हिन्दू धर्म ह कि सम्प्रदाय?

एह विवाद में पड़े से पहिले चली तनी कंप्यूटर का भाषा में कुछ बतिया लिहल जाव. कंप्यूटर इस्तेमाल करे वाला हर आदमी जानेला कि साफ्टवेयर दू तरह के होला. एगो ला पइसा ना देबे पड़े आ ऊ ओपन सोर्स कहाला. दोसरका के खरीदे के पड़ेला. जवना के खरीदे पड़ेला तवना के सोर्स कोड रउरा ना पा सकीं, मिलिओ गइल त ओकरा में फेर बदल ना कर सकी, ओकरा के अपना नाँवे ना चला सकीं. जबकि ओपन सोर्स साफ्टवेयर में रउरा पूरा आजादी होला कि रउरा ओकरा साथे का करत बानी. हालांकि एह औपन सोर्स आ क्लोज सोर्स का बीचे कई तरह के रंग, शेड, वाला साफ्टवेयर मिलेला. रिलीजनो में इहे होला. अब रउरा पूछब कि हम रिलीजन शब्द के इस्तेमाल काहे करत बानी, सीधे सीधे धरम काहे नइखीं कहत. त जान लीं जे कि धर्म आ रिलीजन मे बहुते फरक होला. रिलीजन ला हिंदी में संप्रदाय शब्द के इस्तेमाल सही होखेला. एकरा के पंथो कहल जा सकेला. धर्म खातिर अंगरेजी में सबले नजदीकी शब्द होला लॉ, कानून. आ कानून ऊ जवन शाश्वत होखे.

संप्रदाय भा पंथ के खासियत होले कि ओकर एगो धर्मगुरू होले, एगो धार्मिक पुस्तक, खास तरह के पूजा स्थल, खास तरह के रीति रिवाज, आपस में रोटी बेटी के संबंध वगैरह. हिंदू धर्म में ना त कवनो एगो धर्मगुरू बाड़न ना एगो धर्म ग्रंथ ना एक तरह के पूजा स्थल भा पूजा के तरीका. हिंदू धर्म कई तरह के, कह लीं कि जतना आदमी ततना तरह के, पंथ, समुदाय, संप्रदाय के महासँघ ह. एहिजा हर आदमी के आजादी बा कि ऊ का मानो का ना मानो. जे माँस मछली खाला उहो हिंदू, जे लहसून पियाज ले ना खाव उहो हिंदू. जे सबेरे साँझ पूजा करे उहो हिंदू आ जे उठत बइठत भगवान के गरियाओ उहो हिंदू. दोसरा कवनो संप्रदाय में अइसन आजादी नइखे. एही से जोश स्रेइ अपना एगो लेख में हिंदूत्व के गॉड प्रोजेक्ट के नाम दिहले बाड़न आ एकरा के ओपन सोर्स प्रोजेक्ट से तुलना कइले बाड़न.

एह लेख में लेखक हिंदू धर्म में मिलल आजादी के बेमिसाल बतवले बाड़न आ लिखले बाड़न कि जहाँ दोसरा संप्रदायन के भगवान आवते कमाड दिहल शुरू कर देलें, हिंदुत्व के भगवान लोगे से पूछेलें कि हम के हईं? हिंदूवे में देखे के मिल सकेला कि जहाँ एक तरफ शिव कल्याणकारी अमूर्त देवता हउवें ओहिजे दोसरा तरह राख भभूति लपेटले, गरदन में साँप लटकवले एगो बउरहवो जइसन. एह धर्म के माने वालन के आजादी बा कि ऊ आपन भगवान केकरा के मानसु, कइसे उनकर पूजा अर्चना करसु भा मत करसु.

हिंदुत्व विचार में कवनो राज रहस्य नइखे. सब कुछ खुला बा. हिंदुत्व में हर आदमी में भगवान के मौजूद मानल जाला आ अब ई ओकरा पर बा कि ऊ अपना भीतर बइठल भगवान तक कइसे आ कवना राहे चहुँपत बा.

– ओमप्रकाश सिंह

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2 Comments

  1. सादर नमन,

    धर्म धर्म होला अउर एकरा खातिर अगर अगरेजी शब्द चाहीं त रउआँ DHARMA ही लिखे के पड़ी…धर्म यानि एगो वटवृक्ष…अउर संप्रदाय चाहें पंथ के मतलब एगो ढारि (डाली) होला।
    मनीषी लोगन द्वारा जवन धर्म के लक्षन बतावल गइल बा..औ पर रउआँ गौर करबि त पाइबि की धर्म यानि शाश्वत, सुंदर जीवन।

    मनुजी धर्म के दसगो लक्षन बतवले बाने-
    धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह: ।
    धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌ ।। (मनुस्‍मृति ६.९२)
    ( धैर्य , क्षमा , संयम , चोरी न करना , शौच ( स्वच्छता ), इन्द्रियों को वश मे रखना , बुद्धि , विद्या , सत्य और क्रोध न करना)

    याज्ञवल्क्यजी धर्म के नौगो लक्षन बतवलने बाने-
    अहिंसा सत्‍यमस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह: ।
    दानं दमो दया शान्‍ति: सर्वेषां धर्मसाधनम्‌ ।।

    इहाँ रउआँ देखि सकेनी की धर्म यानि जीवन के मूल…कहले के मतलब इ बा कि धर्म बा तबे जीवन बा…ना त अजीवन बा…इ सब सनातन धर्म के लक्षण ह…अउर हिंदू धरम ही सनातन ह…

    हम धर्म के लॉ ना कही सकेनी…हँ अगर प्राकृतिक, नैतिक, परमाजीवन लॉ कहीं त इ तनि धर्म की समकक्ष बा…

    एक लाइन में कहीं त (सनातन धर्म = हिंदु धर्म = मानव धर्म = धर्म)…..धर्म बनावल ना जा सकेला जवनेगाँ..प्रभु के अस्तित्व बा, सत्य के अस्तित्व बा ओहींगा जबसे दुनिया बा तबसे धर्म बा…बाकि त बाद में चलावल गइल संप्रदाय आदि बा…..धर्म अउर पंथ (संप्रदाय) में सबसे बड़हन अंतर इ हे बा कि धर्म सनातन बा..पर पंथ चलावल गइल बा…धर्म उत्पत्ति से परे बा..पर पंथन के उत्पत्ति भइल बा….चलि हम अपनी बात के विराम देत इ हे कहबि कि …धर्म के महत्ता ए ही जान लीं की…हमनी जान जगि आदि में कहेनीं जा..कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो…त जवने में विश्व के कल्याण निहित होखे…उहे धर्म ह..जे धर्म (सनातन, हिंदू धर्म) के अनुयायी बा ओकरा खातिर पूरा विश्व एगो परिवार बा।। जय धर्म।।

    • पाण्डेय जी,

      सादर नमन.

      राउर टिप्पणी पढ़नी आ रउरा बात से हम बहुत हद तक सहमत बानी.

      एह लेख के मकसद हिंदू धर्म के बाकी रिलीजन से तुलना करे के समस्या पर चरचा कइल रहे. जवना लेख का चलते एकरा के लिखनी ओकरो लिंक दिहल बा. आ हम धर्म के निकटतम शब्द का रूप में लॉ के नाम लिहले बानी, पूरा पूरी में ना.

      आपन सफाई दिहल जरूरी लागल एह से जवाब देत बानी ना त हम चाहीलें कि सवाल जवाब में हम कहीं आपन फच्चर मत फँसाईं. दोसरे पता ना कवना कारण से राउर टिप्पणी स्पैम में चल गइल रहुवे एही से देर भइल. कवनो टिप्पणी में हम संशोधन ना करीं भरसक ओकरा के जस के तस प्रकाशित कर दीले बाकि अवांछित टिप्पणी प्रकाशित होखे से बाचे खातिर माडरेशन के अड़ंगा डाल के राखल गइल बा.

      सादर,
      ओम

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