अबकी के लोकसभा चुनाव कई मामिला में खास होखे वाला बा. पहिला बेर कांग्रेस के हालत अतना खस्ता लागत बा जतना सन सतहत्तरो में ना लागल रहुवे. तबकि त इंदिरा गाँधी के अपना जीत के पूरा भरोसा रहुवे बाकिर जनता उनका भरोसा के हरावत जनता पार्टी के जीता दिहले रहुवे.

एक बेर अउर कुछ अइसने भइल रहे साल २००४ में जब बाजपेई सरकार अपना सफलता का गुमान में तारीख से छह महीना पहिलहीं चुनाव करा लिहले रहुवे आ जनता ओकरा शाइनिंग इण्डिया के हवा निकाल दिहले रहुवे.

एह बेर के चुनाव में एगो अउर खास बात आ गइल बा आ आपा नाम के पार्टी. दिल्ली के चुनाव में बिलाई का भागे सिकहर का टूटल ओकरा भरम हो गइल कि ऊ तीसमार खाँ हो गइल बिया. जेकरे तेकरे के चुनौती देत चलत बिया. एगो छोट राज्य के सरकार सम्हार ना सकेला वाला गोल अब देश के सरकार बनावे चलावे के सपना देखे लागल बा. बाकिर लोकतंत्र में हर आदमी आ गोल के अधिकार होला एह तरह के सपना देखे के.

अपना देश के राजनीतिक गोल में अबही ले होत इहे रहुवे कि गोल के माथ प के लोग आपन नेता चुन लेत रहुवे भा अपने के नेता घोषित कर देत रहुवे. अबकी पहिला बेर अइसन भइल बा कि नीचे से आवत जनमत के दबाव का सोझा गोल के झुके के पड़ल आ ओह आदमी के नेता मान लेबे के पड़ल.

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