काल्हु 21 फ़रवरी 2016, अतवार का दिने नई दिल्ली के जन्तर मंतर पर धरना दे के भोजपुरिया लोग सरकार पर दबाव बनाई.

भोजपुरी दुनिया के 16 देशन में लगभग 25 करोड़ लोगन के भोषा हिय. एह बहुते मीठ भाषा के साहित्य भण्डार पुरहर बा. एहमें शिष्ट साहित्य आ लोक साहित्य दुनू भरपूर बा. भोजपुरी देश के अनेके विश्वविद्यालय में पढ़ावलो जाले. बिहार, दिल्ली, आ मध्यप्रदेश में भोजपुरी अकादमी गठित बा. भोजपुरी फिलिम सगरी दुनिया में आपन परचम लहरवले बाड़ी सँ. बाकिर बदकिस्मती देखीं कि भोजपुरी के ओकर वाजिब हक अबला नइखे दीहल गइल.

जान जाीं कि भारत सरकार के बनावल सीताकान्त महापात्रा कमिटी भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता ला संस्तुति दे चुकल बिया. करोड़ों भोजपुरियन के लगातार मांग के बावजूद आजु ले एकरा के संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल नइखे कइल गइल.

देश के बड़का राजनीतिक गोल जबतब तोस धरावत रहेलें बाकिर एह दिसाईं कुछ करसु ना. उलुटे केन्द्र के गृह मंत्रालय के बनावल हाई लेवल कमेटी भोजपुरी के अठवीं अनुसूची में शामिल ना करे के सिफ़ारिश कइले बिया. होम मिनिस्ट्री में अतिरिक्त सचिव बी.के. प्रसाद के अध्यक्षता में बनल एह हाई लेवल कमेटी में होम मिनिस्ट्री, कल्चरल मिनिस्ट्री, एचआरडी, लॉ मिनिस्ट्री, साहित्य अकादमी, राजभाषा विभाग आ केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान अउर रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया के सीनियर अफसर शामिल रहले.

पहिले के सरकारन से त कुछ ना हो सकल बाकि मौजूदा सरकार के बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आ दिल्ली से भोजपुरी भाषियन के प्रचंड बहुमत दिआवल गइल आ उमेद रहुवे कि ई सरकार हमहन के माईभासा भोजपुरी के जल्दिए संवैधानिक दर्जा दे डाली बाकि अइसन भइल ना. अब भोजपुरी भाषा ला आर-पार के लड़ाई लड़े के समय आ गइल बा आ एही मकसद से ‘भोजपुरी लैंग्वेज रिकग्निशन मूवमेंट’ का साथे साथ भोजपुरी भाषा, साहित्य अउर संस्कृति के विकास में लागल संस्था – डिफेंडर, हमारा पूर्वांचल, लाल कला मंच, अखिल भारतीय भोजपुरी लेखक संघ, भोजपुरी भारती भोजपुरी जन-जागरण अभियान, भोजपुरी समाज (जमशेदपुर), छतीसगढ़ भोजपुरी परिषद्, पुरवैया, अल-हिन्द बारय भोजपुरी जमात (हौज़ काजी, दिल्ली), क्रिस्चियन भोजपुरी युवा मंच ( आयानगर, दिल्ली), प्रगतिशील भोजपुरी संघ (देवरिया) वगैरह एकजुट होके 21 फ़रवरी 2016 का दिने अन्तर्राष्ट्रीय माईभासा दिवस के, दिन में 10 बजे से साँझ 4 बजे ले दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़हन धरना आ प्रदर्शन करीहें.

याद करे के पिछलो बरीस 6 अगस्त 2015 आ 10 दिसम्बर 2015 संसद के मानसून सत्र आ शीतकालीन सत्र का बेरा धरना दीहल गइल रहे आ प्रधान मंत्री अउर गृह मंत्री के ज्ञापन सँउपल गइल रहे. अब फेरू एहू साल एगो शांतिपूर्ण धरना आयोजित कइल जात बा.

आशा बा कि भोजपुरिया लोग गोल के गोल बना के एह से जुड़ी आ सरकार प जरूरी दबाव बनावे में सहयोग करी.
– संतोष पटेल,
समन्यवक, भोजपुरी लैंग्वेज रिकग्निशन मूवमेंट, नई दिल्ली

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