– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु”

AbhayTripathiVishnu
श्रद्धालु कभी परेशान ना होले, परेशानी उनकर बा जे यात्रा अउरी तीर्थयात्रा दुनो के लाभ लेबे चाहत बा. ठीक इहे जुमला आज भोजपुरियो खातिर कहा सकत बा कि जेकरा भोजपुरी में जिए मरे के बा ओकरा खातिर 8 वीं के बैशाखी कवनो काम के ना. भोजपुरी खातिर जिए मरे वाला आजुओ भोजपुरिये में जी रहल बा, मर रहल बा.

माफ़ करब जा, बाकि भोजपुरी बोली अउरी संस्कृति एतना कमजोर नइखे कि ओकरा के कवनो भूत गायब क सके भा कवनो बैशाखी जिया सके. ई आजु ले जिन्दा बिया अउरी आगहूं जियत रही आ बर के पेड़ नियर ठाड़ रही.

याद पडत बा कबहीं मुंबई के इस्कॉन मंदिर में रोज दर्शन करे जात रहीं आ समय रहला पर मंदिरिये के दुकानी प किताब देखे लगीं. एक दिन स्वामी जी महाराज हमार परिचय पुछले आ ई जाने के बाद कि लेखक बानी हमरा के भगवान प लिखे खातिर सलाह दिहले. कवन भगवान पुछला प किशन जी महाराज के नाम लिहले. केवल किशने जी काहे, शिवजी काहे ना के जवाब ना मिलल. हमरा इहो बात के जवाब ना मिलल कि सामने जात एगो स्वान प काहे ना. काहे से हमार तर्क रहे कि मानऽ त देव नाहीं त पाथर!

हमार जवाब ना मिलल आ अतना दिन से रोज मंदिर जाये के बादो हमरा के नास्तिक के तमगा मिल गइल. तर्क कुतर्क एतना बढ़ल कि हमरा कहे के पड़ल “जे राम अउरी किशन जी के बेचे के काम क रहल बा ऊ आस्था के बारीकी का समझी ?”

तब के दिन बा आ आजु के दिन. जाये के त बहुत मंदिर गइलीं, इहाँ तक कि चारो धामो पूरा हो गइल बाकि इस्कॉन मंदिर दुबारा ना गइलीं. कुछ अइसने समस्या आजु के दिन भोजपुरी मंचनो के बा. लगभग सबही मंच वाला लोग ई दावा त क रहल बा कि सब लोग भोजपुरी क भलाई चाहत बा बाकि सभके इहो शिकायत बा कि फलाना बढ़िया लेखक भा कवि उनका मंच के गुणगान काहे ना क रहल बा. आ मंच केहु के हो सब जगह इहे परिपार्टी चल रहल बा.

खुल के केहु ना बोली बाकि तनी दिमाग से विचरला प एह बात के एहसास केहु के हो सकेला. एकर एगुडे सबूत दिहल जा सकल जाला कि हर मंच भोजपुरी खातिर खाड़ बाकि केहु ई ना पाई कि सब एक काहे नइखे. कहला प शायद खिसियानी हँसी के साथ सब एगो मंच प खाड़ हो जाए, प घरी चहुँपते सब के सब एगो कुशल राजनीतिज्ञ के परिचय दे दिही.

बस इहे समस्या बा जेकरा कारन हमनी के कमजोर बानी सन नाही त अइसन कवनो कारन नइखे कि जवन चाहल जाव तवन ना हो पाये. फेर चाहे कवनो तकनीकि समस्या हो भा दोसर, सब हल हो जाई. फेर केहु के कवनो लेखक भा कवि लोग से ओरहन ना रह जाई कि सामने वाला उनकरा मंच के गुनगान काहे नइखे करत. काहे से कि तब सामने वाला ईहो जानत रही कि लेखक भा कवि महाराज भोजपुरी के सेवा क रहल बड़े आ सभकर इहे मंशा बा. आ फेर चारो ओरि इहे सुनाई पड़ी –

हर दम हमरा दिल में इहे ख्याल आवेला,
भोजपुरिया बानी आ भोजपुरिए भावेला॥

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