– आरपी श्रीवास्तव

छत्तीसगढ़ में नक्सली आंदोलन का खिलाफ सरकार के बनावल संगठन ‘एसपीओ’ अउर ‘सलवा जुडूम’ पर सुप्रीम कोर्ट के डंडा पिछलके महीना चलल रहे. संगठन के असंवैधानिक बतावत अपना सख्त आदेश में सुप्रीम कोर्ट कहले रहल कि राज्य सरकार अइसना संगठनन से हथियार वापस ले लेव. एह फरमान का बाद राज्य में नक्सलियन से लोहा लेत ‘एसपीओ’ के लगभग 6 हजार आदिवासी निहत्था होखे वाला बाड़े, आ ई रमन सिंह सरकार खातिर कवनो चुनौती से कम नइखे. बतावत चलीं कि छत्तीसगढ़ में एने हाल का दिनन में जवना तरह नक्सली गतिविधियन में इजाफा भइल बा, ओहसे राज्ये सरकार ना, केंद्रो सरकार चिंतित बिया.

5 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट कहले रहल कि माओवादियन का खिलाफ लड़ाई में ‘एसपीओ’ अउर ‘सलवा जुडूम’ के रूप में आदिवासियन के इस्तेमाल रोके के पड़ी, काहे कि एसपीओ के रूप में लगभग बिन सिखावल आ अलायक आदिवासियन के इस्तेमाल सरकार के नैतिक आ संवैधानिक जनादेश का खिलाफ बा. दरअसल, अनेके मानवाधिकार संगठन एसपीओ के विरोध कइले रहले आ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिको दायर कइले रहले जवना पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला दिहल गइल. समूचा नक्सल प्रभावित इलाका 40 हजार वर्ग मीटर में पसरल बा जवना में दंतेवाड़ा, वीजापुर, नारायणपुर, कांकेर अउर बस्तर इलाका खास तौर पर शामिल बाड़े. एह इलाका में नक्सलियन आ पुलिस के मुठभेड़ आए दिन होते रहेले. अब ले सैकड़ों पुलिसकर्मी हताहत भइल बाड़े. कुछ नक्सलीओ पुलिस आ अद्धसैनिक बल के गोलियन के निशाना बनल बाड़े. दिनों-दिन बढ़त नक्सली खौफ आ आंदोलन के खतमे करे ला आपरेशन ग्रीनहंट के तहत ‘एसपीओ’ के गठन राज्य सरकार कइले रहल, लेकिन ओकरा बाद नक्सली गतिविधि कम होखे का बजाय बढ़िये गइल बा.

दरअसल, राज्य सरकार के एह फैसला से अनपढ़ नवहियन का कान्ह पर बंदूक लाद दिहल गइल बा. एहसे आदिवासी दू धड़ा में बंटा गइल बाड़े. नतीजतन गोलियन के तड़तड़ाट अउरो बढ़ गइल. सरकार आ नक्सलियन का बीच के एह टकराव से सबले बेसी प्रभावित आदिवासीए भइल बाड़े. जल, जंगल अउर जमीन पर आपन हक मांगे वाला आदिवासी अब दोराहा पर खाड़ बाड़े. एक तरफ नक्सली बाड़े त दोसरा ओर सरकार. आ समस्या जस के तस बाड़ी सँ. जाहिर बा कि अइसना में सुप्रीम कोर्ट के फैसला रमन सिंह सरकार खातिर कवनो मुश्किल आ झटका से कम नइखे.

पिछला दिने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सांसद सरोज पाण्डेय नक्सलवाद का मसला पर ‘वाद नहीं संवाद’ कार्यक्रम आयोजित कइले रही जवना में मुख्य वक्ता रहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली, लेकिन संसदीय कार्यवाही का ऊ आ ना पवले. उनुका जगहा रविशंकर प्रसाद शामिल भइले. रविशंकर प्रसाद एसपीओ पर सुप्रीम कोर्ट के कड़ुआ टिप्पणी वाला आदेश पर कड़ा प्रतिक्रिया दिहले आ एह फैसला के मार्क्सवादी विचारधारा से प्रेरित बतवले. ऊ साफ-साफ इहो कहले कि देश के सुरक्षा तय कइल संसद के काम ह, न्यायपालिका के ना. राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह नक्सली समर्थकन पर तंज कसत कहले कि दाढ़ी बढ़वले, कान्हि पर झोरा लटकवले आ दिल्ली में रहिके बड़-बड़ बात करे वाला लोगन के ई समुझे लेबे के चाहीं कि जब चारू मजूमदार आ कानू सान्याल जइसन माओवादी विचारको नक्सलियन पर अपना राह से बहकला आ लूट मचावे के आरोप लगावत अपना के अलग कर लिहले रहले त ई लोग अब कवना विचारधारा के बात करऽता. कहले कि नक्सलियन के पैरवी करे वालन के डीएनए टेस्ट करावे के चाहीं. ऊ एही बात पर चकित रहले कि नक्सली समर्थक बुद्धिजीवी कहाये वाला एगो समूह रायपुर से दिल्ली ले ई कहत बा कि स्कूलन में सुरक्षाकर्मियन के टिकावल गलत बा काहे कि पढ़ाई बाधित होत बा, लेकिन ऊ लोग ई सवाल ना उठावे कि अबही ले 107 स्कूल भवन के बम से उड़ाके नक्सली कवन पढ़ाई पढ़ावत बाड़े. कहलन कि 96 गो सड़क, 69 गो बिजली टावर आ 79 गो पंचायत भवन उड़ावे वाला नक्सलियन से सवाल काहे नइखे कइल जात ? आम आदिवासियन के जान लेबे वाला नक्सलियन के काहे मानवाधिकार के कठघरा में नइखे खड़ा कइल जात ? रविशंकर प्रसाद कहले कि नक्सली विकास विरोधी हउवे आ बंदूक का बल पर सत्ता हथियावे के सपना पोसले बाड़ै जवना कहियो पूरा ना होई.

राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह कहले राज्य सरकार अब छत्तीसगढ़ सहायक सेना में 6,000 से अधिका आदिवासियन के कांस्टेबल बनाई. इनका के नक्सलियन का साथे एगो लमहर लड़अई खातिर तइयार करे के बा. सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसला पर समीक्षा याचिका दायर करी. रमन सरकार के कहना बा कि निहत्था बना दिहल एसपीओअन के परिवारन के रक्षा के करी. पहिलही ऊ लोग अपना परिवार के सदस्यन के मौत देख चुकल बा. अब एह नया बल में एक समान बेहतर वेतनमान आ बीमा का साथे एह एसपीओअन के गरिमा पूर्ण जीवन जीए के अवसर मिली. रमन सिहं के तर्क रहल कि कबो एके गो वीरप्पन रहल, जवन 12 साल गिरफ्तारी से बाचत रहल, लेकिन छत्तीसगढ़ में फिलहाल हजारों वीरप्पन खतरनाक हथियार से लैस लुकाइल बाड़े. एहसे केन्द्र सरकार नक्सलवाद से निपटे खातिर राज्य के हथियारन आ बम पहचान वगैरह प्रौद्योगिकी के आधुनिकीकरण खातिर 125 करोड़ रुपिया के पैकेज देव.

छत्तीसगढ़ सरकार के सहायक सेना के गठन आ ओहमें 6 हजार एसपीओ जवानन के कांस्टेबल बनावे के फैसला से ‘एसपीओ’ के जवान राहत महसूस करत बाड़े, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से जवन बात सामने आइल बा, ओकरा सामने राज्य सरकार के ई निर्णय कतना न्यायोचित आ संवैधानिक होखी, फिलहाल ई बहस के मुद्दा बा. फिलहाल यदि राज्य सरकार 6 हजार जवान के पुलिस में बहाली करत बिया त एकर सीधा असर राज्य के बेरोजगार युवकन पर पड़ी. बाकिर जहाँ ले नक्सलवाद से निपटे के सवाल बा, त ओहमें टकराव के आसार अधिका लउकत बा. ‘वाद नहीं संवाद’ परिचर्चा में संवाद कम वाद के संभावना बेसी बा जवना के राजनीतिक दलन के गंभीरता से लेबे के होई.


आर पी श्रीवास्तव पिछला बीस साल से “पंचायत पोस्ट” के संपादक हईं आ अब राष्ट्रीय साप्ताहिक अखबार “हमवतन” के संपादक.

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