाहा कमाई कइल जा सके. जहाँ उ सुल्तान निर्यात क के कमाले हमनी के शासक आयात कइला में मिले वाला किकबैक से.

एह माहौल में नवहियन के बड़हन संख्या एह बेदिमागी लोकलुभावन वादा करे वाला गोल ओर झुक सकेला काहे कि भठियरपन के विरोध के बात ओकरा मन के बात बा आ उ बाकी चीझ के अनदेखी क सकेला. उमिरदराज लोग एह फेर में लपक सकेला कि अगर हटा नइखऽ सकत त खुदे सट जा. अब एह ला केहू बेदिमागी माने त माने. जब देश के आबादी के पैंसठ फीसदी हिस्सा नवहियन के बा त अइसन होखे के अनेसा भरपूर बा. आ आपा के लहर में गुजरात के विकास मॉडल आ मोदी दहा सकेले.

भाजपा के लाग सकेला कि उ शैंपेन बोतल खोले में जल्दबाजी क दिहलसि. ओकरा एहु बात के अफसोस होखत होखी कि दिल्ली में सरकार काहे ना बनवलसि. फिजूल के विनम्रता देखा के उ आ आपा के मौका दे दिहलसि. भाजपा कुछो दिन ला सरकार बना लिहले रहीत आ बाजपेयी जइसन शहीदाना अंदाज में शहीद हो गइल रहीत त ओकरा अधिका फायदा भइल रहीत. खास क के तब केन्द्र मे सत्ता पर आवे में ओकर सपना खतरा में ना पड़ल रहीत.

Advertisements