Ashutosh Kumar Singh

– आशुतोष कुमार सिंह

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से, मोर प्रान बसे हिम-खोह रे बटोहिया
एक द्वार घेरे राम हिम-कोतवलवा से, तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया. ई गीत के सुनते मन में एगो गजब के आनंद के अनुभूति होखेला. भोजपुरी के ई अमर गीत आज से 99 बरिस पहिले सन् 1911 ई. में लिखल गइल रहे. जवना बेरा देश गोरन के गुलामी के जंजीर में जकरल रहे. अउर आजादी खातिर संघर्ष तेज हो गइल रहे. मोहदास करमचंद्र गांधी हिंद स्वराज (1909ई.) में लिख चुकल रहनी. जवना में उहां के भारत के राजनीतिक-सामाजिक भविष्य के चरचा कइले बानी. 2009 के ‘हिंद स्वराज’ के शताब्दी बरिस मनावल गइल रहे. अउर आज गांधी के एह किताब के आज के परिपेक्ष्य में प्रासंगिकता प बहस चल रहल बा. अउर ई मानल जा रहल बा कि गांधी अपना
हिंद स्वराज में भारत के जवन तस्वीर पेश कइले रहन ऊ आज ले पूरा ना भइल अउर जवन शंका जतवले रहन ऊ पूरा तरह से सांच साबित हो रहल बा.
ठीक एही तरह भोजपुरी,हिंदी आ अंग्रेजी में समान रूप से कलम चलावे वाला रघुवीर नारायण जब ‘बटोहिया’ गीत लिखलन जवना में भारतीय दर्शन के दर्शन होखेला. उनकर ई गीत ओह घरी पूर्वांचल में जन-जन के झकझोर के राख देले रहे. अउर आजो ई गीत भोजपुरियन के जुबान प बा.
अगिला बरिस एह गीत के लिखइला के 100 बरिस पूरा होखे जा रहल बा.
एकरा पहिले की हम रउआ लोगन से कवनो निहोरा करी हम एह गीत के लेखक रघुवीर नारायण के जिनगी के बारे में कुछ बतावे के चाहत बानी.
बाबू रघुवीर नारायण के जनम बिहार के छपरा शहर के दहियावां मुहल्ला में 30अक्टूबर,1884 ई. के एगो इज्जतदार परिवार में भइल रहे. उनकर पूर्वज कश्मीर से आइल रहन. बाबू रघुवीर नारायण के मकान छपरा जिला के नयागांव नामक स्थान में बा. रघुवीर नारायण के बाबूजी के नाम जगदेव नारायण रहे, जे छपरा के एगो नामी वकील रहन. रघुवीर नारायण जी अंग्रेजी, हिंदी आ भोजपुरी तीनों भाषा में समान रूप से आपन कलम चलवनी. बाकिर बटोहिया गीत लिख के उहां के अमर हो गइनी. राष्ट्रकवि दिनकर जी रघुवीर जी के साहित्यिक अवदान से बहुते प्रभावित रहन. उहां के बिहार के साहित्यिक प्रगति में रघुवीर जी के बारे में लिखले रहनी कि, बिहार में राष्ट्रीयता के आदि चरण आ जागरण के ऊ अग्रदूत रहन. पूर्वी भारत के हृदय में राष्ट्रीयता के जवन भावना मचलत रहे, ऊ सबसे पहिले इहें के बटोहिया गीत से फूटल आ एह तरह फूटल कि उहे गीत उहां के अमरों के कोटी में पहुंचा देलस. रघुवीर नारायण जी के बारे में अउर जादा जाने खातिर हम उहां के गांव नया गांव फोन क के कई लोगन से बातचीत कइनी त हमरा मालुम चलल कि उहां के गांव के जवन घर रहे ऊ नदी के भेंट चढ़ चुकल बा. उहां के परिवार वाला पटना में रहेलन. गांव के लोग बतवलस कि रघुवीर बाबू के नाम प एहिजा के रेलवे स्टेशन प एगो बोर्ड लागल बा, जवना प लिखल बा कि एही जनम भूमि प बटोहिया गीत लिखे वाला रघुवीर नारायण के जनम भइल रहे. एकरा अलावा उहां के नाम प एगो कला मंच गांव में बा जवन उहां के जन्म दिन मनावत रहेला. गांव के लोगन में एह बात के लेके रोष बा कि सरकार रघुवीर नारायण के नाम प ना त कवनो सरकारी भवन बनवले बिया अउर ना उहां के याद में कवनो स्मारक बनावल गइल बा.
अइसे में अब भोजपुरिया भाई लोग खुद निर्णय करे कि एतना महान विभूति के अवदान के हमनी के कइसे भुला गइल बानी जा? अगर हमनी के सांचो भोजपुरी के हिमायती बानी जा त हमनी के एह तरह के भोजपुरी के महान सपूतन के याद करत रहे के पड़ी. ई लोग हमनी के प्रेरणा के स्रोत बावे. दिल्ली चाहे अउर कहीं जब केहू ई कहेला कि आजादी के लड़ाई में भोजपुरिया लोगन के का योगदान रहल बा? त मन बौखला उठेला. खीस अपनो प बड़ेला. काहे कि हमनी के आपन साहित्य के बचा के नइखी स राख पाइल. बाकिर अबहियों समय बा कि हमनी के सुधर जाई जा.
हम चाहत बानी कि अगिला साल हम सब भोजपुरिया मिल के रघुवीर नारायण जी के एह गीत के शताब्दी बरिस मनावल जाव. जगह-जगह प भोजपुरी के राष्ट्र निर्माण में योगदान प चर्चा-परिचर्चा होखो. अउर हमनी के सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा के ओर आपन कदम बढ़ाई जा.
आज अतने अगिला हफ्ता फेर कवनो दोसर विषय लेके आइब.

राउर
आशुतोष कुमार सिंह

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