भोजपुरी भाषी के मातृभाषाई के अस्मिताबोध – 2

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’

JaiKantsinghJai

भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में मौजूद बाइसो भारतीय भा गैर भारतीय भाषा सब में हिन्दी, उर्दू आ संस्कृत पर आगे चर्चा होई. बाकी अनइसो भाषा के विषय में पहिले जानल जादे जरूरी बा.

असमिया भाषा मुख्य रुप से असम प्रांत के भाषा हिअ. जवन दसवीं सदी का बादे अस्तित्व में आइल. एकर लिपि बंगला ह आ चउदहवीं सदी के कवि माधव कन्दली,पन्दरवहीं सदी के शंकरदेव आदि के रचना कीर्तन घोष वगैरह से असमिया के साहित्यिक विकास नजर आवेला.

असमिया के तरह बंगलो भाषा मागधी अपभ्रंश से बारहवीं सदी के उत्तरार्धे में निकसल आ एकरो लिपि बंगले ह. एह भाषा का शब्द वगैरह के पहिल प्रयोग भोजपुरी आ उड़िया जइसन बौद्ध धर्म के सिद्ध आचार्य लोग का साहित्य में मिलेला. एहू भाषा के मुख्य संबंध बंगाले प्रांत से बा.

गुजरात प्रान्त के गुजरातियो भाषा बारहवीं सदी के बादे बिकसित भइल, जवना के लिपि भोजपुरी के कैथी से मिलत-जुलत बा. गुजरात में गुजराती से जादे मारवाड़ी, मालवी आ जयपुरी बोले वाली जनता के संख्या बा.

कन्नड़ भाषा के संबंध कर्नाटक प्रांत से बा. दसवीं सदी (942 ई० ) के पंप कवि एकर आदिकवि मानल जालें. सन् 1981 ई० में ई सरकारी राजकाज के भाषा बनल.

कश्मीर के दसो हजार बर्गमील से कम क्षेत्र में बोले जाए वाली कश्मीरी ब्राह्मी लिपि से बिकसित शारदा लिपि सहित देवनागरियो लिपि में लिखाले-पढ़ाले. 15वीं सदी में लिखाइल ‘वाणासुर वध हरिवंश’ एकर पहिल काव्य भा प्रबंधकाव्य मानल जाला.

द्रविड़ भाषा परिवार से निकसल मलयालम केरल प्रांत के भाषा हिअ. एकर साहित्यिक परंपरा डेढ़ हजार साल पुरान बा.

मराठी महाराष्ट्री अपभ्रंश से बिकसित महाराष्ट्र प्रांत के भाषा हिअ, जवना मे साहित्य लिखे के काम तेरहवीं सदी में शुरू भइल आ एकरा में साहित्य लिखे के एगो लमहर परम्परा बा.

उड़िया उड़िसा प्रांत के भाषा हिअ, जवना के बिकास असमिया आ बंगला जइसन मागधिये अपभ्रंश से भइल बा. एकरो कुछ भाषिक तत्व सिद्ध साहित्य में पावल जाला. एकरो लिपि बंगले लिपि जइसन बिआ.

पंजाब आ दिल्ली में बोले जाए वाली भाषा पंजाबी के आदिकवि फकीर शकरगंज के जनम सन् 1173 ई० बतावल जाला. कुछ विद्वान उनकर समय तेरहवीं सदी बतावेलें. पंजाबी गुरुमुखी का संगे-संगे देवनागरियो लिपि में लिखल जाले. एकरा में मुख्य रूप से सिख गुरू लोग के बानी संकलित बा.

तमिल तमिलनाडु के पुरान भाषा हिअ, जवन ब्राह्मी लिपि से बिकसित तमिल लिपि में लिखल जाले. एकरा लिपि के गोल लिपि (वेट्टलुत्तु) कहल जाला. एकरा पास साहित्य के बहुते पुरान आ समृद्ध भंडार बा.

द्रविड़ परिवार के भाषा तेलुगु संस्कृत प्रभावित भाषा हिअ. एगारहवीं सदी (1020 ई०) के कवि नन्नय तेलुगु के पहिल रचनाकार मानल जालें. सन् 1510 ई० से 1630 ई० के काल तेलुगु खातिर स्वर्णकाल मानल जाला. एह भाषा में भारतीय साहित्य के अनुवाद वाला काम खूब भइल बा. अइसे दक्खिन भारत के कवनो भाषा में एक से डेढ़ हजार शब्द छोड़ के बाकी शब्द संस्कृत के आपन शब्द बाड़ें स.

जहाँ तक सिंधी भाषा के सवाल बा त देश के बंटवारा के बाद सिंध प्रांत पाकिस्तान में चल गइल आ नाम मात्र के सिंधी भाषी इहँवा बाड़े. ओहू लोग के भाषा संविधान के 21 वाँ संशोधन के जरिए सन् 1967 ई० में आठवीं अनुसूची में दर्ज हो गइल.

सन् 1992 ई० में संविधान में 71वाँ संशोधन के जरिए गोआ के कोंकणी,मणिपुर के मणिपुरी आ नेपाल के नेपाली भाषा के संवैधानिक दर्जा दिहल गइल. कोंकणी मराठी के बोली हिअ. सन् 1961 में स्वतंत्र भाषा घोषित भइल आ सन् 1062-63 से एकरा में पढ़ाई-लिखाई शुरू भइल. सन् 1975 ई० में एकरा साहित्यिक अकादमी से मान्यता प्राप्त भइल.

नेपाली नेपाल के भाषा हिअ. अइसे सिक्किम के कुछ हिस्सन मे एकरा के बोले वाला लोग बा.

मणिपुरी मणिपुर के छोट हिस्सा में बोले जाए वाली भाषा हिअ.

देश के सम्पर्क भाषा आ राजभाषा हिंदी के बिकास में एह भाषा सब के केतना जोगदान बा, ई केहू से छुपल नइखे. अब रहल सन् 2003 ई० के 92 वाँ संविधान संशोधन के जरिए आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषा डोगरी, बोडो, संथाली आ मैथिली के बात. त डोगरी पंजाबी के बोली हिअ. देवनागरी लिपि में लिखाले. एकर सीमा क्षेत्र बहुते कम बा आ बोले वालन के संख्या कुछ लाख में बा.

बोडो आ संथाली भाषा के क्षेत्रफल, आबादी आ साहित्य सम्पदा के के नइखे जानत.

मैथिली मिथिला क्षेत्र आ नेपाल के कुछ हिस्सा में बसेवाली जनता के मातृभाषा हिअ. लगभग 30 हजार वर्ग मील का एकरा सीमा-रेखा में भोजपुरी भाषा के बोली बज्जिका आ अंगप्रदेश का अंगिको भाषा के सीमा क्षेत्र पड़ेला. एकर लिपि मिथिलाक्षर भा तिरहुता बंगला लिपि के अनुकरण भर ह. असमिया, बंगला आ उड़िया जइसन मैथिलियो मागधी अपभ्रंश से बिकसित हिअ. एह भाषा के आदिकाल एगारहवीं सदी से सोलहवीं सदी मानल जाला. सन् 1324 ई० के ज्योतिरीश्वर ठाकुर के ‘वर्णरत्नाकर’ तिरहुता के गद्य काव्य ह. संस्कृत, बंगला, उड़िया आ तिरहुता के कवि विद्यापति ठाकुर के काल सन् 1350 से 1450 ई० बतावल जाला. उनका रचनन पर गीत गोविन्द के कवि जयदेव आ वर्णरत्नाकर के रचनाकार ज्योतिरीस्वर के प्रभाव साफ-साफ झलकेला. तब से अब तक मैथिली के साहित्य परंपरा समृद्ध होत आ रहल बा. मैथिली भाषी लोग में बंगला, उड़िया भाषी के समान मातृभाषाई अस्मिताबोध कूटकूट के भरल होला. जवन एह भाषा का आधुनिक बिकास के मूल वजह बा.

संस्कृत त भारतवर्ष के सबसे पुरान, वैज्ञानिक आ अमर सांस्कृतिक भाषा हिअ. एकर देवनागरी लिपि भारते ना भारत के बाहरो के कई विदेशी भाषा के वैज्ञानिक लिपि मानल जाले. उत्तर भारत के त बाते छोड़ दीं दक्खिन भारत के प्रायः हर भाषा के एक-डेढ़ हजार आपन शब्द छोड़ के संस्कृते भाषा के शब्द सम्पदा आ ओकरा भाषिक प्रकृति-प्रवृत्ति से भरल-पूरल होले. कहल त इहो जाला कि उत्तर भारत के ऋषि अगस्ते दक्खिन भारत में जाके तमिल भाषा के बिकसित कइलें. एक तरह से दक्खिन भारत के कुल्ह भाषा आर्यभाषा संस्कृत से बिकसित होखेवाली आर्ये भाषा हई स. द्रविड़ जाति, क्षेत्र आ भाषा परिवार के झंझट यूरोपीय भाषा वैज्ञानिक के पैदा कइल ह. संस्कृत भाषा त भारतीय संस्कृति के जीवनरेखा ह. ओइसहीं दक्खिन के तमिलो भाषा भारतवर्ष में पुरान समृद्ध भाषा हिअ. उर्दू आ हिन्दी दूनो एके भाषा हई स. एकनियो में भेद यूरोपीय विद्वानलोग पैदा कइल. उर्दू में अरबी-फारसी सहित देशी भषन के शब्द सम्पदा अधिक होला. उहँवे हिन्दी में संस्कृत के तत्सम शब्दन सहित पूर्वी दिल्ली आ पच्छिमी उत्तर प्रदेश के रूढ़ बेलस बोली खड़ी-बोली का बनावटी वर्चस्व लादल गइल बा.

ओइसे मोहनदास करम चन्द गाँधी हिन्दी का एह रूप के हिन्दी भा हिन्दुस्तानी ना मानत रहस आ बहुभाषी भारतवर्ष के सर्वमान्य सम्पर्क भाषा हिन्दी भा हिन्दुस्तानी के राजभाषा, मतलब राजकाज के समर्थ भाषा बनावही के उद्देश्य से संविधान में अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा संबंधी उपबंध (बेवस्था) कइल गइल. फेर हिन्दी के सउँसे देश के सशक्त-समर्थ सम्पन्न भाषा बनावहीं खातिर आठवीं अनुसूची के बेवस्था क के ओकरा में तमाम बिकासमान देशी भाषा के बिकसित करेके बवस्था कइल गइल. ताकि एह सब भाषा के समन्वित सहयोग से हिन्दी आउर समृद्ध आ सशक्त होत जाई.

बाकिर गाँधी के गैरमौजूदगी में अँगरेजीपरस्त संविधान सभा के सदस्य लोग 14 सितंबर, 1949 के एकमत से तय कर दिहल कि हिंदी के खड़ीबोली भारत के राजभाषा होई. भारतीय संविधान के भाग 17 (क) अध्याय के धारा 343 (1) में कहा गइल कि संघ के राजभाषा हिन्दी आ लिपि देवनागरी होई. हिंदी के राजभाषा आ एकर लिपि देवनागरी होखे से केहूका कवनो नाराजगी ना रहे अउर ना आजो बा. नाराजगी एकर स्वरूप दुरूह बनावे से बा. जवना के दक्खिन भारत के के कहो उत्तरो भारत के आम जनता ना समझ सके. फेर ई सउँसे देश के सम्पर्कभाषा/ राजभाषा/ राष्ट्रभाषा कइसे बन पाई. एही बात के लेके दक्खिन के त छोड़ीं अब उत्तर भारत में बिरोध के जमीन तइयार हो रहल बा. एकर मुख्य वजह बा, उत्तर भारत के तमाम मातृभाषा सबके जगह खुद के सरकारी स्तर पर मातृभाषा घोषित कइल आ सउँसे उत्तर भारत के जबरन हिन्दी पट्टी बतावल. अइसन करके सरकारी नौकरशाह, अधिकारी, पदाधिकारी सहित हिंदी के तथाकथित हिमायती विद्वान लोग के बयान बिरोध के बिद्रोह में बदले खातिर आग में घीव के काम कर रहल बा से अलग आ अँगरेजी आम जन से दूर होत दुरूह, बेलस-नीरस घनघोर तत्समी हिन्दी के वजह से मध्य वर्ग में अपना ओर खींचत रही. भारतीय भाषा भाषी जन का मातृभाषाई अस्मिताबोध के तहस नहस करत रही.

जब हिन्दिये के समृद्ध करे खातिर आठवीं अनुसूची में आउर भारतीय भाषा के डाले के बेवस्था कइल गइल, फेर ओहू में हिन्दी आ उर्दू डाले के का तुक रहे. शुरू में तेरहेगो भाषा आठवीं अनुसूची में डलाइल रहे. अंत में तुष्टीकरण के नीति के तहत नेहरू जी ओकरा में उर्दू में दर्ज करवलें.

अब तक के अध्ययन के अनुसार आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषा सबमें संस्कृत आ तमिल के छोड़ के कवनो भाषा के साहित्यिक बिकास एगारहवीं-बारहवीं सदी के पहिले नजर नइखे आवत.
(बाकी आगे आई.)

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