मोदी के माया : ना घाम ना छाया

– ओमप्रकाश सिंह

लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन में घुसे का पहिले सीढ़ियन पर माथा टेकत नरेन्द्र मोदी
लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन में घुसे का पहिले सीढ़ियन पर माथा टेकत नरेन्द्र मोदी

मोदी राज के 100 दिन बीतल चाहत बा आ देश के लोग परेशान बा समुझे में कि आखिर मोदी राज से मिलल का, आइल का? मोदी के माया अइसन बा कि ना कहीं घाम लउकत बा ना छाँह. छाँह खोजे वाला लोग परेशान बा कि कतहीं छाँह लउकत नइखे त घाम से डेराइल लोग निश्चिंत लउकत बा कि घाम नइखे आवे वाला आ ओह लोग के मजा वइसहीं बनल रही जइसन आजादी का दिन से आजु ले बनल रहल बा.

मोदी के समर्थकन के बुझात नइखे कि काहे अबहियों कांग्रेसी भँड़ैती करे वाला पोसुआ पत्रकार ओही तरह कूकूरबझाँव करे में लागल बाड़ें, काहे कांग्रेसी राज में मजा मारे वाला अफसरान आजुओ ले अपना कुरसी पर बदस्तूर बइठल बाड़ें?

मोदी के विरोधियन के लागत बा कि मोदी के थाहे नइखे लागत सरकार के राज के आ कुछू कर नइखन पावत. कांग्रेसियन के त दावा बा कि मोदी कांग्रेसे के योजना चलावत बाड़न ओही राहे जात बाड़न जवना राहे यूपीए सरकार चलत रहुवे. बाकिर संगही संगही इहो कहत बाड़न कि कवनो काम सही तरीका से नइखन कर पावत.

कांग्रेस का राज में बहाल राजनीतिक राज्यपालन के हटे में अतना समय लाग गइले. शरीफ आदमी इशारा समुझ लेलें बाकिर एहनी के कवनो इशारा समुझ में ना आ पावल आ आखिर में तब इस्तीफा दिहले जब लागल कि अब ढेर दिन ले अनदेखी ना कइल जा सकेला इशारन के.

हिन्दू विरोधी मीडिया खास कर के कुछ टीवी चैनल आ एंकर आजुओ बदस्तूर आपन मोदी विरोध जारी रखले बाड़न जइसे कि लागे कि मोदी के टिके ना दी लोग.

एह माहौल में बहुते मोदी समर्थक अनसाए लागल बाड़े. उनका धीरज नइखे, उनकर मनसा बा कि मोदी खुल के आपन खेल खेलल शुरू क देसु. बाकिर मोदी जे बाड़न कि ओह काम में अझुराइल बाड़न जवना खातिर हमरा उर्दू के एगो शेर याद आवत बा –
कल मिला वक्त तो जुल्फें तेरी सुलझा लूंगा,
आज उलझा हूँ जरा वक्त को सुलझाने में.

ओह दिन स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला से बोलत खुद मोदी के कहना रहल कि अबहीं ले उ एहिजा ला बाहरी आदमी बाड़न. उनुका समय लागत बा माहौल देखे आ समुझे मेंं. बाकिर मोदी जइसन तेज तर्रार राजनेता आराम से नइखन बइठल. सरकार के कीलकाँटा दुरुस्त करे में लागल बाड़न. एह दौरान मोदी के सफलता मंत्रियन आ अफसरान के काबू करे में लउके लागल बा. योजना आयोग के खतम करे के एलान क चुकल मोदी गँवे-गँवे आपन योजना लागू करे में लागल बाड़न. धीरे धीरे पिछला सरकार का समय सत्ता के चाभियन पर काबिज हो गइल लोग जगह खाली करे लागल बा. सांप्रदायिकता के मुद्दा उठावेवालन के मोदी के जवाब अइसन अंदाज में मिलल कि उनुका कुछ देर ला बुझाइबे ना कइल कि आखिर ई का हो गइल? ई कइसे भइल कि संसद में खड़ा हो के कवनो हिन्दुत्ववादी सेकूलरिज्म के चिथड़ा क दिहलसि? उ बात कह दिहलसि जवना के कहे के हिम्मत कबो कवनो नेता में ना होत रहे. अबहीं हाल में यूपी में देखे के मिलल कि जेकरा खिलाफ सेकूलर मीडिया सबले अधिका हाँव-हाँव कइले ओकरा के यूपी में होखेवाला उपचुनावन ला स्टार प्रचारक बना दिहल गइल. चरचा त इहाँ ले बा कि योगी आदित्यनाथ के यूपी के अगिला मुख्यमंत्री घोषित क दिहल जाव. दोसरा तरफ सपा के दिमाग में अतना घुस गइल लउकत बा कि उ अब आजम के अपना प्रचार में ना लगाई. आजम खान जइसन नेता के ठिकाना लागल अतना सहज ना रहल कबो. बिहार के महागठबन्हनो के आपन गलती बुझा गइल होखी जब उ देखले होखीहं कि भाजपा उ दू गो सीट आसानी से जीत लिहलसि जहवाँ ई महागठबन्हन मुसलमान उमीदवार दिहले रहुवे. सब काम कह के ना कइल जाव. बहुते काम एह तरह के करे के पड़ेला कि कुछ कहला बिना काम बन जाव.

देश में हिन्दुत्ववादी कबो सभका निशाना प रहत रहलें. बाकिर मोदी सरकार के अइला का बाद निशाना भोथराइल शुरु हो गइल बा. कांग्रेस के मालूम बा कि हिन्दुत्ववादी अब अइसन एकजुट हो गइल बाड़न कि वोट बैंक पालिटिक्स से काम नइखे चलेवाला अब. बाकिर चोर चोरी से जाए तुम्बाफेरी से ना जा सके. से एगो पुरान कांग्रेसी चम्मच, जे संयोग से शंकराचार्य के पद पर बइठल बाड़न, हिन्दूवन के तूड़े-बाँटे में लाग गइल बाड़न. हिन्दू धर्म पर उ सनातनी संप्रदाय के हावी कइल चाहत बाड़न. कुछ लोग जाने-अनजाने बहकल शुरु होइओ गइल बा. असल में हिन्दू धर्म ह कि संप्रदाय एही गुत्थी के बहुते लोग समुझ ना पावे आ लाग जाला हिन्दू के रिलीजन, मजहब, संप्रदाय बतावे में. जबकि हिन्दू एगो जीवन शैली ह जहाँ हर आदमी के ई आजादी बा कि उ केकर पूजा करो, केकरा के भगवान मानो, कवना किताब के आपन ग्रन्थ मानो. हिन्दू त पत्थरो के भगवान मान के पूजत आइल बाड़े, गाछो बिरीछ ओह लोग ला ब्रह्मस्थान हो जाला. बाकिर अब एगो शंकराचार्य लोग के मजबूर करे चाहत बाड़न कि लोग केकर पूजा करो, कवना तरीका से करो, केकरा के भगवान मानी केकरा के ना. अब उनका के केहू कइसे समुझावो कि बहुते हिन्दूवन के सनातन व्यवस्था में कवनो श्रद्धा नइखे.

बाकिर मोदी एह सब से अलग आपन राह बनावे में लागल बाड़े. ‘मेक इन इंडिया’ के नारा देबे वाला मोदी केे सरकार लागल बिया कि बिजनेस आ उद्योग का राह के काँट-कंकड़ जल्दी से साफ कर दिहल जाव. एकरा ला देश के भूमि कानून, श्रम कानून, पर्यावरण मापदंड वगैरह बहुते कुछ में बहुते कुछ बदलाव ले आवे के बा आ एह दिसाईं होखे वाला काम के डुग्गी पीटत ना कइल जा सके. जब ई हो जाई तब उद्योग आ व्यापार के नेवता देबे के जरूरत ना पड़ी. लोग खुद ब खुद आवे लागी एहिजा आपन कारखाना लगावे बनावे. आ एह बदलाव के सौ दिन में ना नापल जा सके. जेकरा लमहर सफर करे के बा उ हर चट्टी चौराहा पर ना रुकल करे.

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