गुन आ ग्यान, गुनी आ ग्यानी. के बड़ छोट कहत अपराधा. बाकिर बिना गुन के ग्यान आ बिना ग्यान के गुन ढेर कामे ना आ पावे. गुन आ गुण एक होइओ के एक ना होखे. गुण दोष वाला गुण आ हुनर वाला गुन. अब एह गुन के केहु के गुण मानल जा सकेला बाकिर हर गुण गुन का कामे आवे जरूरी ना होला. कई बेर त कुछ गुण दोष मान लिहल जाला. जइसे कि कवनो आदमी नाट होखे त ई त ओकर गुण भइल बाकिर समाज का नजरिया से ई ओकर दोस हो गइल. एह तरह से देखल जाव त दोसो गुणे होला. दोष गुण के एगो प्रकार होला. गूण से अलग कुछ ना हो सके. बाकिर गुन दोष ना हो सके. आ गुण आ गुन में सबले बड़का फरक एकरे के माने के चाहीं.

गुनी आ ग्यानी के फरक समुझे खातिर एगो आसान उदाहरण दिहल जा सकेला. जइसे कि ग्यानी वकील कानून जानेला आ गुनी वकील जज के. अब ई रउरा पर बा कि ग्यानी के चुनत बानी कि गुनी के. गुनी आदमी भा औरत के पूछ सभे करेला बाकिर ग्यानी के मान मिलेला. कहल गइल बा कि गुनी ना हेराइल गुनग्यानी हेराइल बा. से एह पूछ आ मान में फरक बा. जइसे कि मान आ मान में. एगो मान सम्मान वाला मान आ दोसरका बाघ के माँद. माँद के भोजपुरी में मान कहल जाला . खैर बात बहकवला के जरूरत नइखे. लवटल जाव सम्मान वाला मान पर. त जेकरा के मान दीं ओकरा के पूछबो करीं जरूरी नइखे ठीक ओही तरह जइसे जेकरा के पूछीं ओकरा के मानो दीं इहो जरूरी ना होला. कर्मचारी के पूछ ओकरा गुन का चलते, हुनर का चलते होला बाकिर ओकरा के मान मिले ई जरूरी ना होला. दबंग लोग त गुनी से बेगार खटावे में माहिर होला. बाकिर ग्यानी के बेगार ना खटावल जा सके. रउरा केहु के कुछ करे ला त मजबूर कर सकीलें बाकिर कुछ सोचे ला ना. सोच आदमी के आजाद करेला, सोचे में ऊ आजाद होला कि का सोचे, कब सोचे आ कइसे सोचे. फेर एह सोच आ चिन्ता वाला सोच में फरक होला. चिन्ता वाला सोच आदमी के घुन तरे खा जाला अगर ऊ सही तरीका से ना सोचे त. सोच के समाधान सोचे से हो सकेला बशर्ते ऊ सही सोच होखे. त एगो सोच समस्या के नाम त दोसर सोच समाधान के.

सोच पर याद आ गइल सवाचल. कवनो बात के जानकारी लिहल सवाचल हो सकेला. केहु के हाल चाल पूछल सवाचल होला. बोल के जानकारी माँगल सवाचल कहल गइल काहे कि ई वाच्य से कइल जाला. चुपे चोरी जानकारी बटोरल सवाचल ना होखे खुफियागिरी हो जाला. खैर बात होत रहुवे ग्यानी आ गुनी के. ग्यान से विचार होला गुन से आचार व्यवहार. ग्यानी व्यवहारिओ होखसु जरूरी नइखे. अधिकतर मामिला में ग्यानी लोग आचार व्यवहार में कमजोर पावल जालें. गुनी एह मामिला में गुनगर होलें. काहे कि अगर आचार व्यवहार सही नइखे त गुन कामे ना आ पाई. गुन के बात गुनगुनात निर्गुन याद पड़ गइल. निर्गुन माने जवना के कवनो गुन ना होखे. बाकिर निर्गुन एक तरह के गीतो के कहल जाला. खास कर के भजन के एगो शैली ह निर्गुन. बाकिर निर्गुनिया नेता के सबले बड़का गुन होला कि ऊ घोटाला करे जानेला. आ अब त ओकर मान एह पर टिक गइल बा कि कतना बड़का घोटाला कइलसि. अगर कवनो नेता पर पचास सौ लाख घोटाला के आरोप लगावे क बा त वकील पहिले से तइयार राखीं. काहे कि ऊ रउरा पर मानहानि के मुकदमा कर सकेला. अतना बड़ नेता पर अतना छोट घोटाला के आरोप !

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