– अजीत दुबे

हाल ही में संघ लोकसेवा आयोग एगो जनहित याचिका के अनुपालनक करत मुंबई उच्च न्यायालय में हलफनामा दिहले बा कि सिविल सेवा परीक्षा में उम्मीदवार कवनो मान्यता प्राप्त भाषा मे साक्षात्कार दे सकेलें. भारतीय भाषा आ ओकरा के बोलेवालन खातिर ई बहुते खुशी आ गौरव के बाति बा. संघ लोक सेवा आयोग के ई पहल स्वागतजोग बा. आ एहसे भारतीय भाषावन के बढ़न्ती के राह अउरी खुली. इहे ना अपना मातृभाषा मे साक्षात्कार देबे में उम्मीदवारो सहज रहीहें आ उनुका सहुलियत रही. बाकिर एह फैसला के मद्दे नजर जब भोजपुरी समाज पर नजर जात बा त हिया में एगो हूक जस उठत बा. भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता के मांग जमाना से उठत आवत बा. हाल ही में एक बेर फेरु संसद में ई माँग उठल रहे.

हर साल यूपीएससी इम्तिहान में भोजपुरी भाषी उम्मीदवारो बड़हन संख्या में शामिल होखेलें बाकिर उनुका भाषा भोजपुरी में परीक्षा आ साक्षात्कार देबे के सहूलियत ना मिल पावे. काहे कि भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता नइखे दिहल गइल. अब ई देश के विडंबना बा कि नेपाली आ सिंधी, जवन हिन्दूस्तानी मूल के भाषा ना हईं सँ, में त इम्तिहान आ साक्षात्कार दिहल जा सकेला बाकिर देश में हिंदी का बाद बोले जाए वाली दोसरकी बड़की भाषा भोजपुरी में ना. ई भोजपुरी भाषियन का साथे एगो अन्याये जस बा. बाकिर ई तबहिए हट पाई जब भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल कर लिहल जाई.

मारीशस में पिछला साल १४ जून २०११ के भोजपुरी के सरकारी मान्यता दे दिहल गइल बाकिर दुनिया भर के सोलह देशन में बीस करोड़ से अधिका लोगन के हजार साल से बेसी पुरान भाषा के भारत में आजुवो मान्यता नइखे. भोजपुरी का लगे आपन समृद्ध साहित्य, अपार शैक्षणिक सामर्थ्य, समृद्ध सांस्कृतिक आ एतिहासिक विरासत मौजूद बा लेकिन ऊ अपनही देश में सरकारी अनदेखी झेलत बिया.

गंभीरता से विचारल जाव त भोजपुरी में ऊ सबकुछ बा जवना से ओकरा के आठवीं अनुसूची में शामिल कइल जा सके. एह अनुसूची में शुरूआत में लिहल चौदह गो भाषा का बाद जवन आठ गो अउरी भाषा, सिंधी, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, बोडो, डोगरी, मैथिली आ संथाली, के जोड़ल गइल तवनन में से कवनो भाषा भोजपुरी से कवनो मामिला में बीस ना ठहरी. अगर खाली बोले वालन के गिनिती लिहल जाव त एह आठो भाषा मिला के बोले वालन के गिनिती साल २००१ के जनगणना में ३, १६,४४, ७४३ रहल जवन कि भोजपुरी बोलेवालन के संख्या के कवनो पासंग में नइखे काहे कि भोजपुरी बोले वाला बीस करोड़ से बेसी बाड़े.

आजु देश के अनेके विश्वविद्यालयन में भोजपुरी के पढ़ाई होखत बा. दुनिया के सबले बड़का खुला विश्वविद्यालय इग्नू में एकर फाउंडेशन कोर्स चलावल जात बा. दिल्ली सरकार मैथिली भोजपुरी अकादमी आ बिहार सरकार भोजपुरी अकादमी के स्थापना कर के भोजपुरी भाषा, कला आ संस्कृति के नया आयाम दिहला का संगेसंग नया पहिचानो दिहले बिया. मूल रूप से भोजपुरी इलाका के महापर्व छठ आजु गँवे गँवे सगरी हिन्दुस्तान में श्रद्धा भक्ति संग पूरा उत्साह से मनावल जाए लागल बा. ई भोजपुरी संस्कृति के व्यापकता देखावत बा. केंद्र आ दि्ल्ली सरकार एह पर्व पर वैकल्पिक अवकाश देबे लागल बाड़ी सँ.

भोजपुरी के उपयोगिता आ बढ़त प्रभाव के अंदाजा एहू बात से लागत बा कि बहुराष्ट्रीय कंपनिओ अब आपन विज्ञापन भोजपुरी में बनवावे लागल बाड़ी सँ. भोजपुरी टीवी चैनलन पर आवे वाला विज्ञापन आ भोजपुरी इलाका में लागल होर्डिंग्स एकर साक्षात गवाह बाड़ी सँ. महुआ आ हमार टीवी जइसन भोजपुरी चैनल भोजपुरी के देश विदेश में पसार करे में आपन महती भूमिका निभावत बाड़ी सँ. भोजपुरी सिनेमा आजु हिंदी सिनेमा के जोरदार टक्कर देत बा आ लाखो लोग के रोजगार के साधन बनल बा.

अइसन नइखे कि भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के माँग नइखे उठल. साल १०६९ के चउथी लोकसभा से लगाइत अबहीं ले पन्द्रह हाली संसद में एकरा खातिर निजी विधेयक पेश भइल बा. सांसद अली अनवर अंसारी साल २००७, २००८ आ २००९ में स्पेशल मेंशन का रूप में पेश कइले त सांसद योगी आदित्यनाथ एकरा के साल २००७ में नियम ३७७ का तहत संसद में उठवलें. अनेके सांसद जइसे कि ओमप्रकाश यादव, नीरज शेखर, जगदंबिका पाल, आ उमाशंकर सिंह साल २०१० में गृहमंत्री के पाती लिख के एह मामिला पर जरूरी कार्रवाई करे के गोहार लगवलें.

३० अगस्त २०१० के १५वीं लोकसभा में पहिला बेर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जरिए भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे के मुद्दा सांसद संजय निरूपम, रघुवंश प्रसाद सिंह आ जगदंबिका पाल बहुते जोर शोर से उठवले. एकरा जवाब में तब के गृह राज्य मंत्री अजय माकन कहलें कि सरकार भोजपुरी आ राजस्थानी के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के विचार करत बिया बाकिर एहला कवनो समय सीमा ना बान्हल जा सके. वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी दखल देत कहलन कि एह मामिला के सार्थक चरचा खातिर नियम १९३ के तहत उठावे के चाहीं.

एह सब का बावजूद भोजपुरी अपने देश में अबहीं ले अपना हक के लड़ाई लड़त बिया आ अबले के सरकार एह मुद्दा के अनदेखी करत आइल बाड़ी सँ.


लेखक अजीत दुबे भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष हईं.

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