शायद पालिटिक्स अब कुछ बदल गइल बा (बतकुच्चन 168)

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बात कहिले खर्रा, गोली लागे चाहे छर्रा.
कहे सुने ला त ई ठीक लागी बाकिर बेवहार मे आदमी सोच समुझ के बोलेला. साँच बोलल जरूरी होखेला बाकिर जहाँ ले हो सके अप्रिय भा कड़वा साँच से बचे के चाहीं. एगो अउर मुहावरा आएदिन इस्तेमाल होखेला आ उ ह पालिटिकली करेक्ट. कहल जाला कि लिखे बोले मे पालिटिकली करेक्ट रहे के चाहीं. अंगरेजी मे त चेयरमैन आ चेयरवुमैन का झगड़ा का चलते चेयरपरसन कहाए लागल बा बाकिर हमनी के भाषा मे चेयरमैनी अबहीले जिन्दा बा आ शायद ढेर दिन ले रहेवाला बा.

अब बाति आगा बढ़ावे से पहिले बात के संदर्भ बता दिहल जरूरी लागत बा. असल मे पिछला दिने दू गो अलग अलग घटना आजु के बतकुच्चन पर असर डलले बा. पहिला त रहल लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस के हरला के कारण खोजेवाला एंटोनी कमिटी के रपट आ दुसरका लालकिला का प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी के भाषण. एगो पालिटिकली करेक्ट रहल जबकि दुसरका पालिटिकली करेक्ट रहे के कवनो चिंता ना कइलसि. राजनीति से बतकुच्चन के कवनो मतलब ना होखे से हम त पालिटिकली करेक्ट रहला खातिर कवना शब्द भा शब्द समूह के इस्तेमाल कइल जाव एही पर आपन बात कूचब.
पालिटिकली करेक्ट ला कवनो भोजपुरी शब्द सोचे लगनी त घूम फिर के बात ठकुरसोहाती प आ के टिक गइल. ठकुरसोहाती माने उ बात जवन ठाकुर जी के सोहाव. आ एहिजा हर अधिकारी, मालिक ठाकुर मे शामिल बा. बात अइसन कहल जाव जवन एह लोग के नीमन लागो. आ लोकतंत्र मे आम जनतो मालिके बरोबर होले से इहो धेयान मे राखे के चाहीं कि आम जनतो के राउर बाति ठीक लागो. बाकिर कई बेर आम जनतो से अधिका ताकत एगो छोटहन समूहे के मिल जाला भा दे दिहल जाला आ कुछउ करे से पहिले, बोले से पहिले सोचे के पड़ेला कि ओह खास समूहो के नीक लागो.
से कमिटी का रपट मे सभका के गलत बता दिहल गइल बाकिर राहुल सोनिया के कवनो दोष ना निकललन एंटोनी. उनका कहे के मकसद एके रहुवे कि दस पाँच लईका एक संतोष, गदहा मरलन ना कवनो दोष. दोष त ओह लइकन के रहल जवना का चलते संतोष का हाथे गदहा मरा गइल! अब एहिजा सोचे वाली बात बा कि पंच केकरा बने के चाहीं, ओकरा जे सही बात कह सको कि ओकरा के जे ठकुरसोहाती बतियावे मे माहिर होखे. ठकुरसोहाती बतियावे वाला पंच पद से न्याय ना कर पावे. आ साँच कहीं त उ ओह ठाकुरो के नुकसान चहुँपावेला जेकरा ला ठकुरसोहाती बतियवलसि. हार के कारण के सही तलाश ना हो सकी त कारण मेटावल ना जा पाई आ कारण बरकरार रही त हार के हटावलो संभव ना हो पाई. वइसे कई बेर अपना चलते ना जीत के सामने वाला के गलती का चलते जीतल जाला. शायद एही आसे आस लागल बा एह लोगन के.

अब चलल जाव दोसरा बात पर. पीएम के भाषन कई बात ला अनोखा रहल. पहिला बेर कवनो अइसन प्रधानमंत्री बोलत रहे जेकर जनम आजादी के बाद भइल रहे. कवनो भरम होखे त बतावत चलीं कि राजीव गाँधी आजादी का पहिलही जनमल रहले. पीएम मोदी बिना लिखल भाषण करत रहले से माने के चाहीं कि उ उहे बात कहलन जवन उनका मन मे रहल. पालिटिकली करेक्ट होखे के चिन्ता ना करत पीएम मोदी उ कर गइलन जवन एकरा पहिले के कवनो प्रधानमंत्री सोचहू के हिम्मत ना कर सकत रहे. अपना भाषण मे महर्षि अरविन्द आ स्वामी विवेकानन्द के कहल बात दोहरवले. आ सबले बड़का बाति ई कि भाषण का अन्त मे भारत माता के जय आ वन्दे मातरम के नारा लगवा गइलन. एही सब के कमाल रहे कि लाल रंग के साफा ढेर लोग के भगवा रंग के बुझाइल आ कुछ लोग त एकरो आलोचना कर दिहले कि साफा बन्हला के जरूरते का रहे.

बाकिर का सचहू पीएम मोदी पालिटिकली करेक्ट होखे प धेयान ना दिहलन? हमरा त लागत बा कि उ पूरा तरह से पालिटिकली करेक्ट रहलन काहे कि शायद पालिटिक्स अब कुछ बदल गइल बा. रउरो सभे सोच के देखीं. तबले वन्दे मातरम !

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