आधुनिक काल के एगो महान खगोलविद् कार्ल सगन के कहना बा कि वैदिक खगोल विज्ञान के समय माप अकेला माप ह जवन आधुनिक समय माप से मेल खाला. अब चूंकि सगन नास्तिक रहले से मानल जा सकेला कि उनुका पर कवनो साम्प्रदायिक प्रभाव ना रहल होई. एगो दोसर खगोलविद् के कहना बा कि साढ़े चार हजार साल पहिले कइल वैदिक गणना आजु के गणना से एकहू मिनट फरका नइखे. जबकि वैज्ञानिक वैदिक ज्ञान, जवन कि हिन्दूत्व आ हिन्दू धर्म संस्कृति के आधार ह, से सहमत लउकत बाड़न हमनी के तथाकथित लिबरल समाज वैज्ञानिक आ मीडिया के धूर्त ठग आ झूठा हिन्दूवन आ हिन्दू धर्म के लगातार गरियावत थाकत नइखन. एहमें से कुछ के त इहो मालूम नइखे कि कवन “बनावल” मजहब कत्ल करे करावे के शुरूआत कइलसि.

राजदीप सरदेसाई पारिवारिक आदमी हउवन. कवनो बाप का तरह उहो चाहत बाड़े कि उनकर संतान ओह भारत में पलाव पोसाव जहाँ लोग सम्प्रदाय का नाम पर खून ना करत होखे. ई एगो बढ़िया विचार बा. जॉन लेनन त कहले रहन कि “संप्रदाय के कल्पनो मत करऽ”. बाकि राजदीप ओह महतारी बापन के का कहीहें जे खुलेआम भगवान राम के “डिवाइन इन्क्रोचर” कहत गरियावत बाड़े? ई नवहियन के का सिखावत बा जब केहू कहत बा कि हिन्दूस्तानी मरद कुरूप होले ? ओह संपादक के का कहीहें जे हिन्दू विरोधी चैनल चलावत बा? ओह संपादक का बारे में का कहीहें जे पिछला छह महीना का दौरान उत्तर प्रदेश में भइल हाल के नौ गो दंगा के जिक्र तक ना करे? अगर राजदीप चाहत बाड़न कि भारत सांप्रदायिक हिंसा से फरका रहो त ऊ आ मीडिया में उनुकर दोस्त लोग एह बात के जरूर सकारस कि सांप्रदायिक हिंसा भारत में ना जनमल रहे. ई विदेशी रेगिस्तानन से आइल. राजदीप के सहायक लोग सोशल मीडिया के कुछ लोग के “इंटरनेटी हिन्दू” कह के अपमानित करे वाला अंदाज में संबोधित करेला. एह बारे में राजदीप के का कहना बा? ई अलग बात बा कि एह बात से आहत होखे वाला हिन्दू एकरा के सम्मान का रूप में सकार लिहले बाड़े.

ई लेख राजदीप के खिलाफ नइखे बाकि उनकर धेयान खींचे खातिर बा कि ऊ कवन गलती सुधार सकेले. अब इंटरनेटी आ जमीनीओ हिंदू कहल शुरू कर दिहले बाड़न कि “बस बहुत भइल!” ट्विटर पर चहचहावे वाला कुछ लोग बीच बीच में मीडिया आ आर्थिक मसला वगैरह पर राय बनावे खातिर मिलत रहेला. पिछला दिने अइसने एगो बइठका बैंगलुरू में २ दिसम्बर २०१२ के भइल जवना में खास वक्ता रहलें डा॰ सुब्रह्मण्यम स्वामी. एस गुरुमुर्ति, प्रो॰ आर वैद्यनाथन आ एम आर वेंकटेश. ई महानुभाव लोग जानल पहिचानल, सम्मानित हउवें आ आए दिन टीवी पर होखे वाला पैनल डिस्कशन में शामिल होत रहेले. एह बइठका के एगो रिपोरट एन सुरेश भेजले बाड़न जवना के मीडियाक्रुक के ब्लाग पर प्रकाशित कइल गइल बा आ एहिजा ओकर भोजपुरी भावानुवाद पेश कइल जात बा.

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डा॰ सुब्रह्मण्यम स्वामी (पूरा भाषण यू ट्यब पर) एह बइठका के उद्घाटन भाषण देत एह बात के रेघरियवलन कि इंटरनेट का चलते पढ़ल लिखल लोग के पुनर्जागरण भइल बा. ऊ एह बात पर जोर दिहलन कि भारत में सबे अपना के पढ़ल लिखल कहवावल चाहेला. एह लोग के जानकारी के ताकत के मानत उनकर कहना रहे कि एह लोग के अउरी जानकारी बिटोरे के भूख बनल रहेला. अइसनका लोग का सहारे देश के बड़हन विकास संभव बा बशर्ते सही नीति बनावल आ लागू कइल जाव. डा॰ स्वामी के एह बात पर आपत्ति रहे कि भारत के विकास दर के हिंदू विकास दर कहल जाला जबकि एकरा के कम्यूनिस्ट विकास दर कहे के चाहीं, काहे कि सोवियत विचारधारा पर चलला का चलते अइसन भइल. बतवलन कि कहात रहे कि भारत हद से हद साढ़े तीन फीसदी का दर से आगे बढ़ सकेला जबकि आर्थिक सुधार का राहे चलला पर हमनी के विकास दर साढ़े नौ फीसदी हो गइल. कहलन कि खाली ज्ञानवान होखले पर्याप्त नइखे हमहन का लगे रीढ़ो होखल जरूरी बा. एकरा के सोच के मसला बतावत स्वामी कहलन कि इहे एह बइठका के पीछे के सोच बा, सोच कि भारत के फेर से महान बनावल जाव.

उनुका संबोधन के बड़हन हिस्सा राजनीति के वोट बैंक, संप्रदाय, कानून व्यवस्था, आर्थिक मसला, अंतर्राष्ट्रीय मसला वगैरह पर रहल. बतवलन कि कइसे बांगलादेशी घुसपैठियन का चलते देश के कुछ हिस्सा में सांप्रदायिक संरचना में आवत बदलाव का चलते देश के सुरक्षा खतरा में बा. एकरा बाद डा॰ स्वामी देश के सोझा मौजूद भठियरपन के सवाल पर, देश के सुरक्षा पर, आ गलत निवेश प्राथमिकता पर चरचा कइलन.

एस गुरुमूर्ति के संबोधन (पूरा संबोधन यू ट्यूब पर) देश के संस्कृति, संस्कार आ विकास पर केन्द्रित रहल. बतवलन कइसे भारत आ चीन साल १७५० में दुनिया के अगुआ आर्थिक ताकत रहलें आ दुनिया के सकल उत्पाद के पचास फीसदी हिस्सा एह दुनु देश के रहल. फेर भारत के हिस्सा १.८ फीसदी रह गइल, चीन के ६ फीसदी. सबले तेज विकास दर वाला जापानो के भारत से स्पिनिंग तकनीक मँगावे पड़ल रहे. पिछला दिने आइल बड़हन आर्थिक संकट का दौरान जब सरकार उमेद छोड़ दिहलसि, बैंक निराश रहले, पता चलल कि भारत के आर्थिक ताकत मुंबई दिल्ली कोलकाता में ना रह के गुजरात में रहल. जवन पिछला बीस बरीस से लगातार विकास का राहे बढ़ल जात बा. गुरूमुर्ति कहलन कि पिछला दस साल में उनकर सगरी ज्ञान में बड़हन बदलाव आइल बा. उनुका एह बात के दुख बा कि देश के बड़का शैक्षणिक संस्थानन का लगे देश के आ एहिजा के समाज का बारे में जानकारी नामेमात्र के बा.

गुरूमुर्ति बतवले कि दुनिया के रेटिंग एजेन्सी देश के विकास क्षमता के मापदण्ड घरेलू बचत के मानेले. एगो मशहूर अर्थवेत्ता डा॰ जगदीश भगवती साल १९९२ ९३ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाह दिहले रहले कि एह घरेलू बचत के इस्तेमाल खरीद बढ़ावे में कइल जाव, लोग के अधिका खरच करे ला बढ़ावा दिहल जाव. सरकार त मान लिहलसि बाकिर देश ना मानल आ आपन बचत के संस्कार ना छोड़लसि. काहे कि सैकड़न साल से हमनी के इहे सिखावल गइल बा, एही तरह हमनी के साहित्य संस्कृति आ आध्यात्मिकत बा.

प्रो॰ आर वेंकटेश (पूरा संबोधन) अपना संबोधन में बतवलें कि एह बइठका के बाद के राह का होखे चाहीं आ का करे के होई. खास कर के तीन बात, शैक्षणिक संस्थान, मीडिया आ विश्व अर्थव्यवस्था, के चरचा कइलन. कहना रहल कि एगो वामपंथी रूझान वाला मानव संसाधन मंत्री के साल १९७३ में बनावल १४ गो शोध केन्द्र से मिलल प्रभाव का चलते देश के शैक्षणिक संस्थान आपन राह भुला गइलन. एह असर के खराब नतीजा अब लउके लागल बा. एगो उदाहरण देत कहले कि इतिहासकार रामचन्द्र गुहा के किताब में सरदार पटेल के नाम तक नइखे लिहल गइल आ एगो किताब में काश्मीर समस्या के जनक श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बतावल गइला बा!

कहलन कि जरूरी बा कि देश भर में अइसनका विचारमंडल, थिंक टैंक, बनावल जाव जे सुरक्षा, विदेश नीति पर सही राय बना सके. चिकित्सा आ अकाउटिग खातिर बनल नियामक संस्थन जइसन कवनो संस्था समाज विज्ञान खातिर नइखे. मीडिया पर चरचा करत वेकटेश के कहना रहल सोशल मीडिया पर राष्ट्रभक्त लोगन के बेहतर मौजूदगी का चलते मुख्य धारा वाला मीडिया छनकल बावे आ ओकरा १४० गो वर्ण वाला हमला से परेशानी होखत बा.

एह बइठका में अनेक समूह अलग अलग विषयन पर चरचा कइलन जइसे कि १) “मीडिया के का समस्या बा”, २) नारी – अधिकार आ कि सम्मान, ३) सूचना प्रौद्योगिकी कानून के धारा 66A के परिणाम, ४) धर्म/आध्यात्म वगैरह.

एकरा बाद प्रो॰ वैद्यनाथन मंच सम्हरले आ विदेशी किराना आ विदेशी निवेश के भारत पर असर का बारे में आपन संबोधन दिहले. (पूरा संबोधन). अपना संबोधन में ऊ कह देखवलें कि कइसे सगरी निवेश विदेशे से ना आवे आ निवेश के ३६ फीसदी घरेलू बचत से आवेला. जवन विदेशी निवेश आइल बा तवन मुश्किल से दू फीसदी होई. कहलन कि गोल्डमैन सैचो के कहना बा कि भारत के संरचना में निवेश के बड़हन हिस्सा घरेलू बचत से पूरा होला. बतवलन कि एचएसबीसी के एगो कर्मचारी के लीक कइल ७०० हिंदुस्तानियन के सूची में अइसन नाम बा जवन शायद एकरा के आयकर विभाग के समाधान आयोग से सेटल करवा सकत रहले. अरविंद केजरीवाल के कहना, कि एचएसबीसी में खाता खोलल स्टेट बैंक आफ इंडिया में खाता खोलला से आसान बा, से सहमत होखत वैद्यनाथन कहलें कि एह मसला पर रिजर्व बैंक के चुप्पी दिमाग चकरावे वाला बा. आ एहू ले खराब बा बरास्ते मारीशस होखे वाला मनी लाउंडरिंग.

जब राजनेता, मंत्री आ सम्मानित बैंक एह तरह के काम में लागल होखसु तब वित्त मंत्रालय के चुप्पी चिंता पैदा करेला. कहलन कि हवाला धन के हाल अइसन हो गइल बा जवना के आग जरा ना सके, पानी बुता ना सके, आ हवा सुखा ना सके. एह धन के आयकर अधिकारी छू ना सकसु, प्रवर्तन निदेशालय नोटीस ना जारी कर सके, आ रिजर्व बैंक सवाल ना कर सके. सेबी के कुछ पते ना लागी. मनी लाउंडरिंग के मीडिया गौरवान्वित कर के रखले बा. कहलन कि पश्चिम के ध्वंसे पर से भारत के उदय होई. बिखरत दुनिया भारत ला मौका बा आ सबले बड़का चुनौती इहे बा कि भारत जम के विकास काहे नइखे करत.

अपना संबोधन में प्रो॰ वैद्यनाथन कहलन कि अब्राहमिक आस्था रेगिस्तान में उपजल जबकि हमनी के संस्कृति नदी किनारे. दोसरा के बनावल मुद्दा पर प्रतिक्रिया दिहला से बेहतर होखी कि मुद्दा हमनी का बनाईं जा आ दोसर लोग ओह पर प्रतिक्रिया करसु. कहलन कि इंटरनेटी हिंदू भा साइबर हिंदू एगो महान राष्ट्रीय विचार से एकजुट बाड़े आ भड़ैता मीडिया ना हउवें. एह चलते इंटरनेटी हिंदूवन के रोकल ना जा सके, ई बढ़त जइहें, पसरत जइहें आ एगो साफ सनेसा भेजत रहीहें कि हिंदूवन से अझूरइही जन!

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इहां ले कि सु्प्रीमो कोर्ट के फरवरी २०११ में कहे के पड़ल रहे कि व्यक्तिगत कानून में सुधार ले आवे के सरकारी कोशिश हिंदूवन, जे एकरा के कुछ हद तक बर्दाश्त करे के आदी हउवें, से आगा ना बढ़ पावे.

“हिंदूवन से अझूरइह जन” हथियार उठावे के गोहार ना ह. ओवैसी का तरह ई “तिसरका लहर” के आह्वानो ना ह. ई त बस समाज वैज्ञानिकन के, हिंदू विरोधियन के, भारत के इतिहास का बारे में मक्कारी से झूठ बोले वाला इतिहासकारन के आ मैकाले के संतानन के दिहल एगो चेतावनी भर ह कि हि्न्दूवन आ हिंन्दूत्व के गरियावल बन्द कर देव लोग आ हिंदूवन के सहनशीलता के नाजायज फायदा मत उठावे लोग.

असल लेख अगरेजी में एहिजा पढ़ीं.


भोजपुरी के राजनीति करे का जगहा भोजपुरी में राजनीति करे के प्रयास ह ई आ अइसने लेख जवन आजुकाल्हु अँजोरिया पर दिहल जात बा. संपादक

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