भोजपुरी संगम के 75वीं बइठकी

BhojSangam75
“आजु सत्तन जी हम्मन के बीच नइखीं, आ अपने उहाँ के 75 ले नाइ पंहुचि पवलीं, बाकिर आजु उनके लगावल पेड़ फरत-फुलात बा. आजु हीरक जयन्ती ले पंहुचि गइल बा.” – ई बात गोरखपुर के “भोजपुरी संगम” के 75वीं बइठक के अध्यक्षता करत आरडीएन श्रीवास्तव जी अपना अध्यक्षीय संबोधन में कहनी.

भोजपुरी संगम के संस्थापक सदस्य स्वर्गीय सत्यनारायण मिश्र ‘सत्तन’ जी का घरे गोरखपुर के खरैया पोखरा पर बोलावल एह बइठकी के शुरूआत अरविन्द ‘अकेला’ के सरस्वती वंदना से भइल. एकरी बाद नीलकमल गुप्त ‘विक्षिप्त’ भोजपुरिये प रचल आपन कविता सुनवलीं. फेर बात के बेंवत देखावत अखिलेश शर्मा ‘नन्द’ के कविता – लाठी के मारल घाव सूखे, पर बाति के मारल नाहीं झुराला – सुना के सभकर मन फरहर क दिहनी. कुंवर प्रताप गुप्त के रचल – नेहवा के डोरी टूटि गइल बा – एही क्रम के आगा बढ़वलसि. रामसमुझ ‘सांवरा’ उपरवाला के महत्ता बतावत रचना सुनवलीं त सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ “बिदेसिया” क धुन पर लय में पगावल कविता – चिहुँकेला मन, उड़े निनिया सपन बनि – से माहौल में उर्जा भर दिहलीं. चन्देश्वर ‘परवाना’ के कविता – बदलल जमाना, बदल गइल भाव – सभे सराहल.

बइठकि में भागीदारी करत राजेश राज बेटियन से जुड़ल रचना – फूलवा मतिन एगो बेटी हमार बिया – सुनवलीं त केएन आजाद के कविता – जबले माई के बिखरल सनेहिया रही, तबले खालत हमार लरिकईयां रही – मदर्स डे से जुड़ल रहल. हरिवंश शुक्ल ‘हरीश’ गँवई शब्द चित्र उकेरत रचना – हमरा गँउवा के ओरिया त आईं कबो – सुनवलीं. भोजपुरी के पुरनिया रचनाकार सूर्यदेव पाठक ‘पराग’ के निठाह व्यंग रचना – कलम आजु ओनकर जय बोल – का बाद डा. कुमार नवनीत आपन रचना – अँखियन के पानी सूखि गइल बा – सुना के माहौल के गंभीर बना दिहलन.

बइठकि के अध्यक्षता करत आरडीएन श्रीवास्तव जी आपन व्यंग रचना – अंत्योदय – से सिस्टम पर कटाह बाति कहनी. बइठकि के संचालन धर्मेन्द्र त्रिपाठी कइलीं आ आभार ज्ञापन के जिम्मा बइठकि के संयोजक कुमार अभिनीत सम्हरलीं. एह बइठकि में खास भागीदारी रविन्द्र मोहन त्रिपाठी, केशव पाठक सृजन, आ विनोद गोरखपुरीओ के रहल.

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