एगो जायज सवाल उठावल जात बा कि आखिर जिन्ना के मुंबई बंगला भारत सरकार उनका के, भा बाद में उनुका वारिसन के काहे ना लवटवलसि ? का एह चलते कि भारत के बँटवारा का बाद जिन्ना भारत के घोषित दुश्मन हो गइल रहले आ उनकर संपत्ति दुश्मन के संपत्ति मान के जब्त कर लिहल गइल. बाकिर अगर ई जबाब सही बा त दोसर सवाल उठत बा कि ओही जिन्ना के खासमखास रहल महमूदाबाद के राजा आमिर अली खान के संपत्ती उनुका बेटा मोहम्मद आमिर मोहम्मद खान उर्फ सुलेमान खान उर्फ सुलेमान मियाँ के कइसे वापिस मिल गइल ? का एह चलते कि सुलेमान के मुकदमा भारत सरकार के एगो मंत्री लड़ले जे अपने सरकार का फैसला का खिलाफ लड़ले आ मुस्लिम सांसदन का दबाव में भारत के बँटवारा करवावे में शामिल महमूदाबाद के राजा के वारिसन के इनाम दे दिहल गइल.

एही सवाल पर केन्द्रित बा हालही में प्रकाशित एगो किताब जवना के हिन्दी आ अंगरेजी में प्रकाशित कइल गइल बा. लेखक हउवें दि संडे इंडियन के हिन्दी आ भोजपुरी संस्करण के प्रबंध सपादक ओंकारेश्वर पाण्डेय आ वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन शर्मा. हिन्दी किताब के शीर्षक बा “शत्रु संपत्ति और राष्ट्रीय हित”. प्रकाशक हउवें इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन.

सुलेमान मियाँ का पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसला साल २००५ में आइल रहे जवना का बाद देश में शत्रु संपत्ति के लेके एगो नया विवाद शुरु हो गइल. एगो आदमी एक तिहाई आगरा शहर पर जवना में ताजोमहल शामिल बा आपन दावा सुप्रीम कोर्ट में दायर कइले बा. आ अइसने पता ना कतना दावा दाखिल भइल बा. पहिले त भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के एह फैसला के असंगत मनलसि आ एह फैसला पर रोक खातिर जुलाई २०१० में शत्रु संपत्ति अधिनियम संशोधन विधेयक ले आइल. एह विधेयक के मूल भावना साल १९६८ से लागू शत्रु संपत्ति अधिनियम कानून का अनुरुप रहे. बाकिर बाद में ओह अधिनियम के जब मुसलमान सांसद, सपा, राजद, लोजपा आ वामदल विरोध कइले त सरकार यूटर्न ले लिहलसि आ अब एगो नया अधिनियम पेश कइल गइल बा शीतकालीन सत्र में जवन कि पूरा तरह मुस्लिम सांसदन के माँग का मुताबिक बनावल गइल बा आ जवना से राष्ट्र विरोधी ताकत अउरी मजबूत होखीहें.

जब कवनो आदमी अपराध कर के भाग जाला त ऊ कानून का नजर में भगोड़ा होखेला आ ओकर संपत्ति जब्त कर लिहल जाला. पूरा दुनिया में एह तरह के कानून बाड़ी सँ. पाकिस्तान खुद अरबो रुपिया के अइसने संपत्ति जब्त कर के बेच दिहलसि, बांगलादेश भारत गइल आप्रवासियन के संपत्ति जब्त कर लिहलसि. बाकिर संसद के स्थायि समिति का लगे विचाराधीन पड़ल एह विधेयक पर चरचा होखल जरुरी बा. प्रस्तुत किताब में अइसने सवालन के जबाब दिहल गइल बा कि आखिर का बावे संसद में प्रस्तुत द्वितीय शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 ? का बावे मौजूदा शत्रु संपत्ति संबंधी कानून ? का होखी बदलाव के असर ? दुनिया के दोसरा देशन में शत्रु संपत्ति संबंधी कानून में का बा ? का हो रहल बा परदा का पाछे का राजनीति में ? के फायदा में रही ? केकर नुकसान होखी ? द्वितीय शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं पुनर्पुष्टिकरण) विधेयक 2010 के निमन बाउर जाने खातिर एह किताब के पढ़ल बहुते जरुरी बा.


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