पिछला अतवार का दिने बनारस में भइल विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रांतीय अधिवेशन के संबोधित करत कांग्रेसी सांसद जगदम्बिका पाल भरोसा दिअवलन कि संसद के अगिला सत्र में भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे के मुद्दा उठावल जाई. विभोस के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव अरुणेश नीरन के कहना रहे कि देश में भाषा का सवाल पर राजनीति हो रहल बा. जम्मू काश्मीर के भाषा त शामिल हो जात बा बाकरि एकइस देश में बोलल जाये वाली भाषा भोजपुरी के ओकर वाजिब हक देबे में आनाकानी हो रहल बा. प्रदेश में दोसरा भाषा के अकादमी त स्थापित कर दिहल गइल बा बाकिर भोजपुरी के अकादमी गठन करे का दिसाईं कुछ नइखे होत.

एह सम्मेलन में विभोस के प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कइल गइल जवना में डा॰ अशोक सिंह के अध्यक्ष, डा॰ योगेन्द्र सिंह के सचिव, डा॰ अशोक सोनकर के संयुक्त सचिव, आ अपूर्व नारायण तिवारी के पीआरओ बनावल गइल बा. लखनऊ के मनोज श्रीवास्तव, आगरा के शंभूनाथ चौबे, आ गोरखपुर के डा॰ विमलेश के उपाध्यक्ष बनावल गइल बा. चंदौली के राकेश सिंह के कोषाध्यक्ष आ धर्मेंद्र सिंह के मीडिया प्रभारी बनावल गइल बा.

एह अवसर पर भोजपुरी के सेवा में लागल कुछ लोग के सम्मानितो कइल गइल. दिल्ली के अजीत दुबे के डा॰ राजेन्द्र प्रसाद सम्मान, उमाशंकर सिंह आचार्य के राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त सम्मान, डा॰ सत्यदेव सिंह के सीताराम चतुर्वेदी सम्मान, आरके चौधरी के बाबू जगजीवन राम सम्मान, मनोज भावुक के राही मासूम रजा सम्मान, विजय सिंह के एस अतिबल सम्मान, जगदीश नारायण उपाध्याय के जयप्रकाश नारायण सम्मान, सुचरिता गुप्त के पं॰ किसन महाराज सम्मान, आ मोतीलाल गुप्ता के गोकुल चंद्र गांगुली सम्मान दिहल गइल.

एह मौके पर मनोज भावुक के कहना रहे कि भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर जरुरी राजनीतिक इच्छाशक्ति के कमी बा. साथही भोजपुरियन में अपना भाषा के लेके हीनभावना एकरा राह में बाधा बन जाले. लेकिन हालात बदलत बा, लोग के विचार बदल रहल बा आ लोग अब अपना भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे ला कवनो हद तक जाये के तइयार बा काहे कि ई हमनी के अस्मिता के सवाल बन गइल बा. कहलन कि भोजपुरी अब पैशन आ फैशन दुनो बन गइल बिया. इंटरनेटो पर भोजपुरी के बहुते संस्था बाड़ी सँ. विदेश से लोग भोजपुरी में चैट करत बा आ ई कुल्हि भोजपुरी बदे शुभ संकेत बा.


(स्रोत : सूचना माध्यम)

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