– सुनीता नारायण

तनी सोच के देखीं. जब जब पेट्रोल के दाम बढ़ावल जात बा तेल कंपनियन के घाटा अउरी बढ़ जाता. काहे कि पेट्रोल आ डीजल के दाम के अन्तर अउरी बढ़ जाला आ लोग डीजल चालित वाहन का तरफ अउरी मुड़ जाला. डीजल के इस्तेमाल जतने बढ़ेला तेल कंपनियन के घाटा ओतने बढ़ि जाला. आ एहू ले खराब आ खतरनाक बाति ई कि डीजल वाहन हमनी के शहरन के पर्यावरण में अउरी जहर घोरे लागेला. परिणाम होला खराब स्वास्थ्य आ इलाज के बढ़त खरचा.

ई बाति सभे बढ़िया से बूझत बा बाकिर तबहियों केहु कुछ करत नइखे एह हालात के बदले खातिर.

आजु लोग के एही में बुद्धिमानी लागत बा कि कार महँग भलही खरीदो चले ऊ डीजल से. खुद सरकारे के कहना बा कि निजी वाहन में डीजल से चले वाला वाहन के इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ल. डीजल के मौजूदा खपत में से पन्द्रह फीसदी डीजल कार के बा. जबकि खेती का काम में मात्र बारह फीसदी इस्तेमाल बा. एह जानकारी का रोशनी में डीजल के दाम कम राखे के सरकार के नीति के पर्दाफाश हो जात बा. साफ मकसद बा कि गरीब के ईंधन के इस्तेमाल अमीर लोग का वाहन में करे के बढ़ावा दिहल.

तेलो कंपनियन के कहना बा कि डीजल ओह लोग खातिर महुते महँग पड़त बा. खाली डीजल बेचे में कंपनियन के हर साल 67,500 करोड़ रुपििया के घाटा होखत बा. जवन कि कंपनियन के कुल घाटा के साठ फीसदी बा. अगर पन्द्र फीसदी डीजल कार चलावे में लागत बा त एकर तमलब आहे भइल कि सालाना दस हजार करोड़ रुपिया से बेसी के अनुदान ओह कारन के अमीर मालिकन के दिहल जात बा. ई भारत के गजबे समाजवाद बा जवना में गरीब के लूट के अमीर के रियायत दिहल जात बा. कंपनियन खातिर घाटा आ पर्यावरण खातिर खतरनाक !

कार कंपनियन के दावा कि आधुनिक डीजल कार पर्यावरण के दूषित ना करस, साँच बाति नइखे. उत्सर्जन के आँकड़ा बतावत कि मौजूदा डीजल कार पेट्रोल कार का मुकाबिले सात गुना बेसी कण आ तीन से पाँच गुना बेसी दूषित गैस पैदा करेले. एहु बात के पर्याप्त प्रमाण बा कि डीजल कार से उत्सर्जित कण जहरीला आ कैंसर करावे वाला होला. एह प्रदूषण के सीधा संबंध दमा, फेफड़ा के रोग, जकड़ल खाँसी आ दिल के बीमारियन से होला. एहसे साफ जान लीं कि डीजल वाहन कतनो महँग भा बढ़िया होखो हमनी के स्वास्थ्य पर असर डलबे करेला.

डीजल कार के बढ़ावा देबे वाला युरोप आजु एकर बड़हन दाम चुकावत बा. हवा के साफ बनवले राखे में ओकरा दिक्कत होखत बा जबकि ऊ साफ से साफ ईंधन बनावे में बहुते निवेश कइले बा आ करत बा आ अपना गाड़ियन में एक से एक उपकरण लगवले जात बा एह प्रदूषण के रोके खातिर. डीजल में करिया कार्बन के मात्रा बहुते बेसी होला जवना से अमेरिका के वातावरण खराब होखल जात बा. अमेरिका में कार के ईंधन का आधार पर प्रदूषण मापदण्ड में कवनो रियायत ना दिहल जाव जवना चलते ओहिजा डीजल कार के बाजार नइखे रहि गइल.

त फेर भारत सरकार के नीति काहे अइसन बा ? विडंबना अउरी बेसी हो जाला जब देखल जाला कि अइसन कवनो नीति नइखे जवन एकरा के बढ़ावा देत होखे. हँ लूप होल जरूर बा. कार निर्माता जानेलें कि अगर ऊ सस्ता आ सबसिडाइज्ड ईंधन पर चले वाला कार बनइहें त बेसी कार बेच लीहें. आ ओकनी का हाथे सोना के खदान लाग गइल बा. ऊ एह धारणा के फायदा उठावत बाड़े कि डीजल के इस्तेमाल जरूरी सामान ढोवे खातिर आ सार्वजनिक वाहन में होखेला. ऊ इहो जानत बाड़े कि दुहरा दाम प्रणाली बनावल ना जा सके जवना में कार खातिर त बेसी दाम लिहल जाव आ बस ट्रैक्टर खातिर कम ! बस एही मजबूरी के ऊ फायदा उठावत बाड़े.

सरकारी एजेन्सियनो के ई बाति मालूम बा. एह चलते उहो जब तब एह दाम में गड़बड़ी सुधारे के बात करत रहेलें. बाजार जानेवाला लोग उपरे झाँपर बतियावत रहेला डीजल के दाम के नियन्त्रण मुक्त कइला का बारे में. काहे कि ओहू लोग के मालूम बा कि सरकार डीजल के नियन्त्रण मुक्त ना कर सके काहे कि एहीसे रेलवे के चले के बा, सगरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम आ खेतीओ के डीजल के जरूरत बा. ऊ जानेले कि डीजल के दाम बढ़वला से महँगाई बढ़ी आ सगरो एकर विरोध होखे लागी. आ एही बात के फायदा उठावत ऊ सबले नुकसानदायक बाति अमीर लोग के निजी वाहन में सबसिडाइज्ड ईंधन के इस्तेमाल का खिलाफ कुछ ना कहसु.

बाकिर बढ़त वित्तीय खरचा आ प्रदूषण के ध्यान में राखत अब एह बाति के ढेर दिन ले महटियावल ना जा सके. अब या त निजी इस्तेमाल में आवे वाला वाहन के ओकर प्रदूषण करे का आधार पर दाम लिहल जाव आ ना त निजी इस्तेमाल में आवे वाला डीजल वाहन के बनावही पर रोक लगावही के पड़ी. अघर ई कइल संभव ना होखे त डीजल कार आ वाहन के दाम पर दू सौ से तीन सौ फीसदी टैक्स लगा दिहल जाव जवना से कि दाम आ नीति के ई गड़बड़ी सुधारल जा सके. हमनी के पड़ोसी श्रीलंका ई कर चुकल बा. भारतो में हर कमिटी एकर राय दिहले बावे. बाकिर ई कइल नइखे जात.

साफ बाति बा कि डीजल खातिर बड़कन के लॉबी बहुते बरियार बा. ई सभे वाणिज्य का दुनिया में ताकतवर बाड़े आ अपना मतलब का हिसाब से नीति नवावे के ताकत राखेलें. ई सच्चाई दुखद आ जानलेवा बा.


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सुनीता नारायण

सुनीता नारायण (जन्म १९६१– ) भारत के मशहूर पर्यावरणविद हई आ हरित राजनीति अउर अक्षय विकास के समर्थक. सुनीता नारायणन साल १९८२ से विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र से जुडल बाड़ी आ एह घरी एकर निर्देशक बाड़ी. ऊ पर्यावरण संचार समाजो (Society for Environmental Communication) के निदेशक हई आ “डाउन टू अर्थ” नामके एगो अंग्रेजी पाक्षिक पत्रिका के प्रकाशितो करेली. भारत सरकार उनुका के साल २००५ में पद्मश्री से अलंकृत कर चुकल बिया.

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