रउरो रेल यात्रा का दौरान ठगी के शिकार होत होखब, लाखो लोग रोज हो रहल बा, करोड़ो के ठगमारी जारी बा आ ना त कहीं आवाज उठावे वाला केहू बा, ना देखे वाला कि एह तरह के ठगमारी मत होखे.

सबेरे उठते जब रउरा चाय पियब त तीन रुपिया के चाय के पाँच रुपिया देबे के पड़ी, ठण्ढा पिये चलब त २२ रुपिया के बोतल ३० रुपिया में करीदे के पड़ी, पानी के बोतल से संतोष करल चाहब त १० रुपिया के बोतल १२ रुपिया भा कहीं कहीं १५ रुपिया में खरीदे के पड़ी. हद त तब हो जाला जब मध्यप्रदेश का स्टेशनन पर अखबार तक दाम से बेसी में खरीदे के पड़ी. एक एक अखबार के दाम रगड़ के हटावल रहेला.

रेलवे में खानपान के जिम्मा आई आर सी टी सी का जिम्मे बा जवना के रेट कार्ड में खाये पिये वाला हर सामान के दाम तय बा आ रेलवे के स्टेशन बा रेलगाड़ियन में ई सामान बेचे वालन के ओह रेट के मुताबिक दाम लेबे के चाहीं. बाकिर कतहीं ओह रेट के पालन ना होखे. रउरा रेट के बात करब त चाय वाला रउरा से झगड़ा करे लगीहें सँ, भा चाये ना दीहें सँ. लोगो सोचेला कि कि का झंझट करीं, चुपचाप रुपिया देत जाला आ रेलवे का नाम पर जनता के करोड़ो रुपिया रोज ई चाय वाला, कोल्ड ड्रिंक वाला, पानी वाला डकार रहल बाड़े सँ.

कई बेर आदमी के बरदाश्त करे के आदत, झंझट से दूर रहे के आदत ओकरा के बेवकूफ बने पर, ठगाये पर मजबूर कर देला. जरुरत बा एह बात पर सोचे के, एह तरह के ठगमारी के समाधान खोजे के. के पहल करी, के आवाज उठाई?


(निवेदक : शशिकान्त सिंह)

 465 total views,  10 views today

%d bloggers like this: