विश्व भोजपुरी सम्मेलन : अध्यक्ष के बेबसी

ViBhoj-2015
काल्हु देवरिया के भागलपुर में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बइठक में संगठन के अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी के बेबसी बरबस छलक आइल सभका सोझा जब ऊ आपन इस्तीफा देबे के मनसा जतवलन.

बाकिर उनुका आपन बात कहे से पहिलहीं एह संगठन पर आपन पूरा पकड़ बनवले राखेवाला अरुणेश नीरन सभका के बता दिहले रहलन कि इस्तीफा सकारे के नइखे. आ सचहु केहु सकारे के तइयार ना भइल. बाकिर ओहू ले चिंता आ दुख के बात ई रहल कि केहू ना जाने चाहल कि अध्यक्ष कवना दुखे आपन इस्तीफा दीहल चाहत रहलन. अइसन ना रहे कि केहू चाहत ना रहे पूछे के, बस अतना हिम्मत ना रहुवे कि अइसन बात पूछे कि सही बात सामने आ जाव.

कबो बिहार केन्द्रित अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन में कुछ लोग के तानाशाही का चलते आ यूपी के लोगन का अनदेखी कइला का चलते शुरू भइल विश्व भोजपुरी सम्मेलन के सिक्का चलत रहे भोजपुरी का मामिला में. एकर महत्व आ ताकत अतना पुरहर रहल कि जल्दिए बिहारो के लोग एहमें शामिल होखे लागल आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन सभकर संगठन बन गइल. सभे एकरा संस्थापक स्व. परमहंस त्रिपाठी के योगदान के महत्व मानल आ बाद में उनुका निधन का बाद संगठन के अध्यक्ष पद पर सतीश त्रिपाठी के चुन लीहल गइल.

तबसे ले के अबले सतीश त्रिपाठी आपन जिम्मेदारी उठावत अइनी आ बाकी लोग नाम कमाए के आनन्द लेत गइल. भोजपुरी जगत के बहुते नाम एहसे नामी हो गइलें कि ऊ विश्व भोजपुरी सम्मेलन से जुड़ल रहलें. एहमें नाम गिनावे चलल जाव त बहुते नाम सामने आ जाई. बाकिर भोजपुरी के राजनीति के तनिको जानकारी राखे वाला सभे जानत बा एह नामन का बारे में आ हमरा खातिर जरूरी नइखे एह नामन के बतावल.

कवनो संगठन अपना सगरी बेकत के ले के चलले पर टिकाऊ आ मजबूत होले. आ अगर संगठन में लोकतंत्र ना रहे त मंच के इस्तेमाल क के आपन धाक जमावे वाला लोग मौका पावते एह तरह से हावी हो जाला कि संगठन ओकरा से कम महत्व के हो जाला. बाकिर तबो ऊ संगठन छोड़े ना. अपना मनमाफिक लोगन के सदस्य बना बनवा के संगठन पर आपन पकड़ बनवले राखेला भलही एह पकड़ से छटपटात संगठन मर जाव भा मरे जस हो जाव.

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के हालत ई बा कि एकरा सगरी सदस्यन के एकरा बइठकन आ फैसला के जानकारी ना दीहल जाला. कुछ लोग मिल बइठ के फैसला क लेला आ सभे ओकरा माने ला मजबूर होला. आजु एही सब का चलते बहुते लोग के मन विश्व भोजपुरी सम्मेलन से टूट चुकल बा आ अब एकर ऊ मान सन्मान नइखे रह गइल जवन रहत रहुवे. हँ कुछ खास संपर्कन का सहारे आपन गोटी सोझ करे आ अपना लोगन के गोटी सेट करे के काम बदस्तूर चलत बा आ चलत रही. एक त केहु के फुरसत नइखे आ दोसरे केहु में बरियार से रार बेसाहे के बेंवत नइखे.

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी जी के कहना रहल कि सम्मेलन आपन एगो त्रैमासिक पत्रिको के नियमित नइखे निकाल पावत त केकरा के दोस दीहल जाव. सम्मेलने से निकलल लोग आपन गोटी सेट क के अतना बड़ हो गइल बा कि अब ऊ लोग विभोज के चिन्हतो नइखे. जगहे जगह तरह के छोट छोट संगठन छोट छोट मकसद से बनावल चलावल जाए लागल बा आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन से जवना नेतृत्व के उमीद रहुवे तवन पूरा होखत नइखे लउकत. कहलन कि ठहराव से संगठन कमजोर होखे लागेला आ समय आइल बा कि एकरा के नया लोग चलावे आ आगे बढ़ावे का दिसाईं लागे.

बाकिर अतना त अध्यक्षो जी जानत होखब कि कवनो नया आदमी सामने नइखे आवे वाला काहे कि मौजूदा नेतृत्व केहू दोसरा के आगे आवहीं ना दी.

चलीं हमनी का नारा लगावत रहीं जा : भोजपुरी जिन्दाबाद ! भोजपुरी के मठाधीश जिन्दाबाद !!

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