11thyear-of-anjoriaआजु दस साल पूरा कर के एगारहवाँ साल में प्रवेश करत बिया अँजोरिया. एह दस साल में बहुते कुछ देखे सुने सीखे के मिलल. बहुते लोग आइल, मिलल, बतियावल, झगड़ल, आ अपना अपना राहे चल निकलल. रह गइनी हम, अँजोरिया आ रउरा सभे. अगर रउरा लोगिन के सहयोग, नेह ना मिलल रहीत त अँजोरिया के दीया अतना दिन ले ना जर पाइत. एहसे आजु सबसे पहिले हम रउरे सभे से आपन आभार जतावत बानी. अइसहीं नेह बनवले रहीं जेहसे कि उत्साह बनल रहो. राह लमहर बा, कष्टसाध्य बा. सबले बड़का बात ई कि ई सफर बिना कवनो लक्ष्य के चलत बा. कहाँ जाइब, कहाँ जाए के बा कुछ नइखे पता. बस चलल जात बानी. कह सकीलें कि अँजोरिया कवनो लक्ष्य खातिर ना बलुक मकसद खातिर चलत बिया. आ शायद एही चलते आजु ले चलतो रहि गइल. ना त बहुते लोग आइल बाकिर आपन उत्साह बनवले ना राख सकल आ फेर वापिस लवटि गइल.

एह दस साल के सफर में भोजपुरी के विकास पर हमेशा नजर बनल रहल. हमरा समझ से अगर आजु भोजपुरी के चरचा होखत बा त एकरा फिलिम आ गीत गवनई का चलते. इहे एकर ताकतो बा आ सबले बड़का कमजोरिओ. भोजपुरी में साहित्य लिखात बाड़ी स बाकिर ओकर पसार नइखे हो पावत. छपाई के माध्यम अतना महँग हो गइल बा कि कवनो प्रकाशक भोजपुरी किताब छापे के जोखिम नइखे लेत आ जवन लेखक कवि अपना पाले से धन लगा के आपन किताब छपवावत बाड़ें उहो लोग ओह किताबन के बड़का दायरा ले नइखे चहुँपा पावत. बस अपने हित मित दोस्त ले बाँट के रह जात बा. नियमित रूप से निकले वाली भोजपुरी के पत्र पत्रिका एक त बहुते कम बाड़ी सं आ ओहमें से अधिका के प्रचार पसार नइखे. एह बात के हम हमेशा रेघरियावे के कोशिश करेनी कि भाषा के जीवन्तता बनवले राखे खातिर जरूरी होला कि ओह भाषा में कविता, कहानी, गीत, उपन्यास, काव्य का अलावे समसामयिक विषयन पर आ ज्ञान विज्ञान का विषयो में रचना रचाव. एह दिसाईं बहुते कमी नजर आवेला काहे कि भोजपुरी में गैर साहित्यिक रचना के अकाल बा.

भोजपुरी के प्रचार पसार करावे के बोझा अपना अपना कान्ह पर उठवले भोजपुरी के कर्णधार लोग के असलियत जाने के होखे त केहू से दोसरा का बारे में पूछ लीं जे ओहिजा ना होखे आ तब सुनीं एक से एक मजेदार कहानी आ कमेंट. चार जने निजी हित लाभ के चिंता छोड़ भाषा के चिंता ला एक जगहा जुटस बइठस ई भोजपुरिया सुभाव का चलते संभव ना हो पावे. एहिजा जे ही बा से सिंकदर. अबर बानी दूबर बानी भाई में बरोबर बानी. केहू अपना के कम ना समुझे आ एही चलते कवनो एक राय ना बन पावे. भोजपुरी बोलेवालन के गिनिती अक्सर सुने के मिल जाई बीस करोड़. अब त पचीसो करोड़ कहाए लागल बा. बस एक बेर ओह विद्वानन से पूछ लीं कि भईया एह गिनिती के आधार का बा त असलियत के पता लाग जाई, भोजपुरी के कर्णधार भोजपुरी ला अतना समर्पित बाड़ें कि आपन सगरी ज्ञान विज्ञान अंगरेजी भा हिंदी में झड़ीहें. भोजपुरी सिनेमा के अधिकतर कलाकार भोजपुरी में बतियावे में आपन हेठी समझीहें. भोजपुरिया लोग का ड्राइंग रूम में महुआ टीवी भा अंजन टीवी भा हमार टीवी देखे वाला खोजले ना मिलिहें. एकर परिणाम का भइल? वेबसाइट खुलीहें सँ आ साल दू साल में बन्द हो जाई. महुआ टीवी के बात एहसे करब कि हमरा घरे टाटा स्काई के कनेक्शन बा आ ओहपर महुआ छोड़ दोसर चैनल ना आवे. महुआ टीवी के कार्यक्रम देखीं त अधिका समय या त टेलीशापिंग के शो मिली ना त हिन्दीयाइन भोजपुरी के कार्यक्रम. एह ला हम महुआ टीवी के संचालकन के दोस ना देब. दोस बा भोजपुरी बोले के दंभ करे वाला लोग के. अगर भोजपुरी चैनल के काम भर के दर्शक ना मिलीहें त कइसे चली कवनो चैनल? अगर पत्रिकन के रचना ना भेंटाई त नियमित रूप से छपी का आ अगर गाहक ना भेंटइए त छपी कइसे?

एह हालात में दस साल ले अँजोरिया चलावत रह गइनी त ओह ला कतना देबे के पड़ल से या त हम जानीले ना त हमार परिवार. चौबीस घंटा का दिन में अलग अलग काम से समय निकाल के कम, चोरा के अधिका, एकर सामग्री जुटावत रहेनी. खोजत हार गइनी बाकिर आजु ले कुछ लोग अइसन ना मिलल जे अँजोरिया आ अँजोरिया समूह के दोसरा वेबसाइटन ला सहयोगी ना मिल पवलें. अइसन नइखे कि लोग चाहे ना. असल समस्या बा भोजपुरी में लिखल, टाइप कइल. तब एह हाल में कब ले अंजोर में रह पाई अँजोरिया ई केहू ना बता सके. बाकिर जब ले रही तब ले अंजोर करत रही एतना वादा जरूर करब. जहिया ना चला पाएब तहिया हाथ जोड़ माफी माँग बिदा हो लेब. तब ले आवत रहीं सभे. अपना हित मित परिचितन के एह बारे में बतावत रहीं सभे. दस साल पूरा भइला का मौका पर हमार रउरा सभ से बस एके गो अनुरोध बा कि अपना दस गो मित्रन के ई मेल भेज के अँजोरिया का बारे में बताईं आ ओह लोग के भोजपुरी से जुड़े के गोहार लगाईं. कृपा होखी अगर ओह इमेलन के हमरो लगे भेज दिआव. चाहत बानी कि एगो बड़हन इमेल अभियान चलावल जाव. देखल जाव कि कतना लोग एह काम में जुड़त बा. एगो सपना देखत बानी कि एह साल अँजोरिया के दैनिक पाठक दस हजार ले चहुँप जासु बाकिर एह ला रउरा सभ के सक्रिय सहयोग जरूरी बा.

जिए भोजपुरी! भोजपुरी जीयत रही त हमनियो का जी जाएब.

रउरा सभे के,
ओम
संपादक प्रकाशक, अँजोरिया वेबसमूह

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