ViBhojKaviGosthi-2015
सेतु न्यास मुंबई का सौजन्य से भागलपुर, देवरिया में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के सालाना बइठक का मौका पर एगो भोजपुरी कवि सम्मेलनो आयोजित भइल जवना में स्थनीय कवि नित्यानंद आनन्द का साथ ही बाहरो से आइल कवि लोग आपन कविता सुना भा गा के सुनेवालन के भोजपुरी कविता के विस्तार से परिचित करवलें.

कवि सम्मेलन के शुरूआत में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी कवियन आ सुने जुटल भोजपुरी प्रेमियन के स्वागत कइलन. अध्यक्षता कइलन पं. हरिराम द्विवेदी आ संचालन के जिम्मा सम्हरलन मऊ से आइल कवि डा. कमलेश्वर राय.

कविता पाठ के शुरुआत भइल भाई भालचन्द त्रिपाठी के गावल वाणी वन्दना से :
माई वीणा के तार झनकावेलु, सुबुधि जगावेलु ना.
मन के सगरो विकार, देलु छन में निकाल
माई के नेहिया के दियना जरावेलु,
सुबुधि जगावेलु ना.

तब अइलन पंडित विजय मिश्र जे आपन बहुते लोकप्रिय कविता ‘लइका ई नोकरिहा बा’ सुनवलन जवना में दहेज लोभी बाप अपना नोकरिहा बेटा खातिर दहेज के माँगपत्र पढ़त बा.

एकरा बाद नंबर आइल नवकवि अशोक तिवारी जे आजुए रचित आपन कविता सुनवलन आ आजु के सामाजिक राजनीतिक हालात के चित्रण करत गाँव आ शहर के फरक देखवलन :

ई कइसन बा खेल फकीरा
ब्रेन शहर के तेज हो गइल,
गाँव के माथा फेल फकीरा.

एकरा बाद मंच पर अइलन नित्यानंद आनंद जे बचपन के एगो बानगी ‘आपन गउँवा आपन यार’ कविता में सुनवलन.

राजनीतिक विचारधारा से समाजवादी होखला का बावजूद शशि प्रेमदेव अपना व्यंग कविता में आजु के समाजवाद का बारे में बतावत सलाह दिहलन कि :

मीलल बा कुरसी त फैदा उठालीं
कीनि लीं ना सइयां जहजिया हवाई
समाजवाद साइकिल प कबले ढोवाई!

साइकिल, समाजवाद, आ नेताजी के जिक्र कविता में रहला का चलते लोग एकरा के गलत संदर्भ से मत जोड़ देस, ई आग्रह ऊ पहिलहीं सुनेवालन से कर चुकल रहलन.

एकरा बाद शशि प्रेमदेव आपन एगो गजलो सुनवलन.

तब अइलन स्वर के धनी सौदागर सिंह जे अपना कविता में आजुके नारी के बदलत पसन्द के चरचा करत कहलन कि जे अबला रहे ऊ अब सबल बा
ओकर ढंग सब अलग बा आ ओकर कहना बा कि :

कहिया ले बन के रहब हम रानी
हमहूं किसानी करबे ना

डा. प्रकाश उदय के कविता के भाषा हमेशा से सुनेवालन के एगो अलगे रस के अनुभूति करावेला. एहु सम्मेलन में ऊ अपना ओही भाव भंगिमा में आजु के फैशन परस्त महिला वर्ग के दिनचर्या सुना के खिसके चहलन बाकिर लोग उनुका के मजबूर कर दीहल मराठी स्टाइल के हिन्दी कविता सुनावेला – ‘जास्ती नहीं बोलने का’

मिथिलेश गहमरी आपन गजल सुनवलन ‘घर अन्हरिया के सुरुज बिन जगमगाई ना कबो’ आ ओकरा बाद तंज करत कविता सुनवलन :
खीरमोहन अपना के, हमरा के सतुआ,
देख लिहलीं आज हम ईमान राउर.

शुरुआत में वाणी वन्दना क के गइल भाई भालचन्द त्रिपाठी के तब दुबारा बोलावल गइल आ ऊ आपन गीत ‘जवन बगिया के दिन बीतल/जिनगानि से नाता टूटल’ सुना के सभका के भावविभोर क दिहलन.

लवकुश खण्ड काव्य के रचियता तारकेश्वर मिश्र राही के कविता में टूटत परिवार आ सामाजिक सरोकारन के वेदना उभर के निकलल :
खेत बारी बँट जाई
कइसे भाई के सनेहिया बाँटल जाई बिरना?

इनका बाद अइलन भोजपुरी के यशस्वी कवि डा. अशोक द्विवेदी आ आपन पचीस बरीस पुरान बाकिर कालजयी कविता ‘रेवाज’ सुना के बता दिहलन कि बरीस पर बरीस बीतल बाकिर समाज आजुओ ओहिजे अझुराइल जहाँ बा.
का हो हरे चलबू?
दुश्मन के लाठी अड़बू?
कि देबू पितरन के पानी?
मुँहझउँसो लड़िका के बरोबरी लीहें !

एकरा बाद उनका सुनेवालन के आग्रह पर अउरीओ कविता आ गजल सुनावे के पड़ल :
कोर बाँस के बनल पलनिया रे
ताहि चढ़े सरधा के बेल
इहे मोर दुनिया बा छोटीमोटी अंगना..

अब ले कवि सम्मेलन के संचालन करत डा. कमलेश राय के अब आपन कविता सुनावे के मौका मिलल आ ऊ आपन गीत सुना के सभका के झूमा दिहलन :
हम पतझर में शीत जगा के पातपात मधुमास लिखिलां..
एकरा बाद लोग के आग्रह पर सुनवलन :
तुलसी चउरा पर दियना के बार चलली
गोरी मानत मनौती हजार चलली.

प्रतिष्ठित कवि गिरिधर करूण आपन गीत सुनवलन आ सावन का पहिलहीं माहौल सावनी हो गइल :
नहीं आए मोर सँवरिया घेरि आई बदरी.

कवि सम्मेलन के समापन करत पं. हरिराम द्विवेदी तब आपन देश प्रेम वाली कविता सुना के कविता पाठ के अंत कइलन :
सिंधु पर्वत के घाटी के सौ सौ नमन
ओही धरती के माटी के सौ सौ नमन.

सबले आखिर में फेरू विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी जी सभकर आभार जतवलन आ उमेद जतवलन कि हर साल होखे वाला एह समारोह में एही तरह सभका से नेह छोह मिलत करी.

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