– पाण्डेय हरिराम

हालही में नार्वे का राजधानी ओस्लो में 32 साल के ब्रेविक धमाका कर के 80 आदमी के जान ले लिहलसि. मीडिया में कहल गइल कि ऊ दक्षिणपंथी विचारधारा का आवेश में रहुवे, माने कि ऊ हिंदुत्व के विचारधारा के आवेश में रहुवे. अइसन खबरन से हिंदुत्व का बारे में सुसंगत सोच राखेवाला लोग के बहुते तकलीफ भइल आ उनुका सोचे में दिक्कत भइल कि आखिर अइसन कइसे भइल आ काहे भइल ? जहां ले ब्रेविक के सवाल बा त एह खून खराबा से पहिले ओकरा सनक से ना त आसपास के समाज वाकिफ रहल ना पुलिसे के कवनो अइसन अनेसा रहल. एह घटना के बाद सरकारी जांच आ निजी खोज से पता चलल कि ऊ आदमी पिछला कुछ समय से एह सनक का गिरफ्त में रहल आ एकरा बारे में केहू के कुछ मालूम ना भइल. ऊ बहुते दिन से कई वेब साइटन पर आपन विचार बतावत लिखत रहुवे.

मनोवैज्ञानिकन के कहना बा कि सनक कुछ त अपना भीतर पनपेले आ कुछ बाहर के भड़काऊ तत्व से प्रोत्साहित होले. बाहरी भड़काऊ तत्व अकसरहा अइसन विचार के गलत दिशा का ओरि मोड़ देले. ब्रेविको के मनोवृत्ति कुदरत के एह नियम से अलग नइखे. बढ़िया पढ़ाई का बावजूद ब्रेविक के दिलोदिमाग में सनक अउर बेसिरपैर के विचार जनम लिहलसि आ इंटरनेट के माध्यम से दोसरा देशन के धर्म अउर संस्कृति से सीधा सम्पर्क होखला का बावजूद ओकरा सनक आ विवेकहीनता में कमी ना भइल.

ब्रेविक के एह अविवेकपूर्ण विचारधारा के भड़कावे वाला तत्वन में इस्लामविरोधी कट्टर हिंदुत्व विचारधारो एगो तत्व रहल. ओकरा भीतर दु तरह के विचारधारा रहुवे. पहिला त इस्लाम विरोधी आ दोसरका इस्लाम से बढ़त खतरा के अनदेखी करे वालन के इस्लाम के प्रति उदारता से उपजल खीस. हालांकि ई दुनु काल्पनिक रहे आ हकीकत से एकर कवनो लेना देना ना रहल. ई विचारधारा ठीक वइसने बा जइसे कवनो बच्चा के अन्हार में भूत के डर लागेला. इस्लाम से उपजे वाला काल्पनिक खतरा के भय शायद ब्रेविक के कट्टर हिंदू संगठन आ कट्टर आदर्श के साइबर दुनिया में पहुंचा दिहलसि. ऊ पहिले से तय मानिये चुकल रहुवे कि इस्लाम खतरनाक ह आ एह पृष्ठभूमि में जब ऊ वेब का दुनिया में कट्टर हिंदू संगठनन के ओह लेखन से दुचार भइल, जवना में मुसलमानन का हाथे हिंदुवन के सतावल जाये आ मुसलमानन के अवैध घुसपैठ के झूठ-साँच किस्सा रहल. ऊ एह लेखन के इस्लाम के खराब होखल साबित करे वाल विषयनिष्ठ विश्लेषण माने लागल.

अइसना में एह निष्कर्ष पर चहुँपल गलत होई कि हिंदुत्व विचारधारा खातिर ओकर चोंचलेबाजी ओकरा भीतर पनपत इस्लामविरोधी खीस के भड़का दिहलसि. एहसे उलट लागत त इहे बा कि ऊ हिंदुत्ववादी वेब साइटन पर से पढ़ल विचारन का रोशनी में अपना खुद के विश्लेषण के सही माने लागल. हमनीओ का अपना देश गुजरात अउर अयोध्या में भीड़ के सनक देख चुकल बानी. बाकिर कवनो एगो अकेला आदमी के सनक के अइसन उदाहरण अबही ले देखे के नइखे मिलल. प्रतिबद्धता का सहारे भीड़ के सनक पर काबू राखल जा सकेला. ई दोसर बाति बा कि अपना देश में अयोध्या अउर गुजरात जइसन सामूहिक सनक के घटनन पर काबू ना कइल जा सकल. एकर कारण ई रहे कि तब ओहिजा के सरकार ओकरा पर काबू कइल चाहते ना रहली सँ. जहाँ ले कवनो अकेला आदमी के सनक के सवाल बा त कवनो सरकार चाहे ऊ कतनो प्रतिबद्ध काहे ना होखे, ओकरा पर काबू ना कर सके. एह जानकारी में हिंदुत्व भा कवनो मजहब के प्रचार करे वालन के गंभीरता से सोचे के चाहीं.



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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