– पाण्डेय हरिराम

तमाम अटकल आ विरोध का बावजूद रेल मंत्री ममता बनर्जी भारत जइसन महंगाई पीडि़त देश खातिर प्रशंसनीय बजट पेश कइले बाड़ी. लोग अंदाजा लगावत रहे कि ऊ बंगाल पर बेसी जोर दीहें आ देश के बाकी हिस्सा के नजरअंदाज कर दीहें. विपक्ष एकरा खातिर मन बनाइयो लिहले रहुवे बाकिर आम आदमी के सीधे प्रभावित करे वाला रेल भाड़ा अउर यात्री किराये में कवनो बढ़ोतरी ना कर के ममता जी बढ़िये काम कइले बाड़ी. हालांकि ई लगातार आठवां साल ह जवना में यात्री किराया नइखे बढ़ावल गइल. रेल माल ढुलाई भाड़ा अउर यात्री किराया ना बढ़वला से महंगाई पर रेलवे के असर ना पड़ी आ जइसन कि अनेसा लगावल जात रहे कि महंगाई बढ़ जाई से ना भइल. ममता जी ढांचागत सुधार खातिर निवेश के प्रस्ताव करके रेलवे के क्षमता में सुधार का ओरि कदम उठावले बाड़ी. आरक्षण दर में कमी कइलो नीक कदम रहल. इहे ना, ममता जी के दिहल सबले खास तोहफा बा 700 किलोमीटर नया रेल लाइन बिछावे के योजना आ अगिला सात साल में सिक्किम छोड़ देश के सगरी राज्यन के राजधानियन के रेल से जोड़ देबे के योजना. एह सगरी सौगातन का बाद जवन सबले खास बात सामने आवत बा ऊ बा यात्री सुरक्षा अउर वित्त प्रबंधन. वित्त मंत्रालय आ योजना आयोग रेल मंत्रालय के कहले रहुवे कि किराया का ढांचा में बदलाव करीं लेकिन एह बजट में रेल मंत्री एह बात कर नजर अंदाज कर दिहली. दोसरा तरफ ऊ खर्चा बढ़ा दिहली. साथ ही वेतन वृद्धि, डीजल का दाम में बढ़ोतरी से खरचा बढ़ गइल. ममता जी ई नइखी बतवली कि आमदनी कइसे बढ़ी. यात्रियों पर जतना खर्च होला ऊ किराया ना बढ़ला का चलते 2006-7 के 6042 करोड़ से 2009-10 में बढ़के 19120 करोड़ हो गइल. ई साल त रेलवे खातिर अउरी कठिन साबित होखी काहे कि एह साल वेतन वृद्धि आ उड़ीसा अउर कर्नाटक से बाहर लौह अयस्क के ढुलाई पर रोक लगला का चलते आमदनी अउरी घट गइल बा. एही लेखा साल में खरचा 1,330 करोड़ रुपिया बढ़ गइल, जबकि कमाई 1,142 करोड़ रुपिया घट गइल. आजु रेलवे सौ रुपिया कमाए खातिर ए 95 रुपिया खर्च कर देले. साल 2007-08 में ई ऑपरेटिंग रेशियो एहसे बहुते कम (75.9/100) रहुवे. जाहिर बा कि अइसनका में रेलवे से बेहतर सुविधा खोजल बेमतलब होई. रेल का खजाना में अब बस 5,000 करोड़ रुपये बतौर रिजर्व राशि बाचल बा जवन हाल के दौर में सबले कम राशि बा. रेलवे का लगे अतना पइसा नइखे कि ऊ कैपिटल फंड आ विकास फंड में जमा कर सके जेहसे कि नया सामन खरीदल जा सके. आ यात्री सुविधा में बढ़ोतरी कइल जा सके. पिछला साल रेलवे कैपिटल फंड में एको रुपिया ना जमा कर पवलसि जवन कवनो संगठन के खस्ताहाली के पहिला सबूत बा.

अब बात आवत बा कि एह बजट में जवन लमहर लमहर हाँकल गइल बा ओकरा के लागू के करी ?एतना त सभका मालूम बा कि ममता बनर्जी के निगाह बंगाल के मुख्यमंत्री का कुर्सी पर टिकल बा. सवाल बा कि अगिला चंद महीना में अगर देश के एगो नया रेल मंत्री मिल जा ता, त का आज के बजट में जवन बड़हन- बड़हन योजनावन के एलान कइल गइल बा ओकरा के ठीक ढंग से लागू कइल जा पाई ? सवाल एहू बाति के लेके उठावल जा रहल बा कि जब रेलवे के माली हालत बेहद खस्ता बा, आ खुद रेलमंत्री एह बात के कबूलले बाड़ी, त एह योजनावन कातिर पइसा कहवाँ से आंई ? इहो कहल जा रहल बा कि जवन पुरनका योजना पिछड़ गइल बाड़ी सँ ओकनी का बारे में रेलवे के रुख साफ नइखे. एह सिलसिला में एगो कमीशन त बना दिहल गइल बा जे एह बाति के ब्योरा तइयार करी कि जवना पुरनका परियोजनावन के काम पिछड़ गइल बा ओकरा खातिर आवंटित राशि में से कतना रकम बाचल बा. बाकिर ओह योजनावन में तेजी कइसे ले आवल जाई एकरा बारे में बजट में कुछ साफ-साफ नइखे बतावल गइल.बाकिर अबही जवन ताजा स्थिति बा ओकरा के देखत इहे कहल जा सकेला कि बजट विकासोन्मुख बा आ हमनी के सकारात्मक सोच राके के चाहीं.


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.

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