आजु से ७५ साल पहिले आजुवे का तारीख पर हिन्दी के अखबार “हिन्दुस्तान” के शुरुआत भइल रहे आ ६५ साल पहिले रामनवमी का दिने “सन्मार्ग” के. आजु दुनु अखबारन के संपादक अपना अतीत पर नजर डालत भविष्य के कवन राह चुनले बनवले बाड़न एह पर विचार कइल भोजपुरी पत्रकारितो खातिर जरुरी बा. अँजोरिया भोजपुरी में पहिलका वेबसाइट होखला का बावजूद खाली भोजपुरीए के ना सोचे बलुक भोजपुरीए में सोचेला. एह से सोचनी कि देखल जाव एह दुनु अखबार के संपादक लोग का कहत बा.

सन्मार्ग के संपादक हरिराम पाण्डेय अपना लेख में लिखले बाड़न कि, “सन्मार्ग तब शुरु भइल रहे जब समाज आंदोलन के उत्कर्ष पर रहे आ लक्ष्य रहे देश के आजादी. “सन्मार्ग” के शुरुआत करे वाला मनीषियन के चिंता रहे के अपना चिंतन, कर्म आ व्यवस्था के ओही राष्ट्रीय मर्यादा से जोड़ल जवन दू सौ साल के अंगरेजी शासन में भ्रष्ट आ दूषित हो गइल रहे. कोशिश रहे ओह मनाहियन के खतम कइल जवन दू सौ साल से हमनी के राह रोक दिहले रहे. बाकिर आजादी का बाद हमनी के आध्यात्मिक अवस्था आ व्यावहारिक कार्यप्रणाली के देश के लोकतांत्रिक संस्था, व्यवस्था आ शिक्षा प्रणाली चौपट कर के रख दिहलसि. ई अपना आप में एगो भयावह दुर्घटना रहल. आजु हमनी का सोझा चुनौती बा कि एह दुर्घटना से देश में फइलल निराशा के विश्लेषण करीं जा. सवाल उठत बा कि का एगो भारतीय का रूप में हमनी के भीतर देश से कवनो लगाव बाचल बा ? कतनो सोचला पर एके जबाब मिलत बा, ना ! काहे कि हमनी का आजु ले हिम्मत ना जुटा पवली जा कि पश्चिमी बौद्धिक दासता से मुक्त हो के सोच समझ के आपन औजार बना सकीं जा. आजु देश का प्रति लगाव खतम हो गइल बा आ ओह कमी के ढके खातिर हमनी का आत्म प्रदर्शन आ आडम्बर के रास्ता अपना लिहले बानी जा.” आगा लिखले बाड़न कि, “दुनिया में भारते एगो अइसन देश बा जहवाँ राष्ट्रीय अस्मिता दोसरा के विनाश से ना बलुक अपने सभ्यता के विविध चरित्र से बनल बा. “सन्मार्ग” के शुरुआत करे वाला मनीषियन के कहना रहे “नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै नमोऽस्तुरुद्रेंद्रयमानिलेभ्यो नमोऽस्तुचंद्रार्कमरुद्गणेभ्य:” ई मंत्र केहु के गोहार लगावे खातिर ना रहे बलुक अपना लक्ष्य के पावे खातिर अकेलही निकल पड़े के आह्वान रहे. ओह लोग खातिर लक्ष्य एगो साधन मात्र रहे साध्य ना. साधन मिलला का बाद साध्य त अपने से सध जाई.”

दोसर लेख “हिन्दुस्तान” अखबार के संपादक लिखले बाड़न. “हिन्दुस्तान” अखबारो के आजु पचहतरवाँ सालगिरह रहुवे आ आजु से ई अखबार आपन कलेवर बदलि के नया रुप में सामने आइल बा. “हिन्दुस्तान” के संपादक शशिशेखर लिखले बाड़न कि, “आजु के हिन्दुस्तानी समाज में ई दौर छटपटाहट के बा. १२१ करोड़ के बड़हन आबादी वाला एह देश के लागे लागल बा कि हमनी के व्यवस्था बंद दरवाजा आ खिड़िकियन वाला ओह पुरनका हवेली जइसन हो गइल बा जवन अपना अतीत का बासी अन्हार में कैद बिया.” बाकिर उनुका मन में ई सवालो बा कि, “एगो मीडिया संस्थान के मुट्ठी भर लोग ई कइसे तय कर सकेला कि अतना बड़हन पाठक वर्ग के चाहीं का ? ओकर जरुरत का बा ? ओकर आकांक्षा कवना तरफ देखत बा आ ओकरा हमनी से उमीद का बा ?” ऊ लिखले बाड़न कि, “सत्ता के चौहद्दी पर कब्जा जमवले लोग जतना दोषी बा ओतने दोषी बा आम आदमी पर बरीसन से थोपल असहायता के भाव जवन तरक्की के राह के रोड़ा बन गइल बा. ई समय अइसन गंभीर आत्ममंथन के बा जब खाली राजे करे वाला लोग ना, बलुक एह देश के जिम्मेदार अवामो सोचो कि एह काल जर्जर सिस्टम के काया कल्प में सक्रिय भूमिका कइसे अदा करे.”

एह दुनु अखबार के संपादकन के बाति मीडिया से जुड़ल हर आदमी संस्थान के राह देखावे वाली बा. एह पर मनन करे के आ ओह मनन का बाद आपन एगो राह निकाले के पड़ी. अँजोरिया आ भोजपुरी पत्रकारिता के त अबही बचपनो नइखे शुरु हो पावल. बाकिर बजुर्गन के अंगुरी पकड़ि के इहो लड़िका धीरे धीरे सयान होखी. आजु अँजोरिया एह दुनु अखबारन के सफलता के शुभकामना करत बिया.

संपादक,
अँजोरिया

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