भोजपुरी संगम, गोरखपुर के 121वीं ‘बइठकी’

  • कुमार अभिनीत

‘भोजपुरी संगम’ के 121वीं ‘बइठकी’ अतवार का दिने गोरखपुर में तुर्कमानपुर का लगे साहित्यकार डॉ. रवीन्द्र श्रीवास्तव ‘जुगानी’ जी के घरे भइल.

एह ‘बइठकी’ के पहिलका दौर में डॉ. फूलचन्द प्रसाद गुप्त आपन लिखल भोजपुरी कहानी पाठ कइनी.

एह कहानी के समीक्षा करत प्रो. आर डी राय कहलें कि एह कहानी में मनोविज्ञान अउर कल्पना का साथ ही हालिया यथार्थ के बढ़िया तरीका से समाहित कइल गइल बा.

आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण के कहना रहल कि कहानी बहुते नीमन लिखाइल बा.

डॉ. रवीन्द्र श्रीवास्तव ‘जुगानी’ कहलें कि बढ़िया कहानी के अंत कब्बो नाई होला. आ पढ़वइया कल्पना में अपने आपके ओही कहानी में खोजेला.

बइठकी के अध्यक्षता करत डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी टीपनी कि ई कहानी समाज के विसंगति पर आधारित एगो सुखान्त कहानी बा आ कहनी कि यथार्थ लिखले के जरुरत बा.

बइठकी के दुसरका दौर कवितई क रहल. एह दौर के शुरुआत वागेश्वरी मिश्र वागी सरस्वती वन्दना से कइलन. फगुआ का दू दिन पहिले भइल एह बइठकी में अधिकतर कविता फगुए पर केन्द्रित रहली सँ. एह दौर में नरसिंह बहादुर चंद, डॉ. बहार गोरखपुरी, भीम प्रसाद प्रजापति, सृजन गोरखपुरी, अजय अनजान, नर्वदेश्वर सिंह, शंभू नारायण, रामनरेश शर्मा शिक्षक, इम्तियाज लक्ष्मीपुरी, सुधीर कुमार मिश्र, रामसमुझ साँवरा, डॉ. फूलचन्द प्रसाद गुप्त, डॉ. रवीन्द्र श्रीवास्तव ‘जुगानी’, नंदकिशोर त्रिपाठी आउर नीलकमल गुप्त विक्षिप्त अपना कवितन के पाठ कइलें.

कार्यक्रम के संचालन नंदकिशोर त्रिपाठी कइलें.