भोजपुरी के पुरनका लिपि कैथी के संजोए के काम करी नालन्दा खुला विश्वविद्यालय

"Kaithi printed" by E. B. Eastwick, 1814-1883 - Scanned from E.B. Eastwick, A Concise Grammar Of The Hindustani Language, 2nd edition, 1858. Licensed under Public Domain via Wikimedia Commons.
Kaithi printed” by E. B. Eastwick, 1814-1883 – Scanned from E.B. Eastwick, A Concise Grammar Of The Hindustani Language, 2nd edition, 1858. Licensed under Public Domain via Wikimedia Commons.

नालंदा खुला विश्वविद्यालय में बिहार के सात सौ साल पुरान कैथी लिपि के संजोए के काम शुरू भइल बा. भोजपुरी पहिले एही लिपि में लिखात रहुवे बाकिर बाद में एह लिपि के जानकार कम होखत गइलें आ बहुते कमे लोग एकर जानकार बाँचल बा. गुजराती लिपि आ कैथी में बहुते समानता देखे के मिलेला. एह लिपि के नाम कायस्थ जाति का नाम पर बा काहे कि लिखे पढ़े के काम एक जमाना में एही लोग का लगे रहत रहुवे.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रास बिहारी सिंह बतवले कि कैथी लिपि में लिखाइल शिलालेखन, दस्तावेजन अउर पाण्डुलिपियन के संजोवल जाई.

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