BhojAcademyBihar-bannerभोजपुरी आन्दोलन के एगो मजबूत गढ़ जमशेदपुर से बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष पद से प्रो॰ आर॰ के॰ दुबे के हटावे के माँग करत अखिल विश्व भोजपुरी विकास मंच का ओर से बिहार के राज्यपाल आ मुख्यमंत्री के फैक्स करे के फैसला लिहल गइल बा. एह बाबत जानकारी देबे खातिर १३ अगस्त के भइल मंच के पत्रकार सम्मेलन में मंच के महामंत्री प्रदीप कुमार सिहं सवाल उठवले कि बिहार भोजपुरी अकादमी अपना मूल लक्ष्य से भटक गइल बिया आ बेमतलब के आयोजन पर अकादमी के धन लुटावल जात बा. पिछला दिने पटना में आयोजित कार्यक्रम पर जतना खरचा कइल गइल ओतना खरचा में अकादमी कई गो भोजपुरी किताबन के प्रकाशन करवा सकत रहे.जवन कि एकर मुख्य मकसद होखे के चाहीं.

अकादमी से नाराजगी के तत्काल कारण मालिनी अवस्थी के अकादमी के अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड अम्बेसडर बनवला से शुरु भइल बा. साथ ही भोजपुरी के काम में लागल जमशेदपुर के अनेके महारथियन के दुखद उपेक्षा कइल गइल. कहल जात बा कि अकादमी के रवैया से नाराज हो के मनोज तिवारी आ भरत शर्मा व्यास आपन मिलल सम्मान लवटावल चाहत बाड़न.

आजु जब चारो ओर से अकादमी पर आ खास कर के अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ आर॰के॰ दुबे पर सवाल उठावल जात बा तब अकादमी चुप्पी साध लिहले बिया आ बतावल नइखे चाहत कि आखिर मालिनी अवस्थी के आपन प्रतीक बनावे के फैसला में अकादमी का ओर से के शामिल रहल आ कि ई अध्यक्ष के आपन निजी फैसला रहल. बार बार सवाल उठावल जात बा कि पिछला तीन साल के साहित्यिक गतिविधियन का बारे में अकादमी जानकारी देव कि एह बीच भोजपुरी भाषा आ साहित्य ला उ का कइलसि सिवाय मंचीय कार्यक्रम आयोजन कइला के.

हालांकि आपसी बातचीत में आपन नाम छिपावत इहो बतावल जात बा कि केहु अइसन नइखे जे बिना कुछ लिहले ब्रांड अम्बेसडर बन जाइत. एहिजा त हर कार्यक्रम में शामिल होखे खातिर लोग धन माँगेला. कुछ लोग से त बतियइलो मुश्किल हो जाला जब फोन पर दोसर केहू सवाल के झड़ी लगा देला कि कतना बजट बा, कतना मिली वगैरह वगैरह.

खुशी बा त बस एक बात के कि ढेर दिन से सूतल एगो अउर वेबसाइट जाग गइल बा. स्वागत बा. दुष्यंत कुमार के गज़ल के एगो लाइन दुहरावल जरूरी लागत बा, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं/ मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए/ मेरे सीने में न सही तो तेरे सीने में सही/ हो कहीं पर आग लेकिन आग जलनी चाहिए.” शायद एह विवाद से भोजपुरी के सूरत आ सीरत में कुछ बेहतर बदलाव आ पावे इहे कामना बा.

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