टाइम्स आफ इंडिया पर अपना ब्लॉग में एम जे अकबर एह सवाल के उठावत लिखले बाड़न कि ठीक बा कि एगो पेड़ जंगल ना बनावे बाकिर जब कवनो सैद्धान्तिक चिरई झाड़ी से झाँके त पता लगावल जरूरी हो जाला कि मौसम बदले वाला बा का. आ ई चिरई त भगवा रंगाइलो नइखे. तीसेक साल पहिले जब सैयद शहाबुद्दीन विदेश सेवा के आपन शानदार नौकरी छोड़ के राजनीति में उतरल रहलें त ऊ इस्लामिक हरियर रंग में रंगाइल रहलें. रंग अबहियों बदलल नइखे से जब ऊ आजु के मुसलमान राजनेतन के नफरत के निशान पर रहत नरेन्द्र मोदी के चिट्ठी लिखलें त ई खबर बावे.

अकबर साहेब आगा लिखत बाड़न कि एहू ले खास बात कि शहाबुद्दीन के खंडन लेटरहेड ले के आइल चिट्ठी में लिखल बात खातिर ना. इहे चरचा करत आगे बतवले बाड़न कि आज मुसलमान नरेन्द्र मोदी के माफ करे ला तइयार बाड़े बशर्ते मोदी अपना गलती ला माफी माँग लेसु, भुक्तभोगियन के मुआविजा मिल जाव आ अपराधियन के सजा.

एम जे अकबर के कहना बा कि जब मुसलमानन के प्रतिनिधि राजनेता होखे क दावा करे वाला मनई एह तरह के चिट्ठी लिखे त साफ हो जात बा कि आजु मुसलमान माने लागल बाड़न कि नरेन्द्र मोदी ओह लोग का तरफ अंगुरी ना हाथ बढ़ावत बाड़न. आ दोसर ई कि अब मुसमलमान मानस माने लागल बा कि नरेन्द्र मोदी से बातचीत कइल जा सकेला. अकबर साहेब का नजर में नरेन्द्र मोदी में तीन गो खासियत बा. पहिला ई कि ऊ निर्णायक शासक बनके उभरल बाड़न जवन आजु के भारतीय मानस पसन्द करत बा. अकबर का नजर में अगर आजु इदिरा गाँधी रहती त चुनाव में उनुका चार सौ से कम सीट ना मिलीत. दुसरका ई कि अनेके उद्योगपतियन से करीबी मेलजोल रखला का बावजूद मोदी पर भठियरपन के कवनो अछरंग नइखे लागल आ तिसरे ई कि देश के नवहियन के लागत बा कि मोदी ओह लोग के रोजगार दिआ दीहें.

बाकिर अकबर साहब सवालो उठावत बाड़न कि मुसलमान त मनमोहन सिंह के सरकार बनववलें फेर मोदी से उमेद काहे? का एहसे कि आठ साल इंतजार का बादो मुसलमानन के छूंछ वादा छोड़ के कुछ नइखे भेंटाइल? जबकि गुजरात के पुलिस थाना में कवनो राज्य से बेसी मुसलमान सिपाही बहाल बाड़े. एहसे मुसलमान मानस में भरोसा जागल बा.

फेर शहाबुद्दीन के चिट्ठी के चरचा करत एम जे अकबर सवाल उठवले बाड़न कि गुजरात दंगा ला मोदी से माफी माँगे के उमेद काहे जब साल चौरासी के सिक्ख विरोधी दंगा के दोषियन के कांग्रेस में बड़हन बाव मिलल बा. दोसरा तरफ गुजरात में अनेके दंगा अपराधियन के सजा मिल चुकल बा. ओने दिल्ली पुलिस आजु ले एकहू अपराधी के सजा ना दिआ पवलसि. एकरा बावजूद सिक्ख ओह दौर से आगे बढ़ चलल बाड़न त मुसलमानो काहे नइखन बढ़ चलत? बिति ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेहु.

अंत में एम जे अकबर के लागत बा कि मौसम में बदलाव आइले चाहत बा. मोदी के डेग के उछाहो इहे बतावत बा. हालांकि मुसलमानस के भावना में मोदी के अबही अउरी बदलाव के इंतजार करे पड़ी.

पूरा लेख एहिजा पढ़ीं एम जे अकबर के ब्लॉग

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