Prabhakar Pandey

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया”

भोजपुरी के बहुत जल्दी मिल जाई भाखा के दरजा….बहुते जानल-मानल भोजपुरिया लोग तन-मन-धन से भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता दिउवावे खातिर कमर कसि लेले बाटे लोग….सराहनीय कदम बा…काम बा…पर ए लोगन के बरसाती मेढक ना बने के चाहीं…..काहें कि हम देखतानी की भोजपुरी के मान्यता दिउआवे के अलख …रही-रही के जगावल जाता…अउर उहो..अलग-अलग हो के….लोग के लागता कि कहीं हम पीछे मति रही जाईं…..बरसात सुरु हो गइल बा…अउर एगो बेंगा की टर्र-टर्र करते कइगो बेंगा टर्र-टर्र करताने कुल….पर ए बेंगन की आवाज में एक दूसरे के आवाज दबि जाता काहें कि इ बेंगा दूसरे बेंगन के आवाज दबावे खातिर बोलताने सन…… बेंगन में एकता कहां बा…खाली सवारथ बा…बरसात खतम होते इ देखाई ना दिहें सन…समय के स्वार्थ की रूप में बदलि के बस ओकर फायदा उठवले से अच्छा बा की ऊंच-नीच के बिचार छोड़ि के एक मंच पर आके भोजपुरी के आवाज बुलंद करीं……..जहिया इ मानल-जानल भोजपुरी के कर्णधार लोग एक मंच के साझा क के भोजपुरी के आवाज बुलंद करी ओ ही दिन हर हालत में भोजपुरी के एकर मान-सम्मान मिली के रही।।। जय माई-भाखा।।

—(मान्यता दिउआवे खातिर) सुक के रमेसर काका सरकार से भेंट कइने त मंगर के रमदेइया काकी…भक्भेल्लर भाइयो पीछे ना रहनें अउर बुधे के पहुँचनी गइने सरकार के दरवाजा खटखटावे….अगर तीनू जाने एक साथे जाइ लोग त कइसे बुझाइ की के अगुआ बा अउर सच्चा करनधार????????

भोजपुरी फिल्मन के जवन हाल बा…ओ से बदतर हालत भोजपुरी की कथित करनधारन के बा…..भोजपुरी फिलिम वाला कुछ त देखाव ताने सन पर ..करनधार लोग त खाली फोटो खिंचववले अउर बाहबाही बटोरले में लागल बा….(पर कुछ करनधार एइसनो बाने जवन….समर्पित होके भोजपुरी के आवाज बुलंद क रहल बाने…..हारदिक नमन बा ए करनधार लोगन के।।) जय माई-भाखा।।


-प्रभाकर पाण्डेय, हिंदी अधिकारी, सी-डैक, पुणे

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