– अजय एन झा

यूपी के चुनावी महाभारत अपना चरम पर बा. कांग्रेस का तरफ से महासचिव राहुल गाँधी खुदे कमान सम्हार लिहले बाड़न आ उनुका हर बाति हर काम पर टीका-टिप्पणी होखत बा. जनता मज़ा लूटत बिया , मीडिया वालन के त चांदी कटत बा. जब उत्तर प्रदेश में अतना सब कुछ होकत बा त खबर सेंके, ताने आ परोसे में कवना बाति के कोताही ? आ भारत में चुनाव वइसहु कवनो पँचसाला जश्न से कम थोड़े होला. बाति जब यूपी के होखे त फेर का कहे क बा ? ओह दिन राहुल बाबा अपना चुनावी सभा में मंच से कागज़ के एगो टुकड़ा का दिहलन, लागल कि पूरा प्रदेश के राजनीति में भूचाल अस आ गइल. एह खबर के अतना नून-तेल लगा के परोसल गइल कि लागल जइसे राहुल बाबा अपने हाथे कांग्रेस के किस्मते फाड़ दिहले.

वइसहु राहुल गाँधी तनियो सा हरकत कर देसु त पूरा विपक्ष लामबंद हो जाला आ फेर हाय तौबा से लगाइत पता ना कवना-कवना नुक्ताचीनी के बाज़ार गरमा जाला. मीडिया वाला चातक त चिरई जस मुंह बवले खाड़ रहेले आ बीचे में सबकुछ लेले. अरे भइया भइल का ? जवान आदमी हउवन. मुलायम सिंह के वादन के फेहरिस्ते नू फड़लन अतने कहि के कि उत्तर प्रदेश के आम आदमी अइसन वादा का लिस्ट से तंग आ गइल बा. आ वइसहु मौलाना मुलायम अकसरे अपना वादा से पलट जाले. ओह दिन सँझुवे से हर चैनल पर उहे रामकहानी दोहरावल गइल आ हर गली-नुक्कड़ो पर लोग-बाग़ एह बाति के चटखारा ले लेके नकल कइलन. अरे भाई. अतना बड़ देश में कवनो अउरियो खबर बा का ? मगर बाति राहुल बाबा के होखे आ ओह पर बवाल ना मचे, ई कइसे हो सकेला. पहिले मुलायम सिंह जी कूद पड़लन आ कहलन कि राहुल अइसन हरकत नासमुझी आ नादानी में करत बाड़े. बाकिर अखिलेश यादव एक डेग अउरी बढ़ गइलन आ कहलन कि आजु परचा फड़लन काल्हु मंचे पर से कूद जइहन !

दोसरा तरफ राजनाथ सिंह एकरा के गैर जिम्मेदाराना हरकत करार देत कहलन कि राहुल देश के राजनीति लायक अबही ले नइखन भइल. बस का रहे. कांग्रेस वाला कइसे चुप रहते. आखिर सवाल राहुल भइया के रहल. देश में अउरी कुछुवो हो जाव कवनो ग़म ना बाकिर राहुल गाँधी का खिलाफ एगो लफ्ज़ सुने के कवनो कांग्रेसी तइयार ना रहे. पहिले बहिन प्रियंका बोलली कि राहुल समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र ना, बलुक एगो कागज फड़ले रहलन. फेर प्रमोद तिवारी जी के बारी रहे. ऊ अपनही अंदाज़ में बयान दे डलले कि सगरी विपक्ष राहुल का नामे से घबराता. राहुल गाँधी अगर कवनो गरीब का घरे चलि जासु त ओह लोग के ई नागवार गुज़रेला. कहलन कि समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र भा पर्चा रद्दिये बरोबर बा आ राहुल जी के चाहत रहे कि ओकरा के कूड़ेदान में फ़ेंक देतन. बीच में राजा दिग्विजय सिंह अलग तान छेड़ दिहलन. पता ना तिसरका दौर का चुनाव से पहिलही ऊ काहे कह दिहलन कि अगर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस हारल त एकरा खातिर ऊ जिम्मेदार होखीहें. अमां राजा साहब, अइसनो जल्दी का रहुवे ? कही अइसन त ना कि उनुका ई बाति मालूम पड़ गइल होखे कि चुनाव परिणाम का बाद राहुल बाबा के सगरी हितैषी उनुकरे गिरेबान पकड़े पर उतारु हो जइहें ?

वइसहु दिग्विजय सिंह क अंदाज़े बयां आ उनुकर साफगोई उनका रकीबो लोग के हमेशा नागवार गुज़रेला. केहु कहेला कि ऊ हमेशा दुधारी तलवार चलावेले. त केहु कहेला कि उनुका अगुवाई में कांग्रेस के हश्र उत्तर प्रदेश में ईहे होखे वाला बा जवन २०१० में पार्टी का साथे बिहार में भइल रहुवे. अगर खबरचियन के मानल जाव त कहल जा सकेला कि अबही ले कांग्रेस खातिर आम कार्यकर्तनो में कवनो खास उत्साह नइखे. ई अलग बाति बा कि अबकि पूरा गाँधी खानदान अपना लाव लश्कर साथे मैदान में उतरल बा अउर ऊ लोग हर हाल में माया के माया नगरी में सेन्ह मारे का मुहिम में बावे. लेकिन सितारन के चाल आ ज़मीनी धुरंधरन के चाल शायद कुछ अलग संकेत देत बावे. यूपी के ज़मीनी हकीकत अबही इहे बतावत बिया कि बसपा के पलड़ा अबहियो भारी बा आ ऊ हर हाल में नाहियो त १६० सीट जीतिये ले जाई. दोसरा तरफ समाजवादीओ पार्टी लगभग बसपा के आस-पास रहे वाली बिया. . कांग्रेसी नेता लोग कतनो गरिया लेव बाकिर सच्चाई ईहे बा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमान मतदाता आजु ओ मुलायम संगे जुड़ल बा आ ओकर फायदा सपा के मिलबे करी. भाजपा पिछला बेर ५० सीट जीतले रहुवे एह बेर ओकर आंकड़ा करीब ७० से ८० का बीचे रहे वाला बा.

अइसना में सभकर निगाह राहुल गाँधी का हर बोल आ हर हरकत पर रही. राहुल गाँधी भलही उत्तर प्रदेश के खेत में ऊँख का तरह पैदा कइल चाहसु, उनुका नीयत भा इरादा में कवनो खोट नइखे. मगर असल मुद्दा त ई बा कि उनुका पार्टी के जड़ अब उत्तर प्रदेश में महफूजे कहाँ बाचल बा. दिग्विजय सिंह जी के जतना कवायद करे रहल, कर चुकलन. बाकिर पार्टी के जनाधार ना बढ़ा पवले. दरअसल अइसने कई सवाल बावे जवना पर कांग्रेस संजीदगी से सोचबे ना कइलसि. पहिल त, दिल्‍ली में बइठल लोग अबहियो इहे सोचत बा कि कांग्रेस के अस्मत बचावे के जिम्मा गाँधीए परिवार का हाथ मे बा. बाकी लोग मौज करसु. कांग्रेस एही मुगालता में बिहार विधान सभा चुनाव में आपन इज्ज़त गंवा बइठल. सोनिया गाँधी आ राहुल गाँधी का साथे मनमोहनो सिंह ताल ठोंकत चुनावी मैदान में कूद पड़लन. बाकिर अंजाम का भइल ? २४३ सीट में से कांग्रेस के बस चारे गो सीट मिल पावल जवन बिहार में आजादी से लिहले अबले के सबले ख़राब रिकार्ड बावे.

दोसर, कांग्रेस के नेता अबही ले अपने गोड़ पर टाँगी मारत रहऽतारन. उत्तर प्रदेश में बाटला हाउस काण्ड के बेर-बेर दोहरवला के का जरूरत रहुवे ? कतहीं दिग्विजय सिंह त कतहीं सलमान खुर्शीद ओकरा के अपना जेब से बाहर निकाल गुलाल का तरह सबका ऊपर फेंक दिहले. बाकिर भुला गइले कि आजु के मुसलमान मतदाता अब बहुते होशियार हो गइल बा आ कांग्रेस के जितावे भा हरावे से बेसी ओकरा अपना जान-माल के हिफाज़त के फिकिर बा. लिहाज़ा ऊ त ओही के वोट दी जे ओकर जान माल के हिफाज़त करे.

तिसरे, आजु कांग्रेस के नेता उत्तर प्रदेश में मुसलमानन ला अलगा आरक्षण के बात करत बाड़े. सलमान खुर्शीद इहे कइलन ई सोचत कि शायद उत्तर प्रदेश के जनता फेरू झांसा में आ जावा. का ई साँच नइखे कि पिछला ६३ सालन में कांग्रेस सरकार एह बारे में सोचबो ना कइलसि. तबे नू एहो मौलाना बहुते तल्ख़ अंदाज़ में फरमवले कि भाई हमनी का का करीं. हमनी त कांग्रेस हाईकमान से मुसलमान मँगली, ऊ सलमान के भेज दिहलसि. सलमान मियां पत्नी मोह में पड़िके चुनावे आयोग पर बरस पड़ले आ अपने साथे पार्टीओ के किरकिरी करवा दिहले.

चउथे, मायावती अदालत के फटकार सुनला का बादो राज्य में स्थानीय निकायन के चुनाव ना होखे दिहली आ कांग्रेस भा भारतीय जनता पार्टी उनुकर कुछऊ ना बिगाड़ सकल. काहे कि मायावती ई बाति बहुते बढ़िया से जान गइल बाड़ी कि विधान सभा चुनाव में पंचायत के लोग के साथे होखल कतना ज़रूरी बा. आजुओ ६० फीसदी पंचायत उनुका साथे बा आ इहे उनुकर ताकत बा. जब कांग्रेस का लगे ऊ ताकत हइये नइखे त फेर मुंगेरी लाल के सपना देखला से का फायदा? जबले ठोस जनाधार आ स्थानीय स्तर पर लोग ना जुड़ी तबले कांग्रेस के ई सपना शायद कागजे तक सीमित रही. ई बाति राहुल बाबा आ कांग्रेस के बाकी लोग जतना ज़ल्दी समुझ लेसु, त बेहतर रही.

पांचवे, अमूमन सटीक तौर पर बाति कहे वाला सलमान खुर्शीद के चुनाव आयोगो आड़े हाथ लिहलसि आ केंद्र सरकारो के माटी खराब कर दिहलसि. मामिला राष्ट्रपति भवन ले चहुँप गइल आ फेर कांग्रेसे पार्टी के फजीहत भइल. एकरे अलावा कई कांग्रेसी नेता विपक्ष पर टूट पड़ला का बदले अपने घर में महाभारत शुरू कर देले. मिसाल का तौर पर कांग्रेसी सांसद पीएल पुनिया आ केंद्र सरकार में मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का बीच में घमासान पर बाकी लोग मजा लेत बा, आ कांग्रेस आला कमान तमाशा देखत बिया.

अइसनको में अगर कांग्रेस के लागत बा कि राहुल गाँधी अकेलही सभकर नाव पार लगा दीहें त ई एगो करिश्मे होखी. कांग्रेस आपन सीट भलही बढ़ा ले जाव बाकिर का ऊ मायावती के लंका ढहा पाई ई कहल बहुते मुश्किल बा. ख़ुफ़िया तंत्र के अनुमान बा कि कांग्रेस के सैंतीस से चालीसे सीट मिल पाई. अगर ई साँच बा त कांग्रेस आ खासकर के गाँधी परिवार खातिर ई खराब खबर बावे. राजनीति के पंडित मौलवी त अबहिये से कहल शुरू कर दिहले बाड़न कि राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश के महाभारत के चक्रव्यूह में कहीं अभिमन्यु जस फँस त नइखन गइल ? आ एही चलते ओहदिन ऊ लखनऊ के चुनावी सभा में अपना हाथे कांग्रेस के किस्मते त ना फाड़ दिहले ?


लेखक अजय एन झा वरिष्‍ठ पत्रकार आ समालोचक हईं. ईहाँके हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, आजतक, डीडी न्‍यूज, बीबीसी, एनडीटीवी अउर लोकसभा टीवी के वरिष्‍ठ पद पर काम कर चुकल बानी. अजय जी से संपर्क उनुका इमेल पर कइल जा सकेला.

ajayjha30@gmail.com

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