राजनीति के बिसात प छठी मइया

Ashutosh Kumar Singh

– आशुतोष कुमार सिंह

बिहार के सबसे बड़ सांस्कृतिक पर्व छठ के विस्तार बहुत तेजी से सगरो नगर-महानगरन में हो रहल बा. मुंबई, दिल्ली अउर कोलकाता के साथे-साथे छठ मनावे वालन के ठीक-ठाक तादाद दक्षिण के राज्यो में देखे के मिल रहल बा. अतने ना पूर्वोत्तर के राज्यो एकरा प्रभाव से अछूता नइखन.

देश के बड़ शहरन में जइसे-जइसे छठ मनावे वालन के संख्या बढ़ रहल बा, ओइसे-ओइसे एह संख्या प राजनीति करे वालन के संख्यो में इजाफा होत जा रहल बा. राम नरेश मिश्रा के परिवार दिल्ली के के जैतपुर गांव में पिछला 20 बरिस से रहत आ रहल बा. उनकर कहनाम बा कि, ऊ लोग एहिजा जब आइल तब छठ करे वालन के संख्या बहुते कम रहे. बाकिर अब छठ व्रतियन के संख्या बढ़के कई हजार हो गइल बा. बदरपुर के रहे वाला डॉ. रजा हैदर के कहनाम बा कि छठ के प्रभाव देखे के बा त रउआ एहिजा के दीवारन प छठ के शुभकामना संदेश से भरल पोस्टर प गौर फरमाईं. दिल्ली के सब पार्टी के स्थानीय नेता आपन मतदाता सब के लोभावे खातिर बड़-बड़ होर्डिंग्स अउर बैनर प शुभकामना संदेश देवे में जुट गइल बाडऩ. शायद इहे कारण बा कि आली गांव में बैनर बनावे के काम करे वाला असलम खां के एह घड़ी बैनर प शुभकामना संदेश लिखला से फुर्सत नइखे. असलम खां के कहनाम बा कि, अक्टूबर-नवंबर महीना में उनकर कमाई कई गुना बढ़ जाला काहे कि एह महीना सब में दशहरा, दीपावली अउर छठ के पर्व मनावल जाला अउर छोट-बड़ सब नेता एह मौका प आपन क्षेत्रवासियन के बधाई देवे से चूके के ना चाहेलन.
एह शुभकामना संदेशन के निहितार्थ के समझावत पुरबिया नेता पी एन. सिंह बतवलन कि शहर में जइसे-जइसे पूर्वांचल के लोगन के संख्या बढ़ रहल बा अउर वोट प्रतिशत बढ रहल बा, ओइसे-ओइसे नेता लोगन के नजरियो में बदलाव आइल बा.
अगर दिल्ली के राजनीतिक भूगोल के बात कइल जाव त दिल्ली के सात गो लोकसभा सीटन में से पूर्वांचली मतदाता चार गो सीट प निर्णायक भूमिका में बाडऩ. कांग्रेस पहिले छठ प छुट्टी घोषित क के आ भोजपुरी-मैथिली-अकादमी के स्थापना क के अउर अब महाबल मिश्र के लोकसभा में भेज के पूर्वांचलवासियन के अपना पक्ष में करे के कोशिश कइले बिया. चुनाव आवते राजनीतिक दल दिल्ली में रहे वालन पूर्वांचल याने बिहार अउर पूर्वी उत्तर प्रदेश के मतदाता सबन के लुभावे में लाग जालन. पिछला कुछ बरिस में जवना तरह से दिल्ली के तस्वीर बदलल बा, ओकरा में पूर्वांचल के लोग वोट बैंक के रूप में एगो बरियार ताकत बन के उभरल बा.
दिल्ली में मतदाता लोगन के संख्या करीब1.10 करोड़ बा. एकरा में से करीब 35 लाख मतदाता पूर्वाचल के बाडऩ. ओइसे त पूर्वांचली लोगन के उपस्थिति दिल्ली के कोना-कोना में बा, बाकिर सात में से चार गो लोकसभा अउर दू दर्जन से जादा विधानसभा सीट प ऊ निर्णायक भूमिका में होखेलन. दिल्ली के पूर्वी, उत्तर पूर्वी, पच्छिमी अउर दक्षिणी दिल्ली के लोकसभा क्षेत्र में पूर्वांचली मतदाता के संख्या 20 से 25 फीसदी के करीब बा. जबकि बाकी तीनों सीटन प पूर्वांचली मतदाता सब के तादाद करीब 10 फीसदी बा.
पूर्वांचल के लोगन के बढ़त ताकते के नतीजा बा कि पुरबियन के सांस्कृतिक पर्व छठ में शरीक होखे खातिर नेता लोगन होड़ लागल रहेला. पिछला विधानसभा चुनाव में भाजपा के सीएम इन वेटिंग विजय कुमार मल्होत्रा पूर्वांचलियन के रिझावे खातिर सूर्य के अर्घ्य देत लउकल रहन. दोसर ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अउर अपना के पूर्वांचल के बेटी कहे वाली शीला दीक्षित छठ घाटन के निरीक्षण करत लउक जाली. पूर्वांचली मतदाता सबन के लोभावे के एही कवायद के नतीजा बा कि बिहार जागरण मंच के ओर से पूर्वी दिल्ली में यमुना के तट प पल्टन पुल भैरो मार्ग प करावल जाए वाला छठ पूजा के आयोजन में दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, एके वालिया, मदन लाल खुराना, महाबल मिश्रा, शत्रुघ्न सिन्हा जइसन नेता-अभिनेता पहुंचत रहल बाडऩ. बिहार जागरण मंच के अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह एह बात से इंकार नइखन करत कि छठ के माध्यम से राजनीतिक लाभ उठावे के भरसक प्रयास होत रहल बा.
अबकी बार छठ पूजा के दौरान भाजपा दिल्ली में रहे वाला पूर्वांचली लोगन के खुश करे खातिर एगो नया कोशिश करे वाला बिया. दिल्ली के अलग-अलग हिस्सन में बनल छठ पूजा के घाटन प भाजपा के कार्यकर्ता आपन बैनर के नीचे लोग के मदद करत अउर चाय पिलावत लउकिहें. प्रदेश अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता के अध्यक्षता में भइल एगो मीटिंग में दिल्ली प्रदेश भाजपा ई तय कइले बा कि अबकी बार पार्टी सब के सब छठ घाट प आपन बैनर के नीचे छठ व्रतियन के सुविधा खातिर टेंट अउर कैंप लगाई. एह बाबत दिल्ली प्रदेश भाजपा के सचिव कुलजीत सिंह चहल बतवलन कि, भाजपा एह बेर छठ व्रतियन के कवनो तरह के असुविधा ना होखे एकर पूरा-पूरा ख्याल राखी. ऊ कांग्रेस प निशाना साधत कहलन कि कांग्रेस के सरकार पुरबियन के फुसलावे खातिर घोषणा त क देवेले बाकिर ओह घोषणा प अमल ना कइल जाला. ना त छठ घाटन के सफाई के ख्याल राखल जाला अउर ना छठ पूजा करे खातिर नदी-तालाब में साफ पानी के कवनो व्यवस्था कइल जाला.
पिछला 50 बरिस से दिल्ली में रह रहल अउर दिल्ली में छठ के क्रमवार विकास के देखे वाला भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे आपन पुरान याद के ताजा करत कहलन कि, ‘‘1956 में हमार परिवार सरोजनी नगर में रहत रहे. ओह घरी हमरा घर के महिला लोग घर के छत प खड़ा होके उगत सूर्य के अर्घ्य देत रहे. 60-70 के दशक में मुहल्ला में एगो गढ्ढा खोदके अउर ओकरा में पानी भर के छठ पूजा होखे लागल. 70-80 के दशक में हमार परिवार पालम के क्षेत्र में आ गइल. ओहिजा डाबरी टेलीफोन एक्सचेंज के पाछे एगो तालाब के किनारे छठ होखे लागल. देखते-देखते हजारों-हजार के संख्या में महिला सब छठ व्रत करे लगली.’’
पुरबियन के तादाद दिल्ली में लगातार बढ़ल बा अउर ओकरा साथे-साथे राजनीतिक भागीदारियो में इजाफा भइल बा. इहे कारण बा कि दिल्ली के सब दल एह वोट बैंक के अपना खातिर सुरक्षित रखे के चाहत बाडऩ. बाकिर राजनीतिक दल एह बात के स्वीकारे में हिचकेलन. दिल्ली में कांग्रेस के पुरबिया चेहरा समझल जाए वाला शिवराम पांडेय के छठ के नाम प कवनो राजनीति के बात नागवार गुजरत बा. उनकर कहनाम बा कि, छठ पूर्वांचल के लोगन के एगो सांस्कृतिक पर्व ह अउर एकरा में सब लोग भाग लेवेला. उनका सुर में सुर मिलावत अउर छठ के नाम प कवनो तरह के राजनीति से इनकार करत दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष जय प्रकाश अग्रवाल बतवलन कि, ‘हमरा क्षेत्र में छठ मनावे वालन के भारी तादाद बा. जवना तरह से हम रामलीला में भाग लेवे जानी ओही तरह छठी मइया के पूजा में भाग लेवेनी. एकरा में राजनीति के कहां बात बा. एगो सामाजिक आदमी होखे के नाते छठ जइसन बड़ आयोजन में भाग लेवे के राजनीतिक फायदा-नुकसान के कसौटी प ना कसे के चाहीं.’
अइसन नइखे कि छठ प राजनीति खाली दिल्ली में देखे के मिलेला. छठ प सबसे जादा कहीं राजनीति होखेला त ऊ बा देश के आर्थिक नगरी मुंबई. दिल्ली के तरह मुबंई में छठ के लेके बहुते जोर-शोर से तइयारी होखेला. संजय निरूपम जब शिवसेना में होत रहन, तबे से ऊ उहां के बिहार के लोगन के एगो सूत्र में बांधे के काम करत रहल बाडऩ. जुहू घाट पर छठ पूजा के भव्यता प्रदान करहूं में संजय निरूपम के अहम योगदान रहल बा. संजय निरूपम अगर आज लोकसभा पहुंचल बाडऩ त ओकरा पाछे ओहिजा रह रहल पुरबिया लोगन के ताकत के बड़ योगदान बा.
मुंबई में पुरबियन के बढ़त ताकत के अंदाजा ओह बेरा लागल जब पुरबिया लोगन के मुंबई से भगावे के मुहिम चला रहल मनसे प्रमुख राज ठाकरे के ई कहे के पड़ल कि ऊ छठ पूजा के खिलाफ नइखन बलुक छठ के नाम प जवन राजनीति हो रहल बा ओकरा खिलाफ बाडऩ.
बेशक छठ के लेकर मुंबई में सबसे जादा राजनीति होखत होखे बाकिर अगर हमनी के कोलकाता के बात करी जा त ओहिजा के माहौल एकदमे अलग बा. पिछला चार दशक से वाम सरकार होखे के कारण एहिजा छठ पूजा राजनीति से बाचल बा. कोलकाता से निकले वाला हिंदी दैनिक सन्मार्ग के संपादक पांडेय हरिराम बतवलन, ‘‘कोलकाता में छठ बड़ पैमाना प मनावल जाला. छठ के दिन उत्सवी माहौल हो जाला बाकिर अबहीं तक एह पर्व प राजनीति के कवनो बात सामने नइखे आइल. हालांकि सरकारी स्तर प छठ व्रतियन के सुविधा खातिर हर संभव प्रयास कइल जात रहल बा.’’ गांधी घाट, बाबू घाट, फेरी घाट और दक्षिणेश्वर घाट पर छठ व्रतियों जन सैलाब देखे लायक होखेला.
बेशक कोलकाता में छठ के लेके राजनीति ना होखत होखे बाकिर ओकरा से सटल पूर्वोत्तर के राज्यन में छठ प राजनीति होखे लागल बा. पूर्वोंत्तर मामलन के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर रवि के कहनाम बा कि, ‘पिछला 10 बरिस में छठ के लेके राजनीति के झलक मिल रहल बा. सबसे पहिले असम गण परिषद् के सरकार प्रफुल्ल महंथ के मुख्यमंत्रित्व काल में छठ के दिन के एच्छिक छुट्टी के घोषणा कइले रहे. एकरा बाद हिंदीभाषियन के झुकाव महंथ सरकार के ओर बढ़ल रहे. एकरा के देखत कांग्रेसो के नेता लोग छठ के दिन घाट प आपन हाजिरी दर्ज करावे लागल. अगर असम के भौगोलिक स्थिति के देखल जाव त बराक घाटी, ब्रह्मपुत्र घाटी अउर पहाड़ी इलाकन में एहिजा के जादातर आबादी रहेला. जवना में बराक घाटी में बिहार अउर पूर्वी उत्तरप्रदेश के लोगन के संख्या बहुसंख्यक बा. एही लोगन के बल प 10 गो हिंदी भाषी विधायक चुनके विधानसभा में पहुंचेलन. अगर पूरा पूर्वोंत्तर के बात कइल जाव त तकरीबन 20 लाख हिंदी भाषी बाडऩ. बाकिर असम के छोड़के बाकी राज्यन में ऊ संख्याबल के मामला में अतना बरियार नइखन. शायद इहे कारण बा कि ओहिजा छठ के नाम प राजनीति के झलक ना के बराबर लउक रहल बा.’
एही तरह दक्षिण के राज्यन में धीरे-धीरे छठ करे वालन के संख्या बढ़ रहल बा. बाकिर ओहिजा छठ के लेके कवनो खास राजनीतिक गहमागहमी नइखे लउकत. बंगलोर में रह रहल रामध्यान प्रसाद के कहनाम बा कि, एहिजा हिंदी प्रदेश के लोगन के संख्या कम होखे के कारण छठ पर्व व्यापक रूप में ना मनावल जाला. खुद उनकर परिवार पिछला पांच बरिस से मुहल्ला में छठ पूजा करत आ रहल बा. बाकिर अब धीरे-धीरे छठ करे वालन के संख्या में इजाफा हो रहल बा.

जवना तरह से छठ जइसन सांस्कृतिक पर्व के राजनीतिक रंग में रंगल जा रहल बा अउर ओकरा के लेके राजनीतिक बिसात पर लाभ-हानि के गणित बइठावल जा रहल बा, ओकरा के देखत अइसन नइखे लागत कि छठ प होखे वाला राजनीति आवे वाला दिन में कम होई.


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