– वैभव नाथ शर्मा

‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’

मकर संक्रान्ति हिन्दू धर्म के एगो प्रमुख पर्व ह. पूस महीना में जब सूरज मकर राशि में जालें त ओकरा के मकर संक्रांति कहल जाला आ ओहि दिने पर्व मनावल जाला. अकसरहां ई पर्व जनवरी का १३, १४, भा १५ तारीख के पड़ेला. अबकी १५ जनवरी के पड़ल बा. मकर संक्रान्ति का दिन से सूर्य उत्तरायण हो जालन. भारत वर्ष में अलग अलग जगहा एह पर्व के अलग अलग नाम से मनावल जाला बाकिर एकर धार्मिकता कतहीं कम ना होला. भोजपुरी इलाका में खिचड़ी, पंजाब हरियाणा में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, कर्नाटक, केरल, आ आंध्र प्रदेश में ‘संक्रान्ति’ का रुप में मनावल जाला. ‘दान का पर्व’ है. मकर संक्रांति से इलाहाबाद मे हर साल माघ मेले के शुरुआत होला जब लोग माघ महीना में गंगा-यमुना के रेत पर पंडाल बनाके कल्पवास करेला आ रोज गंगा स्नान कर के दान दे के किला में स्थित अक्षयवट के पूजा करेला. प्रलयो काल में नष्ट न होखे वाला अक्षयवट के बहुते महिमा होला. एह दिन ओकर पूजा-अर्चना से सगरी पाप नष्ट हो जाला आ ओह भक्त के स्वर्ग मिलेला. मकर संक्रांति का पहिले के महीना खर मास का नाम से जानल जाला जब कवनो शुभ काम ना होखे. मकर संक्रांति से सूर्य के उत्तरायण होखला का साथही सगरी मांगलिक कार्य के शुरुआत हो जाला. कहल जाला कि मकर संक्रांति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य के ग्रहण करे देवतागण खुदे पृथ्वी पर आवेलें आ ओहि रास्ते पुण्यात्मा शरीर छोड़के स्वर्गादि लोक में प्रवेश करेले. एहसे एकरा के आलोक पर्वो मानल जाला. एह दिन से सगरी मांगलिक कार्य जइसे – उपनयन संस्कार, नामकरण, अन्नप्राशन, गृह प्रवेश, भा विवाह आदि सम्पन्न होखे लागेला.

मकर संक्रान्ति का महत्व
शास्त्र का अनुसार, दक्षिणायन के देवता लोग के राति भा नकारात्मकता के प्रतीक आ उत्तरायण के देवता लोग के दिन भा सकारात्मकता के प्रतीक मानल गइल बा. एहसे एह दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण वगैरह धार्मिक क्रियाकलाप के खास महत्व होला. कहल जाला कि एह दिने दिहल दान सौ गुना बढ़के वापिस मिलेला. एह दिन शुद्ध घी आ कंबल दान मोक्ष दिलवावेला –
माघे मासि महादेव यो दाद घृतकंबलम।
स भुक्त्वा सकलान भोगान अंते मोक्षं च विंदति॥

मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व
मानल जाला कि एह दिन भगवान भास्कर अपना पुत्र शनि से मिले उनका घरे जाले. महाभारत काल में भीष्म पितामह आपन देह त्यागे खातिर मकरे संक्रांति के दिन चुनले रहले काहे कि उत्तरायण में देह छोड़े वाली आत्मा या त कुछ काल खातिर देवलोक में चल जाली भा पुनर्जन्म के चक्र से उनका छुटकारा मिल जाला. दक्षिणायन में देह छोड़ला पर बहुत काल तक आत्मा के अन्हार के सामना करे के पड़ेला. स्वयं भगवान श्रीकृष्ण उत्तरायण के महत्व बतावत गीता में कहले बाड़न कि उत्तरायण के छह महीना के शुभ काल में पृथ्वी प्रकाशमय रहेले आ एह प्रकाश में शरीर का परित्याग करे वाला के पुनर्जन्म ना होला.(श्लोक-24-25)

सूर्य पर आधारित हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के बहुत महत्व मानल गइल बा. होली, दीपावली, दुर्गोत्सव, शिवरात्रि आ दोसर त्योहार जहाँ विशेष कथा पर आधारित बाड़े, ओहिजे मकर संक्रांति खगोलीय घटना ह जवना से जड़ आ चेतन के दशा दिशा तय होला. एह पर्व में अध्यात्म, खगोल विज्ञान आ ज्योतिष शास्त्र तीनों के विशेषता समाहित बा एहसे एकरा के पर्वों का पर्व कहल जा सकेला.

मकर संक्रांति में अर्द्धकुम्भ व अन्य तीर्थो में स्नान :-
कुंभ स्नान स्वास्थ्य का दृष्टि में उत्तम होला. ‘मृत्योर्मामृतम्गमय’ के संदेश देबे वाला कुंभ आ सिंहस्थ स्नान के परंपरा बहुते पुरान ह. हर १२ वाँ साल में प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन आ नासिक में महाकुंभ आ छठवां साल में अर्द्ध कुंभ होला. सहस्रं कार्तिके स्नानं, माघे स्नान शतानि च। बैशाखे नर्मदा कोटि: कंभ स्नाने तत् फलम्।। कहे के मतलब कि कार्तिक मास में एक हज‍़ार आ माघ मास में सौ बार गंगा स्नान से आ बैसाख में नर्मदा में एक करोड़ बार स्नान कइला से जवन पुण्य मिलेला, ऊ माघ मास में महाकुंभ के अवसर पर मात्र अमावस्या पर्व में स्नान कइला से मिल जाला. एह साल प्रयाग में अर्द्ध कुंभ के संयोग बा. प्रयागराज तीनों लोकों में प्रसिद्ध ह. एहसे पवित्र तीर्थस्थल दोसर कतहीं नइखे. तबहिये त कहल गइल बा :- प्रयाग राज शार्दुलं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्। तत् पुण्यतमं नास्त्रि त्रिषु लोकेषु भारत्।। प्रयागराज में सूर्य पुत्री यमुना, भागीरथी गंगा आ लुप्त रूपा सरस्वती के संगम में जे स्नान-ध्यान करेला, कल्पवास करके पूजा-अर्चना करेला, गंगा के माटी अपना माथे लगावेला, ऊ राजसूय आ अश्वमेघ यज्ञ के फल सहजे पा लेला.

संक्रान्ति के दिन नहइला का बाद चावल, दाल की खिचड़ी आ काला तिल के बनल मिष्ठान वगैरह ब्राह्मण आ पूज्य व्यक्तियन के दान करे के परम्परा बा. एह दिन देश के सगरी धार्मिक स्थान भा धार्मिक महत्व के नदियन में स्नान करे के महत्ता बतावल गइल बा. साथ ही इहो कहल जाला कि एह दिन तिल, खिचड़ी आ गुड़ दान कइला से अशुभ परिणामन में कमी आवेला. एह दिन गंगासागर में स्नान-दान खातिर लाखों लोग के भीड़ जुटेला. कहल जाला कि `सारे तीरथ बार बार गंगा सागर एक बार.`


वैभव नाथ शर्मा जी प्रतिष्ठित वास्तु शास्त्री, अंक शास्त्री, आ ज्योतिषी हईं. इहाँ के कार्यक्रम अलग अलग टेलीविजन चैनलन पर आवत रहेला. काशी के होखला का चलते भोजपुरी से विशेष अनुराग बा आ अँजोरिया के पाठकन खातिर ज्योतिष आ वास्तु शास्त्र से जुड़ल आपन सलाह समय समय पर देत रहे के तइयार हो गइनी. वैभवनाथ शर्मा जी राजज्योतिषी परिवार से आवेनी. आशा बा कि वैभवनाथ शर्मा जी के आलेख से अँजोरिया के पाठकन के कुछ लाभ मिली.

अपना व्यक्तिगत समस्या खातिर रउरा शर्मा जी से संपर्क कर सकीलें. उहाँ के संपर्क सूत्र नीचे दिहल जा रहल बा
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